इस प्रचंड बहुमत ने ही सरकार को परेशान कर डाला है!!

राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत के लिए जनता का दिया गया बीजेपी को प्रचंड बहुमत ही अब गले की फांस बनता जा रहा है क्योंकि जानकार कहते है कि बीजपी के कही जीते हुए नेता सरकार से . नाराज . चल रहे है पर कुछ अभी बोलने से कतरा रहे है पर सरकार सब जानते है और बहुत से कारण निकलकर आये है इसी प्रचंड बहुमत के कारण वो अब तक राज्य को ना ही दो नए मंत्री दे पाए है और ना जरूरत के मुताबिक दायित्व धारी अब यदी सरकार ये कहे कि बिना दो मंत्री और बिना दायित्व धारी के बगेर सरकार बहुत बढ़िया काम कर रही है और विकास तेज़ी के साथ हो रहा है तो फिर सवाल ये उठता है कि पूरे अगले साढे तीन साल भी बीजपी को ना ही दो मंत्री पद भरने चाइए ओर न वो किसी को दायित्व दे ताकि राज्य पर बेवजह का बोझ ना बढ़े पर ये हो सकता नही है सर जी इसलिए अभी ओर इंतज़ार करना पडेगा बीजेपी के नेताओ को क्योकि इस प्रचंड बहुमत ने भी बीजपी के उन सभी नेताओ की किस्मत पर जब से सरकार बनी है तब से ही कुंडली मार दी है ओर ये सब भी अब उचित समय का इंतज़ार कर रहे है आपको बात दे कि दायित्व आवंटन में कोटे को लेकर कांग्रेस से आये मंत्रियों ने भी त्रिवेन्द्र सरकार को असहज किया हुवा है लाल बत्तियों की आस लगाये भाजपा कार्यकर्ताओं के सामने इंतजार का सूखा कम होने का नाम नही ले रहा है। हालाकि जब जब बीजपी के अध्यक्ष अमित शाह उत्तराखंड आये तो उनके उत्तराखंड दौरे से पूर्व पार्टी के राज्य प्रभारी श्याम जाजू की ओर से एक बयान जरूर आया जिसमें जल्द ही मंत्रीमंडल की दो रिक्त सीटों को भरे जाने और कुछ दायित्वों के आबंटन की बात कही गयी। लेकिन अब कोई भी इस बयान को गंभीरता से नही लेता क्योकि इससे पहले भी वह दो बार ऐंसा बयान जारी कर चुके हैं। क्योकि इससे पहले पिछले वर्ष दीपावली के मौके पर या होली के मौके पर कार्यकर्ताओं को तोहफे से नवाजने की बात कही। पर अब तक हुवा कुछ नही ओर अब तो राज्य मैं निकाय चुनाव सिर पर है ओर मिशन 2019 को फतह करने की तैयारियां भी जोर से चल रही है। ओर यही वजह है कि सीएम कोई फेसला नही ले पा रहे है एक आयोग में एक की नियुक्ति हुई तो उस पर भी उनके गैर भाजपा पृष्ठभूमि से होने के कारण पार्टी में असंतोष के सुर पिछले दिनों उपजे थे तो दूसरी तरफ कभी संगठन की नाव में सवार होकर तो कभी संघ से कदमताल कर अपने लिये ठिकाने तलाश रहे कथित क्षत्रप अब बुरी तरह झुंझलाने भी लगे हैं। क्योंकि एक तो ये प्रचंड बहुमत ओर इस प्रचंड बहुमत मैं बीजपी के पास एक से बढ़िया एक कदावर नेता है अब इस हाल में किन दो लोगो को मंत्री बनाये ओर किस को नही यहा पर डबल इज़न अब तक परेशान रहा है क्योंकि कम से कम बीजपी मे अभी वो 10 बडे नाम है जो मंत्री बनने के प्रबल दावेदार है पर इस प्रचण्ड बहुमत के कारण किसी के हाथ कुछ भी नही आ रहा है और जानकर बोलते है कि अगर अन 57 के प्रचंड बहुमत से 20 लोगो को छोड़ दिया जाए तो 27 के 27 बीजेपी के m.l.a जब से सरकार बनी है नाराज़ है बस किसी को अपने दिल का दर्द बया नही कर पा रहे है और ये भी इसलिए कि प्रचंड बहुमत है कुछ बोला तो परिणाम उनके खिलाफ ही होगा इसलिए अब पार्टी के क्षत्रपों का सवाल है तो उन्हें भी खुद को लेकर सीमित विकल्प ही लग रहे हैं। क्योंकि प्रचंड बहुमत के कारण पार्टी का आकार बढ़ा है। ओर कुछ मंत्रिमंडल में कांग्रेस से आये मंत्रियों का भी खासा आधार है और उनके साथ भाजपा में आये समर्थकों की भी खासी तादात है। एेंसे में दायित्वों के बंटवारे के समय संतुलन स्थापित करने की जददोजहद में भाजपा पृष्ठभूमि के क्षत्रपों का कोटा ही कम होगा। वहीं विधायक भी मन मानकर चुप हैं,क्योंकि जो विधायक खाली हैं उनमें से कई पिछली सरकारों में कैविनेट मंत्री रह चुके हैं। दायित्व आवंटन अथवा मंत्रीमंडल की सीट न भरे जाने पर पूर्व कैविनेट मंत्री विशन सिंह चुफाल अपनी खीज पहले कही बार अपने बयानों से उतार चुके है जता चुके हैं। अब भला त्रिवेन्द्र रावत इन हालातों में क्या करे वो भी चाहते है कि राज्य मे जल्द दो नए मंत्री बनाकर उनको काम सोपा जा सके ताकि राज्य का विकास तेज़ी के साथ हो क्योकि जनता को तो चुनाव से पहले यही कहा गया था कि एक बार जनता डबल इज़न की सरकार बना दे फिर देखना राज्य मे विकास अब यहा पर त्रिवेन्द्र सरकार क्या करे किस को बनाये ओर किस को नही यही सवाल दायित्व धारी बनाये जाने पर खड़ा होता है कि किस को छोड़ा जाए और किस को नही क्योकि यदि सब जीतकर जो आये उनको सबको पद दिया जाए तो फिर काग्रेस को वही मौका मिल जाएगा जो बीजेपी ने तब किया था जब वो विपक्ष में थी और हरीश रावत सरकार पर आरोप लगाए थे कि रावत ने अपनी सरकार बचाने के चकर मे सबको पद दे दिया ओर राज्य को नुकसान पहुचाया फिजूल खर्च बड़ा अब त्रिवेन्द्र रावत यहा पर सभी हालतों को जानते है दूसरी तरफ सगठन के वो लोग भी अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे है जब उनको महत्वपूर्ण पदों से नवाज़ा जाएगा पर कब कब और कब ओर स्याद अब जवाब ये ना मिले की लोकसभा चुनाव के बाद ओर ये हुवा तो त्रिवेन्द्र सरकार के लिए मुसीबत ओर चुनोतियाँ कम होने की जगह ओर बढ़ेगी राजनीति के जानकार आजकल सभी गुणा भाग लगा कर अपनी बात कह रहे है उनकी माने तो सरकार बनते ही बीजेपी को दो ओर नए मंत्री बनाकर ओर जरूरत के हिसाब से दायित्व देकर मामले को सुलझा देना था क्योकि कुछ बात बिगड़ती तो अब तक सब सही हो जाता लेकिन अब अगर बात बिगड़ी तो सब कुछ सही होते होते लोकसभा का चुनाव निकल जाएगा फिलहाल अब सब कुछ बीजेपी हाईकमान के हाथ मे क्योकि आदेश तो त्रिवेन्द्र सरकार को वही से मिलना है पर जनता से जो बड़े बड़े वादे डबल इज़न की सरकार ने किए है उनको समय पर पूरा करना त्रिवेन्द्र सरकार के लिए चुनोती है असंतोष बीजपी नेताओ को साथ लेकर चलना उससे बड़ी चुनोती

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