बिन नगदी सब सून, हालात नहीं सुधरे तो चार धाम यात्रा की रौनक, फीकी रहने के आसार

देहरादून- नवंबर 2016 वाले हालातों से जनता एक फिर रू-ब-रू हो रही है। हालांकि अबकी बार नोटबंदी नहीं हुई लेकिन एटीएम और बैंक की हालत नोटबंदी के दौर जैसी ही पतली है।
नगदी की इस किल्लत का साइड इफैक्ट ये है कि उत्तराखंड में चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है। अक्षय तृतीया के पर्व पर जहां मां यमुना और मां गंगा अपने-अपने धामों में विराजमान हो चुकी हैं।
वहीं इस महीने के आखिरी हफ्ते में बाबा केदार और भगवान श्रीबदरीनाथ जी शीतकालीन प्रवास को त्यागकर अपने-अपने धाम में विराजमान हो जाएंगे।
यानि चार धाम यात्रा के लिए जहां सूबे में सरकार और कारोबारियों ने तीर्थयात्रियों के खैरमकदम के लिए पलक पांवड़े बिछाने की तैयारी शुरू कर दी है वहीं ऑटॉमैटिक ट्रेलर मशीन नकदी के आभाव में रेस्ट मोड में चल रही हैं।
ऋषिकेश से लेकर चमोली और उत्तरकाशी से लेकर रुद्रप्रयाग के बाजार की एक जैसी हालत है। एटीएम के बाहर कतार लंबी है जबकि कैश कम।
तय है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो सबसे बड़ी दिक्कत उन तीर्थयात्रियों को उठानी पड़ेगी जो एटीएम के भरोसे उत्तराखंड पधारेंगे।
दरअसल चार धाम यात्रा के छोटे-छोटे पड़ावों पर दुकानदारों के पास स्वैप मशीन की सुविधा नहीं है। जबकि कई इलाके ऐसें हैं जहा इंटरनेट की सहूलियत या तो है नहीं अगर है तो कनेक्टिविटी बहुत वीक है।

ऐेसे में तय है कि अगर जल्द ही सरकार उत्तराखंड के चार-धाम यात्रा रूट पर भरपूर नगदी का इंतजाम नहीं कर पाई तो श्रद्धालु मन-माफिक खर्चा नहीं कर पाएगा। इससे जहां तीर्थयात्रियों की ख्वाहिश अधूरी रहेगी वहीं उन कारोबारियों के अरमानों पर भी पानी फिर जाएगा जिनकी रोजी-रोटी पूरी तरह से चार-धाम यात्रा पर ही टिकी रहती है।

बहरहाल बोलता उत्तराखंड को उम्मीद है के चार-धाम यात्रा के पीक पर आने तक सरकार नकदी का भरपूर इंतजाम कर पाएगी ताकि श्रद्धालुओं को खर्च न कर पाने का कोई मलाल न रहे वहीं दुकानदारों की मुस्कराहट भी कायम रहे।

दरअसल ये बात इसलिए कही जा रही है कि गंगोत्री-यमुनोत्री के कपाट खुलने के दूसरे दिन भी एटीएम की हालत कई इलाकों में नहीं सुधरी थी। रुद्रप्रयाग जैसे चार धाम यात्रा के अहम पड़ाव में मुख्यालय के एक दर्जन एटीएम खाली थे या नकदी के आभाव में उनके शटर डाउन थे।

ऐसे में सवाल उठता है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो चार धाम यात्रा पड़ाव से जुड़े उत्तराखंड के उन कस्बाई बाजारों की सेहत कौन सुधारेगा जिनकी साल भर की रोजी-रोटी 6 महीने की चार-धाम यात्रा से चलती है।

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