जय बद्रीनाथ जी की जय केदारनाथ बाबा की खुले चुके कपाट ,व्यवस्था ठीक करें सरकार

केदारनाथ धाम के कपाट रविवार को सुबह 6.15 मिनट पर धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिये गये हैं। अब आगामी छह माह तक यहीं बाबा की पूजा होगी। इस दौरान राज्यपाल केके पॉल, विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचन्द अग्रवाल और बदरी केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशक सहित मंदिर समिति के मुख्य कार्यधिकारी बीडी सिंह समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। 
मंत्रोच्चारण के बाद केदारनाथ कपाट खुलने के शुभ अवसर पर महामहिम राज्यपाल ने सुबह 6.25 मिनट पर पूजा के लिए मन्दिर में प्रवेश किया। 6.40 तक गर्भ गृह में पूजन करने के बाद उन्होंने मन्दिर की परिक्रमा की। इसके बाद आम श्रद्धालुओं के दर्शन करने का सिलसिला शुरू हो गया। 
इससे पहले सुबह करीब चार बजे बाबा की चल विग्रह मूर्ति को मंदिर तक लाया गया। इस दौरान केदारघाटी भगवान शिव के जयकारों व सेना के बैंड की धुन से गुंजायमान हो गए। फिर वेदपाठियों, मंदिर समिति के पदाधिकारियों, रावल भीमाशंकर लिंग की मौजूदगी में पूजा अर्चना कर गृभ गृह की साफ सफाई की गई और पंचमूर्ति को गर्भगृह में स्थापित किया गया। इसके बाद मंदिर के कपाट आम भक्तों के दर्शनार्थ खोल दिए गए।
गौरतलब है कि बाबा के दर्शनों के लिए भक्त तड़के से ही लाइन में लग गए। परशो बारिश होने से धाम में तापमान में गिरावट दर्ज की गई। बावजूद इसके श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह देखने को मिला है। 

पंचकेदार की कथा के बारे में मान्यता है कि महाभारत के युद्ध में विजयी होने पर पांडव भ्रातृहत्या के पाप से मुक्ति पाना चाहते थे। इसके लिए पांडव भगवान शंकर के दर्शन के लिए काशी गए, पर वे उन्हें वहां नहीं मिले। वे लोग उन्हें खोजते हुए हिमालय तक आ पहुंचे। भगवान शंकर पांडवों को दर्शन नहीं देना चाहते थे, इसलिए वे वहां से अंर्तध्यान हो कर केदार में जा बसे। दूसरी ओर, पांडव भी लगन के पक्के थे, वे उनका पीछा करते-करते केदार पहुंच ही गए। भगवान शंकर ने तब तक बैल का रूप धारण कर लिया और वे अन्य पशुओं में जा मिले। पांडवों को संदेह हो गया था। आखिरकार भीम ने अपना विशाल रूप धारण कर दो पहाडों पर पैर फैला दिया। अन्य सब गाय-बैल तो निकल गए, पर शंकर जी रूपी बैल पैर के नीचे से जाने को तैयार नहीं हुए। भीम बलपूर्वक इस बैल पर झपटे, लेकिन बैल भूमि में अंर्तध्यान होने लगा। तब भीम ने बैल की त्रिकोणात्मक पीठ का भाग पकड़ लिया। भगवान शंकर पांडवों की भक्ति, दृढ संकल्प देख कर प्रसन्न हो गए। उन्होंने तत्काल दर्शन देकर पांडवों को पाप मुक्त कर दिया। उसी समय से भगवान शंकर बैल की पीठ की आकृति-पिंड के रूप में केदारनाथ में पूजे जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि जब भगवान शंकर बैल के रूप में अंतर्ध्यान हुए, तो उनके धड़ से ऊपर का भाग काठमाण्डू में प्रकट हुआ। अब वहां पशुपतिनाथ का प्रसिद्ध मंदिर है। शिव की भुजाएं तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में, नाभि मदमदेश्वर में और जटा कल्पेश्वर में प्रकट हुए। इसलिए इन चार स्थानों सहित केदारनाथ को पंचकेदार कहा जाता है।।.           बाबा के कपाट खुलने के दिन चर्चा का विषय ये रहा कि ना p.m मोदी आये ओर ना राज्य के मुखिया त्रिवेन्द्र रावत जिसको लेकर तरह तरह की चर्चा भक्त भी आपस में करते रहे तो वहां पुजारियो में भी ये विषय छाया रहा। साथ ही.    जो लेजर शो बाबा के धाम में चला उस पर पर पहले से ही सरकार की मंशा पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सवाल उठा चुके हैं और यही सवाल सूत्रों से मालूम चला कि भोले के कुछ भक्त भी एतराज जता रहे थे उनके अनुसार केदारनाथ धाम में स्वंय भगवान शिव विराजमान हैं लिहाज़ा वहां पर भगवान के रूप लेज़र शो के माध्य्म से दिखा कर सरकार करना क्या चाहती हैं शिव भक्तों के समझ से दूर रहा साथी अभी भक्तों ने कहा कि पर्याप्त मूलभूत सुविधाओं का अभी पैदल मार्ग पर अभाव हैं तो दूसरी तरफ आज यानी सोमबार को                     भगवान बदरीनाथ धाम के कपाट धार्मिक रीति रिवाज़ों और बद्रीविशाल की जयकारों के साथ बदरीनाथ के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खुल गए हैं।.  अब अगले छह माह तक भगवान बद्रीविशाल के साथ कुबेर व उद्धव पूजे जाएंगे। साथ ही भगवती लक्ष्मी मुख्य मंदिर से परिक्रमा में अपने मंदिर में विराजमान हुई। इससे पहले शीतकाल में भगवती लक्ष्मी भगवान बद्रीविशाल के साथ विराजमान थी। 
आपको बता दें कि प्रातः मंदिर मुख्य सिंह द्वार को फूल मालाओं से भव्य रूप से सजाया गया था। सुबह साढ़े तीन बजे बदरीनाथ के दक्षिण द्वार से भगवान कुबेर की डोली के साथ बामणी गांव के वृतिदारों ने परिक्रमा परिसर में प्रवेश किया। इसके बाद वीआईपी गेट से रावल और डिमरी पुजारी ने भगवान उद्धव के साथ परिक्रमा में प्रवेश किया। तदोपरांत मुख्य द्वार पर रावल और धर्माधिकारी, वेदपाठी के द्वारा पूजन किया गया। पूजन के बाद साढ़े चार बजे भगवान बद्रीविशाल के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिये गए।कपाट खुलने के साथ ही भगवान बद्रीविशाल की पंचायत में खजांची कुबेर भंडारी और भगवान उद्धव विराजमान हुए। 
कपाट खुलने से पहले रात 12 बजे से श्रद्धालु लाइनों में लगे रहे। वहीं सुबह कपाट खुलने के बाद दर्शनों की लाइनों में बद्रीविशाल की जयकारो से पूरा माहौल नारायणमयी हो गया। आस्था और विश्वास की इन दर्शन लाइनों में श्रद्धालु रात से डटे रहे। वहीं लंबी कतारों में श्रद्धालु तुलसी की माला से सजी थालियों के साथ मंदिर की ओर आगे बढ़ते रहे। इस दौरान बामणी और माणा की महिलाओं ने दांकुड़ी नृत्य किया। भगवान बद्रीविशाल के कपाट खुलने के साथ सिंहद्वार पर महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य किया।

भगवान विष्णु के बदरीनाथ कहलाने के पीछे मान्यता है कि जब भगवान विष्णु योगध्यान मुद्रा में तपस्या में लीन थे तो बहुत अधिक हिमपात होने लगा। भगवान विष्णु हिम में पूरी तरह डूब चुके थे। उनकी इस दशा को देख कर माता लक्ष्मी का हृदय द्रवित हो उठा और उन्होंने स्वयं भगवान विष्णु के समीप खड़े हो कर एक बेर (बदरी) के वृक्ष का रूप ले लिया और समस्त हिम को अपने ऊपर सहने लगीं। माता लक्ष्मीजी भगवान विष्णु को धूप, वर्षा और हिम से बचाने की कठोर तपस्या में जुट गयीं। कई वर्षों बाद जब भगवान विष्णु ने अपना तप पूर्ण किया तो देखा कि लक्ष्मीजी हिम से ढकी पड़ी हैं। तो उन्होंने माता लक्ष्मी के तप को देख कर कहा कि हे देवी! तुमने भी मेरे ही बराबर तप किया है सो आज से इस धाम पर मुझे तुम्हारे ही साथ पूजा जायेगा और क्योंकि तुमने मेरी रक्षा बदरी वृक्ष के रूप में की है सो आज से मुझे बदरी के नाथ-बदरीनाथ के नाम से जाना जायेगा। इस तरह से भगवान विष्णु का नाम बदरीनाथ पड़ा।।सोमबार को भगवान बद्री विशाल के कपाट खुलने के साथ ही अब यात्रा चारधाम का आगज़ हो चुका हैं इस बार उम्मीद जताई जा रही हैं कि चारधाम यात्रा में लगभग 50 लाख श्रदालुओ की आने की उम्मीद हैं ओर ये आंकड़ा आगे भी बढ़ सकता हैं लिहाज़ राज्य सरकार के आगे यात्रा बेहतर चलाना ओर हर भक्त को मूलभूत व्यवस्था करके भक्तों को देना किसी चुनोतियो से कम नही बोलता उत्तराखंड देवभूमि आने वाले हर यात्री को सुभकामनाये देता हैं और कहता हैं कि आप जरूर आये देवभूमि आपका स्वागत करने के लिए देवभूमि राज्य के लोग यात्रा चार धाम मॉर्ग पर आपका इंतजार कर रहे हैं और राज्य सरकार कर रही हैं आपका स्वागत

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