सचिवों की गैरमौजूदगी से भड़के उत्तराखंड सरकार के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, बैठक छोड़ी

त्रिवेंद्र सरकार के तेज़ तरार शहरी विकास मंत्री ओर शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक
ने आज बता डाला कि में भी परेशान हूँ इन अधिकारियो से भाई अरविंद पांडेय, भाई हमारे विधायक लोगों और लोकप्रिय मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र जी ,

आज मदन कोशीक का व्यवहार यही बया कर रहा था
दरसल मैं आज महत्वपूर्ण बैठक में सचिवों के बैठक में न आने पर मंत्री नाराज इस कदर हो गए कि बैठक बीच में ही छोड़कर चले गए बता दे कि मन्त्री कौशिक ने हरिद्वार कुम्भ के निर्माण कार्यों की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई थी। इसमें लोनिवि, सिंचाई, ऊर्जा, शहरी विकास व अन्य विभागों के सचिवों को बुलाया गया था। लेकिन केवल शहरी विकास विभाग के सचिव शैलेश बगोली और लोनिवि सचिव आरके सुधांशु ही बैठक में पहुंचे सचिवों की गैरमौजूदगी से कौशिक भड़क गए औए बैठक छोड़ कर चले गए।
वही बाद में मीडिया के सामने कौशिक ने अपनी नाराजगी को जाहिर नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि सूचना समय से प्राप्त न होने से सचिव नहीं आए। दोबारा बैठक होगी, जिसमें सभी सचिव उपस्थित रहेंगे ( ये उनका कुशल बयान था अपनी प्रचण्ड बहुत की सरकार की लाज जो बचानी थी )
लेकिन सच सब के सामने धीरे धीरे आ रहा है की
कभी अरविंद पांडे , राजेश शुक्ला , ओर हरक सिंह रावत वन महकमे के अफसरों से परेशान तो यशपाल आर्य भी बिना बोले अपनी नारजगी बया करते रहते है
कुल मिलाकर अब देखना ये है मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र इन सभी बातों को किस प्रकार देखते ओर लेते है
इससे पहले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र भी कही बार अफसरों को हिदायत भी दे चुके है और मुख्यसचिव आदेश भी जारी कर चुके है फिर भी!!
ख़बर है कि
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी अफसरों के रवैये से नाराज़ चल रहे है ( क्योकि उनसे लगातार विधायक शिकायत कर रहे है )


तो विपक्ष के नेता और प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह तो नोकरशाही का समर्थन करते हुए की घोड़ा अपने सवार को बहुत अच्छे से जानता है लिहाज़ा
आप ये जान ले कि जब विधायक ,मन्त्री की ही अफसर नहीं सुनते तो ये सरकार किस काम की

जी हा सरकार के मंत्री और विधायक भले हीं नौकरशाहों को बेलगाम कह रहे हो लेकिन नेता प्रतिपक्ष इंदिरा ह्रदयेश ने राज्य के नौकरशाहों का समर्थन किया है, इंदिरा ह्रदयेश कहा कि घोड़ा अपने सवार को पहचानता है, जब घुड़सवार कमजोर होता है तो घोड़ा अपने सवार को लात मारकर गिरा देता, इस कहावत में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने नौकरशाहों को घोड़ा तो मंत्री और विधायको को घुड़सवार की संज्ञा दी है, उनका कहना है कि अफसरों पर बेवजह के इल्जाम लगाने से बेहतर सरकार को अपनी कमियों के बारे में देखना चाहिए, जब राज्य के अंदर अधिकारी सरकार के विधायकों और मंत्रियों की नहीं सुन रहे हैं तो वह सरकार किस काम की, मैं विपक्ष में रहकर भी मुख्य सचिव से लेकर जिले के अधिकारियों से करवा लेती हूं अपना काम। 

 


LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here