जनता ने कहा संदेश आगे दो ,तो बोलता उत्तराखण्ड ने ख़बर लिख डाली

राज्य कि अब तक कि सरकारों ने वादे खूब किये  पर किसी भी बड़ी योजना को जिसका सीधे सरोकार आम      आदमी से हो उस योजना को अमलीजामा पहना कर धरातल पर नही उतार पाए ये बात बोलता उत्तराखण्ड   इसलिए कह रहा हैं कि काफी समय से शोशल मीडिया में फेसबुक में वट्सप पर ये संदेश  रोज मिल रहे हैं  आपको मालूम हैं कि राज्य के हर मुखिया ने जनता से सुझाव मागे अपने अपने कार्याकाल में पर अमल हुवा होता तो आज जनता ये सब ना कहती आज़ के मुखिया ने भी जनता से  सलहा मागी सुझाव मांगे ज़िस पर ये संदेश खूब फेल रहा हैं क्या आप तक भी पहुचा अगर नही तो आप भी पढ़े               सरकार पलायन पर सुझाव मांग रही है, तो एक सुझाव मेरा भी-

सबसे पहले सभी पूर्व और वर्तमान मुख्यमंत्री, मन्त्री विधायक , अधिकारी, पूजींपत्ती , साधन सम्पन्न व्यक्ती अपने परिवारों को अपने गाँव मे स्थापित कर लें। अपने अपने गांवों को इस काबिल बना लें कि उनका परिवार उनके गांव में टिक जाएं, बाकी लोगों को फिर नसीहतें दें।
ये मुख्यमंत्री, मंत्री विधायको में से 17 साल में एक भी महानूभाव ऐसा नही निकला जो अपने गांव को इस काबिल बना पाया हो कि अपने बाल बच्चों मां बाप को अपने पैतृक घर मे रख सके। अपने गाँव मे एक ऐसा स्कूल नही खुलवा पाए जिसमे
अपने बच्चों को पढा पाए, ऐसा हॉस्पिटल नही खुलवा सके कि अपने वृद्ध माँ बाप या परिजनों का इलाज अपने गांव क्या अपनी विधानसभा के किसी भी अस्पताल में करवा सके।
अपने परिवार को कृषि से नही जोड़ पाये। ये जो सीधे तरीके से हम करदाताओं के पैसों की तनख्वाह पाते हैं और उल्टे तरीके से भी अअनियोजित विकास की आड मे हर योजना का 20 से 30% तक कमीशन भी खाते है, जब ये ही अपने परिवारों को गाँव मे रखने लायक नही बना पाये तो
आमजन के पास तो न पैसा है न ही सुविधा वो क्यों टिकेगा पहाड़ के अपने गांवो में।।

जिस दिन विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री सरकारी कमॆचारी ओर सभी साधन सम्पन्न व्यक्तियो का बच्चा गाँव के
सरकारी स्कूल में पढ़ेगा शिक्षा स्वयंम सुधर जाएगी। जिस दिन इनके वृद्ध माँ बाप का इलाज इनकी ही विधानसभा के सरकारी अस्पताल में होगा स्वास्थ्य सुविधाएं जरुर सुधर जाएगी।
जिस दिन इनका परिवार गाँव मे ही रहकर कृषि पशुपालन और अन्य कार्य शुरू करेगा रोजगार की समस्या खत्म होनी शुरू हो जाएगी।

इस मैसेज को इतना फैलाना है कि सरकार के सभी मंत्री व सभी नेता तथा सरकारी कर्मचारी व समाज के प्रत्येक साधन सम्पन्न व्यक्ति इस पर अमल करें । हम बदलेंगे _ जग बदलेगा , हम सुधरेंगें _ जग सुधरेगा ।। जय भारत _ जय उत्तराखण्ड ।।  अब बोलता हैं उत्तराखण्ड  कि आखिर इस संदेश मै गलत क्या लिखा हैं ??इस संदेश को पढ़कर ये लगा कि राज्य की जनता मतलब मेरे पहाड़ कि जनता 9 पर्वतीय जिलो  का दर्द हैं है ये संदेस   ये संदेश ये बता रहा हैं कि उनके साथ उनके अपनो ने ही छलावा किया हैं ये संदेश ये बता रहा हैं कि पाहड़ को अब राजनेताओ पर विस्वास नही रहा   ये संदेस ये बता रहा हैं कि नेता सिर्फ बोलते हैं करते कुछ नही ये संदेश ये बता रहा हैं कि  बढ़ते  पलायन  के सबसे बड़े कारण को इन्होंने खुद ही बता डाला हैं  अब देखना ये होगा कि पलायन आयोग के अध्य्क्ष तक ये संदेश पहुचा होगा कि नही अगर नही पहुचा तो स्याद अब चला जाये  मतलब साफ हैं पाहड़ कि जनता थक चुकी हैं राजनेताओ की मीठी मीठी बात सुनकर  फिलहाल पहाड़ ने देवभूमि में कमल खिलाया हैं इस उम्मीद के साथ कि पहाड़ का दर्द कम हो अब देखना यही हैं कि प्रदेश के मुखिया इस बड़ी चुनोती से कैसे निपटते हैं क्योंकि बोलता उतराखण्ड बार बार यही कहता हैं कि जो काम राज्य  के मुखिया  त्रिवेन्द्र रावत ना कर पाए  तो फिर उसे कोई दूसरा पूरा नही कर सकता लिहाज़ा मुखिया कि अग्नि परीक्षा हैं  पहाड़ की उमीदो  पर खरा उतरना…

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