सुनो सर जी अब 16 साल के बाद इसी तरह से दुष्कर्म के मामले में एक साथ चार आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई है।
बता दे कि कोलकत्ता के धनंजय चटर्जी पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्हें एक नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या किए जाने के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई थी


उन्हें भारत में न्यायिक रूप से मृत्युदंड दिया गया था। उनको फांसी की सजा 14 अगस्त 2004 को अलीपुर सेंट्रल करेक्शनल होम, कोलकाता में दी गई थी। उन पर 14 साल की स्कूली छात्रा हेतल पारेख पर बलात्कार और हत्या किए जाने का आरोप था।

 

सुनो 14 अगस्त 2004 वो तारीख है जब देश में किसी रेपिस्ट को आखिरी बार फांसी की सजा दी गई थी।
नाबालिग छात्रा का रेप कर उसकी हत्या करने के जुर्म में आरोपी धनंजय चटर्जी को फांसी दी गई थी।
धनंजय को कोलकाता के अलीपुर जेल में फांसी दी गई थी, इस बात को 16 साल हो गए हैं। यदि उस समय से बात करें तो दुष्कर्म के मामले में कमी नहीं आई है। तब से लेकर अब तक देश में लगभग 5 लाख से अधिक रेप के केस हो गए हैं।
उसके बाद भी इन 16 सालों में किसी दूसरे रेपिस्ट को फांसी की सजा नहीं सुनाई गई। वैसे हैदराबाद में डॉक्टर के साथ हुए रेप और जलाकर हत्या किए जाने के बाद भी लोगों के रोगटें खड़े हो गए थे मगर उस मामले में पुलिस ने जल्द ही फैसला कर दिया था। केस कोर्ट में पहुंच ही नहीं पाया, पुलिस सबूत इकट्ठा करने के लिए आरोपियों को मौके पर लेकर पहुंची और वो भागने लगे, वहां गोली के शिकार हो गए और फाइल बंद हो गई।

धनंजय चटर्जी को जब फांसी हुई, तब केंद्र में नई-नई यूपीए की सरकार आई थी। मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम राष्ट्रपति थे। धनंजय चटर्जी ने राष्ट्रपति के सामने फांसी से छूट की गुहार भी लगाई थी लेकिन राष्ट्रपति ने उसे ठुकरा दिया।

वही इससे भी पहले रंगा और बिल्ला को फांसी की सजा दी गई थी। इन दोनों को हत्या और बलात्कार के आरोप में 1982 को फांसी दी गई थी। इस अपराध से पूरा देश हिल गया था। फांसी की सजा के बाद जुर्म और हत्या व बलात्कार के जैसे संगीन अपराधों में कानून का सख्त संदेश गया। इन दोनों ने दिल्ली के रिज इलाके से 26 अगस्त 1978 को दो बच्चों संजय चोपड़ा और गीता चोपड़ा का अपहरण किया था। 29 अगस्त को इनके शव मिले थे। गीता के साथ बलात्कार की पुष्टि हुई थी। हत्या और बलात्कार के आरोपियों रंगा और बिल्ला को फांसी की सजा सुनाई गई थी, उसके बाद उन्हें फांसी दी गई थी
ये भी जानो दुनिया में रेप के आरोपियों को सजा कैसे दी जाती है
– सऊदी अरब में रेप के दोषी का सिर क़लम कर प्राइवेट पार्ट काट दिया जाता है
– रेप के दोषी को अमेरिका में ज़हरीला इंजेक्शन देकर मार देते हैं
– यूएई में बलात्कारी को एक हफ्ते में ही फांसी दे दी जाती है।
– चीन में डीएनए मैच के बाद सीधा फांसी पर लटका दिया जाता है

जी हा निर्भया केस में दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में दोषियों विनय शर्मा, मुकेश सिंह, पवन गुप्ता और अक्षय कुमार सिंह के खिलाफ डेथ वारंट जारी हो चुका है।  चारों को 22 जनवरी को फांसी दी जाएगी।
बता दें 16 दिसंबर 2012 को देश की राजधानी नई दिल्ली में हुए गैंगरेप ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था।
जान लो ये भी ।

इस दिन नहीं दी जा सकती फांसी

किसी भी सरकारी छुट्टी के दिन फांसी नहीं दी जा सकती

फांसी की तारीख तय होने के बाद जेल सुपरिटेंडेंट कैदी के परिजनों को ख़बर देते हैं

जेल सुपरिटेंडेंट फांसी का वक़्त तय करते हैं , जिसकी जानकारी, आईजी, सेशन जज और सरकार तक पहुंचाई जाती है

फांसी के लिए सुबह या भोर का वक़्त तय किया जाता है, जिसे मौसम के हिसाब से ऊपर निचे किया जा सकता है।

सूली की जांच करते हैं एक्ज़ीक्युटिव इंजिनियर

मेडिकल ऑफिसर को कैदी की फांसी से चार दिन पहले ही ये बताना होता है की फांसी के फंदे पर लटकने के बाद कैदी के पैर और ज़मीन के बीच का गैप कितना होगा

आमतौर पर फांसी के फंदे पर लटकने के बाद कैदी के पैर और ज़मीन के बीच का गैप 6  से 8  फीट होता है , ये गैप कैदी के वजन और हाइट के मुताबिक़ तय की जाती है

अगर कैदी का वजन 45 किलोग्राम से कम है तो फांसी के फंदे पर लटकने के बाद कैदी के पैर और ज़मीन के बीच का गैप 8 फीट होगा

अगर कैदी का वजन 45 -60 किलोग्राम  है तो फांसी के फंदे पर लटकने के बाद कैदी के पैर और ज़मीन के बीच का गैप 7 फीट 8 इंच होगा

अगर कैदी का वजन 60 किलोग्राम से ज़्यादा है तो फांसी के फंदे पर लटकने के बाद कैदी के पैर और ज़मीन के बीच का गैप 7 फीट होगा

अगर कैदी का वजन 75 किलोग्राम से ज़्यादा है तो फांसी के फंदे पर लटकने के बाद कैदी के पैर और ज़मीन के बीच का गैप 6  फीट 6  इंच होगा

अगर कैदी का वजन 91  किलोग्राम से ज़्यादा है तो फांसी के फंदे पर लटकने के बाद कैदी के पैर और ज़मीन के बीच का गैप 6  फीट होगा

जिस रस्सी से फांसी दिया जाना है वो कॉटन का बना होना चाहिए , जिसका व्यास  3.81 cm तय किया गया है

फांसी के फंदे की लम्बाई फंदे पर लटकने के बाद कैदी के पैर और ज़मीन के बीच के गैप, कैदी के गर्दन की साइज़ के मुताबिक़ तय की जाती है

फांसी का फंदा तैयार होने के बाद जेल सुपरिटेंडेंट सूली की जांच करते हैं , फांसी से एक दिन पहले डमी टेस्ट होता है

डमी टेस्ट के लिए कैदी के वजन से डेढ़ गुना ज़्यादा वजन का बैग जिसमें बालू भरा होता है ,या डमी लटका कर रस्सी की मज़बूती चेक की जाती है

एक ही रस्सी का इस्तेमाल एक या एक से ज़्यादा क़ैदियों को फांसी के लिए किया जा सकता है , लेकिन किसी इमरजेंसी का सामना करने के लिए अलग से दो सेट रस्सी का इंतज़ाम भी होता है

रस्सी की मज़बूती का टेस्ट होने के बाद रस्सी और दूसरे सामानों को एक स्टील बॉक्स में रखकर सीलबंद कर दिया जाता है और स्टील बॉक्स को जेल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट के हवाले कर दिया जाता है

फांसी जेल परिसर में बने किसी ख़ास जगह या जेल परिसर में ही कहीं भी दी जा सकती है ,जेल परिसर के बाहर फांसी नहीं दी जा सकती

फांसी के तय वक़्त से पहले जेल सुपरिटेंडेंट , डेप्युटी सुपरिटेंडेंट , अस्सिस्टेंट सुपरिटेंडेंट , मेडिकल ऑफिसर, डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट द्वारा नियुक्त एक्ज़ीक्युटिव मजिस्ट्रेट अनिवार्य रूप से मौजूद होते हैं

कैदी अगर चाहे तो वो अपने मज़हब या विश्वास के मुताबिक़ किसी धर्मगुरु की मांग कर सकता है

फांसी के वक़्त कैदी के रिश्तेदार या दूसरे कैदी को फांसी देखने की इजाज़त नहीं दी जाती , लेकिन जेल सुपरिटेंडेंट अगर चाहे तो सोशल साइंटिस्ट , साइक्लोजिस्ट , साइकिएट्रिस्ट वगैरह जो रिसर्च करते हैं , उन्हें मौजूद रहने की इजाज़त दे सकते हैं

कैदी को सूली देखने की इजाज़त नहीं होती

फांसी के वक़्त 10  पुलिस कांस्टेबल और 2  हेड कांस्टेबल या 12  प्रिज़न आर्म्ड गार्ड का मौजूद होना ज़रूरी है

फांसी से पहले जेल के सभी सेल में सभी क़ैदियों को सेल के अंदर ही लॉक कर दिया जाता है

सभी तैयारी पूरी होने पर फांसी से एक घंटे पहले जेल सुपरिटेंडेंट , डेपुटी सुपरिटेंडेंट , एक्ज़ीक्युटिव मजिस्ट्रेट और मेडिकल ऑफिसर उस कैदी के पास जाते हैं , जिसे फांसी दी जानी है

जेल सुपरिटेंडेंट , डेपुटी सुपरिटेंडेंट , एक्ज़ीक्युटिव मजिस्ट्रेट दस्तावेज़ के आधार पर ये पुष्टि करते हैं की क्या ये वही कैदी है जिसे फांसी दिया जाना है  और कैदी को उसकी मातृभाषा में वारंट में लिखी बातें पढ़ कर सुनाई जाती है

कैदी की दस्तावेज़ी पुष्टि होने पर कुछ दस्तावेज़ों में कैदी के दस्तखत लिए जाते हैं , जिसके बाद कैदी के दोनों हाथ पीछे कर बांध दिए जाते हैं

कैदी को फांसी की सूली की तरफ लाया जाता है , लेकिन सूली तक पहुंचने से कुछ दूर पहले ही कॉटन कैप से उसके चेहरे को ढंक दिया जाता है , क्योंकि फांसी पर लटकने वाले कैदी को सूली देखने की इजाज़त नहीं होती

कैदी को सूली पर चढ़ाया जाता है , कैदी के गले में फंदा डाला जाता है , सभी तैयारी पूरी होने के बाद जेल सुपरिटेंडेंट जल्लाद को लीवर खींचने का आदेश देते हैं

30 मिनट तक फांसी के फंदे पर लटकता रहता है कैदी

लीवर खींचने के बाद कैदी को अगले 30 मिनट तक फांसी के फंदे पर ही लटकता छोड़ दिया जाता है , इसके बाद मेडिकल ऑफिसर मौत की पुष्टि करते हैं , जिसके बाद कैदी के शव को फांसी के फंदे से उतारा जाता है

कैदी के शव को जेल में ही उसके मज़हब की रीति रिवाज के मुताबिक़ अंतिम संस्कार किया जाता है

अगर कैदी का कोई रिश्तेदार शव की मांग करता है तो जेल सुपरिटेंडेंट उसे इस शर्त के साथ शव सौंपते हैं की शव का पब्लिक डेमोंस्ट्रेशन नहीं किया जाएगा

जेल सुपरिटेंडेंट, मेडिकल ऑफिसर और एक्ज़ीक्युटिव मजिस्ट्रेट का दस्तखत किया वारंट उस कोर्ट को वापस भेजते हैं

जेल सुपरिटेंडेंट फांसी की रिपोर्ट आईजी को भेज देते हैं

नोट:- ये सभी जानकारी मॉडल प्रिज़न मैन्युअल पर आधारित है सर जी


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