नौगांव प्रखंड के थली गांव में कुछ इस तरह जोखिम के साथ नदी पार करने को मजबूर हैं ग्रामीण।

नौगांव थली गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। इस गांव के लिए आज तक न कोई सड़क बनी और न पुल। पुल निर्माण नहीं होने से ग्रामीण और स्कूली बच्चे बल्लियों का सहारा लेकर कमल नदी को पार करने को मजबूर हैं। बरसात के दौरान थलनदी में तेज बहाव के कारण अस्थायी पुल बह जाता है।

इससे स्थानीय ग्रामीणों की समस्या बढ़ जाती है। ग्रामीणों व हर रोज करीब 50 स्कूली छात्रों को गांव से नौगांव बाजार तक आने में जर्जर संपर्क मार्ग, स्यूली पुल की जीर्णशीर्ण हालत व गोलना डंगार से लगातार पत्थर गिरने के भय के साथ ही लगभग सात किमी अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है। जंगल से सटे होने के कारण इस मार्ग पर जंगली जानवरों का भी भय बना रहता है।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता कृपाल सिंह राणा ने बताया कि वर्ष 1997-98 में पर्वतीय विकास मंत्री स्व. बर्फियालाल जुवांठा ने पुरोला रोड से साड़ा तोक पर सड़क भी स्वीकृत की थी, लेकिन पुल न होने के कारण यह सड़क भी पूरी तरह जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गई है।1थली गांव ऊपरी पहा¨डयों के मध्य घाटियों में बसा है, गांव के तीन किमी नीचे सभी ग्रामीण परिवारों की सिंचाई की खेती है। काश्तकार प्रतिवर्ष यहां लाखों रुपये की नगदी फसलें मटर, टमाटर, आलू ,अदरक बीन आदि का उत्पादन करते हैं, जिन्हें सड़क मार्ग तक लाने में ग्रामीणों के पसीने छूट जाते हैं।

जिससे प्रतिवर्ष काश्तकारों को लाखों रुपये का नुकसान ङोलना पड़ता है। थली गांव के ग्रामीण जयवीर सिंह, आंनद सिंह, दीवान सिंह, चतर सिंह, सोबत सिंह, खजान सिंह, सागर लाल, सरदार सिंह ने बताया कि आज तक न कांग्रेस और न भाजपा सरकार ने ग्रामीणों का दर्द नहीं सुना।

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