प्रदेश में निकाय चुनाव को होने में अब कुछ ही दिन शेष बचे हैं. जहा बीजेपी ने निकाय चुनाव मैं अब प्रचार के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है खुद मुख्यमंत्री से लेकर पूरी सरकार सभी जगह कमल खिलाने के लिए वोटरों के घर घर पहुँच रही है ओर वोटर्स को अपने-अपने तरीक से लुभाने में जुटे हैं और अपने पक्ष में जनता से वोट देने की अपील कर रहे हैं। तो दूसरी तरफ कांग्रेस आपसी क्लेश से ही नही निकल पा रही है । कांग्रेस का प्रचार प्रसार ना के बराबर देखा जा रहा है ।


सिर्फ प्रीतम सिंह ही अकेले अकेले कांग्रेस के उम्मीदवार के लिए वोट माग रहे है ।
जबकि इंदिरा हरदेश्य हल्द्वानी मैं ही पैक हो गई है।तो
सुरेंद्र नेगी कोटद्वार मे
ओर सजवाण टिहरी मैं
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अब तक दिल्ली से बैठ कर तामाशा देख रहे थे। ओर अबतक चुनाव प्रचार से दूर थे ।लेकिन अब मैदान में उतर आए हैं. उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि नमस्कार, लो मैं आ गया चुनाव-प्रचार में आपका साथ देने. 
हरीश रावत ने कहा कि निकाय चुनाव लोकसभा चुनाव के सेमीफाइनल हैं. हर हालात में कांग्रेस को जीतने है. कुछ जगह वह प्रचार में हिस्सा लेंगे. साथ ही उन्होंने कहा कि जहां वह चुनाव प्रचार में हिस्सा नहीं ले पा रहे हैं वहां उनके बेटी-बेटा भाग ले रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने विजयी भव: के भाव के साथ उम्मीदवारों को चुनावी में जीत की शुभकामनाएं भी दी.
कांग्रेस के अंदर खाने की गुटबाज़ी के चलते अब कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले कुछ लोग डरे सहमे नज़र आ रहे है मानो उन्होंने अपनी हार पहले ही स्वीकार कर ली हो , तो कुछ मरे मन से जनता से अपने पक्ष मे वोट देने की अपील कर रहे है ।जिसका कारण सूत्र बोलते है कि कांग्रेस में सीनियर लीडरशिप मे एकजुटजा का ना होना है । तो हर बड़ा नेता सिर्फ अपने गुट के उम्मीद वार के लिए ही वोट माग रहे है ।और जिनका कोई माईबाप नही उन्हें कोई पूछने को तैयार नही । वो तो ये सोच रहे है कि टिकट तो जैसे तैसे ले लिया अब आगे क्या
बहराल ये कोई नई बात नही कांग्रेस में ये सब चलता रहता है । लेप्रदेश में निकाय चुनाव को होने में अब कुछ ही दिन शेष बचे हैं. जहा बीजेपी ने निकाय चुनाव मैं अब प्रचार के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है खुद मुख्यमंत्री से लेकर पूरी सरकार सभी जगह कमल खिलाने के लिए वोटरों के घर घर पहुँच रही है ओर वोटर्स को अपने-अपने तरीक से लुभाने में जुटे हैं और अपने पक्ष में जनता से वोट देने की अपील कर रहे हैं। तो दूसरी तरफ कांग्रेस आपसी क्लेश से ही नही निकल पा रही है । कांग्रेस का प्रचार प्रसार ना के बराबर देखा जा रहा है ।
सिर्फ प्रीतम सिंह ही अकेले अकेले कांग्रेस के उम्मीदवार के लिए वोट माग रहे है ।
जबकि इंदिरा हरदेश्य हल्द्वानी मैं ही पैक हो गई है।तो
सुरेंद्र नेगी कोटद्वार मे
ओर सजवाण टिहरी मैं
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अब तक दिल्ली से बैठ कर तामाशा देख रहे थे। ओर अबतक चुनाव प्रचार से दूर थे ।लेकिन अब मैदान में उतर आए हैं. उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि नमस्कार, लो मैं आ गया चुनाव-प्रचार में आपका साथ देने.
हरीश रावत ने कहा कि निकाय चुनाव लोकसभा चुनाव के सेमीफाइनल हैं. हर हालात में कांग्रेस को जीतने है. कुछ जगह वह प्रचार में हिस्सा लेंगे. साथ ही उन्होंने कहा कि जहां वह चुनाव प्रचार में हिस्सा नहीं ले पा रहे हैं वहां उनके बेटी-बेटा भाग ले रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने विजयी भव: के भाव के साथ उम्मीदवारों को चुनावी में जीत की शुभकामनाएं भी दी.


कांग्रेस के अंदर खाने की गुटबाज़ी के चलते अब कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले कुछ लोग डरे सहमे नज़र आ रहे है मानो उन्होंने अपनी हार पहले ही स्वीकार कर ली हो , तो कुछ मरे मन से जनता से अपने पक्ष मे वोट देने की अपील कर रहे है ।जिसका कारण सूत्र बोलते है कि कांग्रेस में सीनियर लीडरशिप मे एकजुटजा का ना होना है ।

तो हर बड़ा नेता सिर्फ अपने गुट के उम्मीद वार के लिए ही वोट माग रहे है ।और जिनका कोई माईबाप नही उन्हें कोई पूछने को तैयार नही । वो तो ये सोच रहे है कि टिकट तो जैसे तैसे ले लिया अब आगे क्या
बहराल ये कोई नई बात नही कांग्रेस में ये सब चलता रहता है । लेकिन जिस तरह से बीजेपी इस निकाय चुनाव मे जी जान से जुट गई है और सगठन सरकार मिलकर जनता से वोट माग रहे है ।ऐसा कांग्रेस में अब तक नही दिखाई देता है अकेले प्रीतम सिंह ही रात दिन पसीना बहा रहे है। अब देखते है हरीश रावत क्या कोई चमत्कार करते ह या सिर्फ वो भी अपने गुट के लोगो का प्रचार प्रसार करके दिल्ली चलते बेनेगे ।किन जिस तरह से बीजेपी इस निकाय चुनाव मे जी जान से जुट गई है और सगठन सरकार मिलकर जनता से वोट माग रहे है ।ऐसा कांग्रेस में अब तक नही दिखाई देता है अकेले प्रीतम सिंह ही रात दिन पसीना बहा रहे है। अब देखते है हरीश रावत क्या कोई चमत्कार करते ह या सिर्फ वो भी अपने गुट के लोगो का प्रचार प्रसार करके दिल्ली चलते बेनेगे ।



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