दुःखद ख़बर है भारतीय जनता पार्टी की दिग्गज नेता और भारत की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का 67 साल की उम्र में एम्स में निधन हो गया. मंगलवार रात दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्हें बेहद नाजुक हालत में रात 9 बजे उन्हें एम्स लाया गया लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके. देर रात उनके पार्थिव शरीर को जंतर-मंतर स्थित उनके आवास पर लाया गया. आज सुबह से ही उनके अंतिम दर्शन के लिए आम से लेकर ख़ास लोगो का सैलाब उमड़ने लगा है हर किसी की आंखे नम है इसके बाद उनके  पार्थिव शरीर को पार्टी कार्यालय में रखा जाएगा जिसके बाद दोपहर 3 बजे उनका अंतिम संस्कार होगा.।

बता दे कि सुषमा स्वराज ने 6 अगस्त को ही आखिरी बार ट्वीट किया था उन्होंने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी थी और फैसले का अभिनंदन किया. हार्ट अटैक के बाद 67 साल की उम्र में सुषमा ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. दिल्ली के एम्स में उन्होंने आखिरी सांस ली. रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें हार्ट अटैक आने के बाद अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. सुषमा स्वराज ने 6 अगस्त को ही आखिरी बार ट्वीट किया. उन्होंने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी थी और फैसले का अभिनंदन किया.
बता दे कि देश की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का उत्तराखंड से गहरा लगाव था। वे तीन अप्रैल 2000 से दो अप्रैल 2006 तक उत्तराखंड से राज्यसभा सदस्य रहीं थीं। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य भी किए थे।


मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लिखा है कि पूर्व  ‘विदेश मंत्री सुषमा स्वराज जी के निधन की खबर से बेहद क्षुब्ध हूं। सुषमा जी का जाना देश के लिए अपूर्णीय क्षति है। हम सबने एक कुशल राजनेता,प्रखर वक्ता,और मानवीय संवेदनाओं से भरपूर व्यक्तित्व को खो दिया। ईश्वर से प्रार्थना है दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।’

करोड़ोंलोगों के लिए प्रेरणा थीं सुषमा स्वराज- मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने सुषमा के निधन पर कहा- भारतीय राजनीति के एक गौरवपूर्ण अध्याय का अंत हो गया। गरीबों और समाज के लिए जीवन देने वाली अद्वितीय नेता के निधन पर पूरा भारत दुखी है। सुषमा स्वराज जी अपनी तरह की अकेली इंसान थीं। वे करोड़ों लोगों की प्रेरणा का स्रोत थीं।

पहला चुनाव 1977 में लड़ा था
सुषमा ने सबसे पहला चुनाव 1977 में लड़ा। तब वे 25 साल की थीं। वे हरियाणा की अंबाला सीट से चुनाव जीतकर देश की सबसे युवा विधायक बनीं। उन्हें हरियाणा की देवीलाल सरकार में मंत्री भी बनाया गया। इस तरह वे किसी राज्य की सबसे युवा मंत्री रहीं।
1998 में दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं
नब्बे के दशक में सुषमा राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हो गईं। अटलजी की सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया। 1998 में उन्होंने अटलजी की कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। हालांकि, इसके बाद हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा हार गई। पार्टी की हार के बाद सुषमा ने विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी और राष्ट्रीय राजनीति में लौट आईं।

1999 में बेल्लारी लोकसभा सीट पर सोनिया से हारीं
1996 में हुए लोकसभा चुनाव में सुषमा दक्षिण दिल्ली से सांसद बनी थीं। इसके बाद 13 दिन की अटलजी की सरकार में उन्हें केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनाया गया। मार्च 1998 में दूसरी बार अटलजी की सरकार बनने पर वे एक फिर से आईबी मिनिस्टर बनीं। 1999 में उन्होंने बेल्लारी लोकसभा सीट पर सोनिया के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन वे यहां हार गईं।
2014 से 2019 तक विदेश मंत्री रहीं
सुषमा 2009 और 2014 में विदिशा से लोकसभा चुनाव जीतीं। 2014 से 2019 तक वे विदेश मंत्री रहीं और दुनियाभर में भारतीयों को उन्होंने एक ट्वीट पर मदद मुहैया कराई। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों के चलते 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था। भाजपा की जीत के बाद मन जा रहा था कि वे दोबारा विदेश मंत्री बनेंगी, लेकिन उन्होंने खराब सेहत के चलते मंत्री पद नहीं लिया।


सुप्रीम कोर्ट की वकील रह चुकी थीं सुषमा
सुषमा स्वराज का जन्म 14 फरवरी 1952 को हरियाणा के अंबाला में हुआ था। उनका परिवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा था। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की और 1973 में सुप्रीम कोर्ट में वकील के तौर पर प्रैक्टिस शुरू की। सुषमा का स्वराज कौशल से 1975 में विवाह हुआ। स्वराज कौशल वकील हैं। वे मिजोरम के गवर्नर भी रह चुके हैं। 1990 में देश के सबसे युवा गवर्नर बने, तब उनकी उम्र 37 साल थी। तीन अप्रैल 2000 से दो अप्रैल 2006 तक उत्तराखंड से राज्यसभा सदस्य रहीं थीं





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