आज के समाज में हर लड़की की गुहार,“अगले जनम मोहे बिटिया ना कीजो”

निर्भया कांड़ के बाद लगा था कि महिला सुरक्षा को लेकर देश की तस्वीर बदलेगी, लेकिन ऐसा कुछ हुआ तो नहीं और न ही होता दिख रहा है। महिला सुरक्षा और उनके सम्मान को लेकर देश में कई बड़े-बड़े वादे किए गए। महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों को रोकने के लिए ‘सख्त कानून से लेकर पैनिक बटन’ तक तमाम खोकले वादों की झड़ी लगा दी गई। लेकिन साल 2017 में महिलाओं के खिलाफ कई निर्दयी वारदातें हुईं। जो हमें रुककर सोचने को मजबूर करती हैं। सरकारें महिलाओं के प्रति वाकई में कितनी संवेदशील और गंभीर हैं, इसका अहसास सरकार के किये खोखले वायदे करा देते हैं।

कहने को कह सकते हैं कि 2016 के मुकाबले 2017 में रेप, शील भंग और छेड़छाड़ यानी महिलाओं के खिलाफ़ होने वाले जुर्म के मामलों में कमी आई है। लेकिन सच्चाई तो ये है कि पिछले दो सालों में रेप के सिर्फ़ 15 मामले ही कम हुए हैं।

इस रिपोर्ट में देश में रेप के उन पांच ऐसे झकझोरने वाली वारदातों को पेश किया गया है। जो ‘नव भारत’ के दौर में सच्चाई की परत दर परत खोलती हैं।

साल 2017 की शुरुआत में यमुना एक्सप्रेसवे से जेवर-बुलंदशहर मार्ग पर चार महिलाओं के साथ गैंगरेप के मामले ने सबको सत्ते में ला दिया था। कार में सवार एक परिवार जेवर से बुलंदशहर जा रहा था। रास्ते में कार का टायर पंक्चर होने पर ड्राइवर मदद मांगने के लिए कार से उतरा। इसी दौरान छह लोगों के एक गिरोह ने उन पर चाकू और बंदूक की नोक पर हमला कर दिया।

 वे कार में सवार महिलाओं को पास की झाड़ी में खींचकर ले गए। उनके साथ गैंगरेप किया और वहां से फरार हो गए।

यह सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ। रेप के दूसरे चर्चित मामले में दिल्ली-गुरुग्राम सीमा पर चलती कार में सिक्किम की 26 वर्षीया महिला के साथ तीन लोगों ने गैंगरेप किया। रात दो बजे महिला को गुरुग्राम से अगवा किया गया। पांच घंटे तक उसकी को आबरू तार-तार करने के बाद हैवानों ने पीड़िता को सड़क पर फेंका और फरार हो गए।

इसी बीच शिमला में 4 जुलाई को एक स्कूली बच्ची के साथ दिल दहलाने वाली घटना सामने आई। बच्ची के साथ गैंगरेप किया गया। पीड़ित बच्ची शाम को स्कूल से घर लौट रही थी, लेकिन वह घर नहीं पहुंची। बच्ची की लाश दो दिन बाद कोटखाई के जंगलों में मिली।

मामले की जांच के लिए राज्य पुलिस द्वारा विशेष टीम भी गठित की गई। हालांकि, राज्य पुलिस ने मामले में छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया था, जिसमें से एक की हिरासत के दौरान मौत हो गई। इस मामले को ‘एक और निर्भया कांड’ के नाम दिया गया। सीबीआई अब इस मामले की जांच कर रही है। रेप की इस घटना पर देश उबल पर था।

वहीं गुरुग्राम के मानेसर में 19 साल की युवती के साथ गैंगरेप ने एक बार महिला सुरक्षा के खोखले दावों की पोल खोल दी। यह महिला अपने आठ महीने के बच्चे के साथ ऑटो से सफर कर रही थी कि ऑटो चालक और उसमें सवार दो अन्य लोगों ने मौका पाकर महिला के साथ गैंगरेप किया।

इस बीच जब बच्चा रोया, तो हैवानों ने उसे सड़क पर फेंक दिया, जिससे बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई।

 पांचवां मामला विशाखापट्टनम से है, जहां दिनदहाड़े सड़क किनारे एक महिला के साथ रेप के मामले ने सभी के होश उड़ा दिए। यहां एक शख्स शराब के नशे में चूर होकर खुलेआम महिला के साथ रेप करता रहा, सड़क पर लोगों ने महिला की मदद करने बजाय तमाशबीन बने रहे।

यही ही नहीं, कुछ लोग तो इस घटना को मोबाइल पर रिकॉर्ड भी कर रहे थे। ये मामले यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि निर्भया कांड के बाद महिला सुरक्षा को लेकर कुछ नया नहीं हुआ है या नहीं। भले ही केंद्र में सरकार बदली हो, लेकिन परिवर्तन और अच्छे दिन लाने के वादे के साथ आई नई सरकार भी पुराने रास्ते पर ही चलती दिख रही हैं।

सिर्फ कानून को कड़ा करने से ही रेप के यह मामले थम पाएगे, समाज को भी अपने नजरिए में बदलाव लाना होगा। देश में आय दिन ऐसी घटनाओं के चलते कोई भी महिला, सुरक्षित महसूस नहीं करती। यही कारण है कि समाज की हर लड़की यही गुहार कर रही है, “अगले जनम मोहे बिटिया ना कीजो”।

संदीप भारद्वाज

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