जन्माष्टमी पर विशेष योग तीन गुना मिलेगा लाभ सुभ् कार्य की करो शुरुआत

बोलो भगवान कृष्ण भगवान की जय आपको बता दे कि भगवान कन्हैया का जन्मोत्सव पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। जिसकी तैयारियां पूरी हो चुकी है पूरे भारत मे श्रद्धालु पूरे उल्लास के साथ इस त्योहार को मनाते हैं, जिसकी अलग ही रौनक देखने को मिलती है। आपको बता दे कि इस बार दो सितंबर की रात 8:47 बजे से अष्टमी शुरू होगी, वहीं रोहिणी नक्षत्र 8:48 बजे से शुरू होगा। तीन सितंबर को रोहिणी नक्षत्र समाप्त होने पर रात 8:05 बजे व्रत का पारण होगा। हालांकि वैष्णव संप्रदाय को मानने वाले लोग तीन सितंबर को व्रत रखेंगे और चार सितंबर की सुबह सूर्योदय से पहले 6:13 मिनट पर व्रत का पारण करेंगे।

आपको बता दे कि कृष्ण जन्मोत्सव भादो महीने में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस बार जन्माष्टमी पर त्रिपुष्कर योग बन रहा है, जो बहुत ही शुभ माना जा रहा है। इस योग में जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं, उनका तीन गुना लाभ मिलता है। ज्योतिषाचार्य डॉ. सुशांत राज ने  बताया कि सृष्टि के पालनहार श्री भगवान विष्णु ने कृष्ण के रूप में आठवां अवतार लिया था। इसलिए कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। इस दिन श्रद्धालु व्रत धारण करते हैं। उन्होंने बताया कि व्रत के दौरान अन्न ग्रहण न करें। इसे पारण के समय पर ही खोलें। व्रत के दौरान श्रद्धालु ‘ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम:’, ‘योगेश्वराय योगसंभवाय योगपताये गोविंदाय नमो नम:’, ‘विश्वाय विश्वेश्वराय विश्वसंभावाय विश्वपतये गोविंदाय नमो नम:’ आदि मंत्रों का जाप करें।
आपको बता दे कि निशिता पूजा का समय 12:03 से 12: 49 तक रहेगा। भगवान के जन्म के बाद पंचामृत से बाल गोपाल का अभिषेक करें। उनको नए कपड़े पहनाकर शृंगार करें। ‘नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की’ कहते हुए बाल गोपाल को झूला झूलाएं। इसके बाद धूप-दीप कर आरती उतारें। 
आपको मालूम ही है कि भगवान विष्णु को तुलसी बहुत प्रिय है। विष्णु पुराण के अनुसार भगवान के भोग में तुलसी का पत्ता अवश्य शामिल करें। बिना तुलसी पत्ते के भगवान को भोग न लगाएं।
आपको बता दे कि भगवान कृष्ण जन्माष्टमी के दिन षोडशोपचार पूजा की जाती है, जो 16 चरणों में होती है। श्रीकृष्ण का ध्यान, आह्वान, आसन, पाद्य, अघ्र्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, चंदन, गंध, दीपक, नैवैद्य, तांबूल, दक्षिणा, आरती कर उन्हें भोग लगाएं।

: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस बार जन्माष्टमी 2 और 3 सितंबर को है। कई बार कृष्ण जन्माष्टमी दो अलग-अलग दिनों पर हो जाती है जब-जब ऐसा होता है, तब पहले दिन वाली जन्माष्टमी स्मार्त सम्प्रदाय के लोगों के लिए और दूसरे दिन वाली जन्माष्टमी वैष्णव सम्प्रदाय के लोगों के लिए होती है। जो कि इस साल भी 2 दिन पड़ रही है। जिसमें पहला दिन अर्थात 2 सितम्बर को स्मार्त की होगी और 3 सितम्बर को वैष्णव संप्रदाय कीमनाई जाएगी।

गृहस्थ जीवन वाले वैष्णव संप्रदाय से जन्माष्टमी का पर्व मनाते हैं और साधु संत स्मार्त संप्रदाय के द्वारा मनाते हैं। स्मार्त अनुयायियों के लिए, हिंदू ग्रन्थ धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु में, जन्माष्टमी के दिन को निर्धारित करने के लिए स्पष्ट नियम हैं। जो वैष्णव सम्प्रदाय के अनुयाई नहीं हैं, उनको जन्माष्टमी के दिन का निर्णय हिंदू ग्रंथ में बताए गए नियमों के आधार पर करना चाहिए।

धर्मग्रंथो के अनुसार भगवान श्री कृष्णा का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र में अर्धरात्रि को और बुधवार को हुआ था इसलिए हर साल इसी तिथि पर और इसी नक्षत्र में कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। पर हर बार ऐसा नहीं होता है कई बार हमको अष्टमी तिथि रात को नही मिल पाती और कई बार रोहिणी नक्षत्र नही हो पाता है।

इस साल भी 2 सितंबर को रविवार 8.48 रात तक सप्तमी तिथि है और उसको बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी और रविवार की रात को ही चंद्रमा भी रोहिणी नक्षत्र में उच्च राशि वृषभ मे ही है। इस बार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी रात्रि 8:48 बजे से शुरू होकर अगले दिन 3 सितंबर को रात्रि 07:20 बजे समाप्त हो जाएगी। 3 सितंबर को रात को 7.20 से नवमी तिथि है और मृगशिरा नक्षत्र है।

2 सितंबर को स्मार्त कृष्ण जन्माष्टमी मनाएंगे और 3 सितंबर को वैष्णवों के लिए कृष्ण जन्मोत्सव का त्योहार मनाया जाएगा। 2 सितम्बर को निशीथ काल में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र मिल रहा है जो कि स्मार्त संप्रदाय वालों के लिए है। 3 सितम्बर को अष्टमी तिथि एवं रोहिणी नक्षत्र उदया तिथि में मिल रही है। अतः वैष्णव संप्रदाय वालों को इस दिन मनानी चाहिए और इसी दिन व्रत करना चाहिए। वैष्णव मत वाले लोग जैसे कि मथुरा वृंदावन उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार यहाँ परलोग उदयकालीन अष्टमी तिथि को ग्रहण करते है रात को चाहे नवमी तिथि हो अष्टमी हो या न हो इसलिए कैलेंडर में 3 सितंबर की जन्म अष्टमी लिखी है।

जन्माष्टमी पूजन मुहूर्त :
जन्माष्टमी निशीथ काल पूजन का समय: 2 सितंबर मध्यरात्रि 11:57 से 12:48 तक शुभ मुहूर्त है और 3 सितंबर, 2018 को रात्रि 8:04 बजे तक निशीथ काल पूजन हैं।

स्मार्त लोग 2 सितंबर रविवार को कृष्ण जन्माष्टमी व्रत करेंगे। जन्माष्टमी के दिन, श्री कृष्ण पूजा निशीथ समय पर की जाती है। वैदिक समय गणना के अनुसार निशीथ मध्यरात्रि का समय होता है। निशीथ समय पर भक्त लोग श्री बालकृष्ण की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं।

जन्माष्टमी के दिन का अंतिम निर्धारण निशिता काल के समय, अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के शुभ संयोजन के आधार पर किया जाता है। स्मार्त नियमों के अनुसार हिंदू कैलेंडर में जन्माष्टमी का दिन हमेशा सप्तमी अथवा अष्टमी तिथि के दिन पड़ता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here