सुनो उत्तराखंड : अब पर्वतीय जनपदों के बाद ,मैदानी जिलों में भी 12.5 एकड़ से अधिक भूमि की खरीद का रास्ता साफ , बजाओ ताली अब होगा विकास

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ख़बर उत्तराखंड से है अब साढ़े बारह एकड़ से अधिक भूमि खरीद और 30 साल के लिए भूमि लीज पर देने को लेकर लगभग चार माह से अटके अध्यादेश की राजभवन से मंजूरी मिलने के बाद अधिसूचना जारी हो गई है।
आपको बता दे कि पहले राज्य सरकार ने अध्यादेश में भांग यानी औद्योगिक हेंप के लिए भूमि लीज पर देने का प्रावधान किया था, पर इस पर राज्यपाल बेबी रानी मौर्य की आपत्ति थी। जिसके चलते राजभवन ने अध्यादेश को रोक रखा था।
अब जब सरकार बैकफुट पर आई और पिछली कैबिनेट बैठक में भांग की खेती के प्रावधान को हटा दिया गया।
आपको बता दे कि उत्तराखंड प में साढ़े बारह एकड़ से अधिक जमीन खरीद पर सीलिंग एक्ट के तहत प्रतिबंध है। उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 के अनुच्छेद 156 में यह प्रावधान है। पर्वतीय क्षेत्रों में यह व्यवस्था सरकार पहले ही खत्म कर चुकी है, लेकिन निवेश को बढ़ावा देने के लिए मैदानी क्षेत्रों में यह व्यवस्था समाप्त करने सरकार अध्यादेश लेकर आई थी। संशोधन प्रस्ताव में अनुच्छेद 156 में कृषि भूमि को बेमौसमी सब्जी, जड़ी बूटी, चाय बगान प्रसंस्करण तथा वैकल्पिक ऊर्जा के लिए 30 साल  पर लीज पर देने की व्यवस्था की गई है।
इससे पहले आपको बता दे कि
सरकार ने भांग की खेती के लिए भी भूमि लीज पर दिये जाने के प्रावधान को इसमें संशोधन के जरिये जोड़ा। फिर राजभवन ने अध्यादेश से औद्योगिक हेंप प्रसंस्करण को हटाने के लिए अध्यादेश सरकार को लौटा दिया था, लेकिन सरकार ने हटाए बिना दोबारा अध्यादेश राजभवन भेज दिया। इसके बाद राजभवन ने अध्यादेश को रोक दिया। आखिर सरकार ने 13 नवंबर को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में भांग की खेती को प्रावधान को अनुच्छेद 156 से हटा दिया। इसके बाद राजभवन ने सोमवार को अध्यादेश मंजूर कर राजस्व विभाग को लौटा दिया है, जिसकी अधिसूचना जारी हो गई है।
बता दे कि राजभवन के अध्यादेश रोकने से प्रदेश के सौर ऊर्जा के प्रस्तावित प्रोजेक्टों भी सर्वाधिक प्रभावित हुए। लगभग आठ सौ करोड़ के छोटे प्रोजेक्टों को सरकार मंजूरी दे चुकी है, जिसके लिए प्रोजेक्ट लगाने वालों को लीज पर भूमि की आवश्यकता है। अध्यादेश को मंजूरी नहीं मिलने से सौर ऊर्जा को प्रोत्साहित करने की योजना प्रभावित हो रही थी।
वही अब अध्यादेश को मंजूरी मिलने के बाद मैदानी जिलों में 12.5 एकड़ से अधिक भूमि की खरीद हो सकेगी। औद्योगिक निवेश के लिए अब कोई भी निजी भूमि मालिकों से भी भूमि ले सकेगा। पर्वतीय जनपदों में 12.5 एकड़ भूमि खरीद का प्रावधान सरकार पहले ही खत्म कर चुकी है।  बजाओ ताली अब होगा विकास।

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