चार धाम स्टेडियम रख दिया जाए तो कैसा रहेगा सरकार!

 देहरादून-  बेशक कभी आंग्लभाषा के महान साहित्यकार विलियम शैक्सपियर ने लिखा हो कि नाम में क्या रखा है! लेकिन सियासत के गलियारे से गुजरो तो पता चलता है कि सियासत के लिए नाम बहुत माएने रखता है।

इधर वाले कुर्सी पर बैठते हैं तो बेशक जनता के लिए कुछ करें या न करें उनको गुमराह करने के लिए नाम का कार्ड खेल देते हैं।सड़क, अस्पताल, रोजगार, बिजली, पानी, घर, महंगाई जैसी मोर्चों पर जूझ रही जनता का ध्यान इन से हट जाए लिहाजा नाम-नाम की गेंद उछल जाती है।

बेचारी जनता इनका नाम, उनका नाम पर ही उलझ जाती है और  अगले चुनाव के लिए मोहरा बनकर सहूलियते सियासत के चौराहे पर जस की तस खड़ी रह जाती हैं।

कुछ ऐसा ही आजकल उत्तराखंड में भी हो रहा है। दरअसल उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी के रायपुर में स्पोर्टस कॉलेज से कुछ दूरी पर एक क्रिकेट स्टेडिम बना है।

जब सूबे में हरदा का राज था तो उस वक्त स्टेडियम का उद्घाटन हुआ था। यूपी और उत्तराखंड की क्रिकेट टीम के बीच मैच हुआ और स्टेडियम का नाम भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी के नाम पर रख दिया गया।

उस वक्त भी विपक्ष ने हो हल्ला मचाया और आरोप लगाए गए कि हरदा ने आलाकमान के सामने वफादारी के इम्तिहान में अपने नंबर बढ़ाने के लिए ये दांव खेला।

सच क्या है ये तो हरदा ही जाने। लेकिंन एक बार स्टेडियम के नाम को लेकर पंगा होने लगा है। खबर है कि राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का नाम बदलने की सरकार तैयारी कर रही है।

जैसे ही सरकारी मंशा की ये खबर लीक हुआ सड़क से लेकर सोशल मीडिया के प्लेटफार्म तक और चौक चौबारों से लेकर चाय की चुस्कियों के बीच स्टेडियम का नाम हॉट टॉपिक बन गया।

कांग्रेस वाले स्टेडियम का नाम किसी भी सूरत में बदले जाने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि सूबे की सत्ता पर काबिज भाजपा सरकार ने अगर नाम बदलने की गुस्ताखी की तो सड़क से लेकर सदन तक सरकार की इस मंशा की ईट से ईट बजा दी जाएगी।

कांग्रेसी सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर भी जनता का ध्यान टीएसआर सरकार की इस कोशिश की ओर खींच रहे हैं। एक पक्ष का कहना है कि पूर्व स्व. राजीव गांधी क्रिकेट स्टेडियम का नाम नहीं बदला जाना चाहिए।

जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि उत्तराखंड के लिए पूर्व पीएम स्व. राजीव गांधी का क्या योगदान है जो उनके नाम पर स्टेडियम का नाम रखा जाए। वहीं दूसरे पक्ष का नाम है कि स्टेडियम का नाम राज्य के शहीदों या राज्य निर्माण के लिए अपनी कुर्बानी दे चुके शहीदों के नाम पर हो। बहरहाल स्टेडियम के नाम को लेकर खिच-खिच हो रही है। सबने बांहे चढ़ा ली है कि मौका मिला तो दिखा देंगे।

नाम को लेकर हो रहे पंगे के बीच कुछ दानिशमंदों की राय है कि स्टेडियम का नाम बदला जाना चाहिए और उसका नाम चारधाम स्टेडियम रख दिया जाना चाहिए। स्टेडियम के चारों कोनों पर उत्तराखंड के चारों धामों के म्यूरल बनाए जाने चाहिए।

इस जमात का तर्क है कि चार धाम यात्रा उत्तराखंड की आर्थिकी की सबसे बड़ी रीढ है। खनन और शराब के बाद सरकार को चारधाम यात्रा से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर मोटा राजस्व भी मिलता है। चार धाम यात्रा राज्य की पहचान भी है। स्टेडियम का नाम चारधाम के नाम पर होगा तो चार धाम यात्रा का देश-विदेश में और प्रचार- प्रसार भी होगा। तीर्थयात्रियों की आमद भी बढ़ेगी और राज्य के राजस्व में भी इजाफा होगा। शायद चार धामों के नाम पर कोई विरोध भी न हो ऐसी भी उम्मीद है।

वैसे बोलता उत्तराखंड को भी ये राय जमी है। स्टेडियम का नाम बदलना ही है तो चार धाम स्टेडियम अच्छा रहेगा। बाकि सरकार की मर्जी ! हमने जो सुना हजूर आपके सामने रख दिया।

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