होली मना ली, अब लोकसभा चुनाव में उतरने की तैयारी !

हुल्यारों की मस्ती में हरदा ने पूरे सात दिन जमकर ठुमके लगाये और फिर अपने घर दिल्ली के लिए रवाना हो गये। जी हां हम बात कर रहे हैं सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की जिन्होंने बीते सात दिनों में उत्तराखंड की जनता और कार्यकर्ताओं के होली मिलन निमंत्रण को स्वीकार करते हुए उत्तराखंड में जगह-जगह होली मिलन कार्यक्रम में सम्मलित हुए। और जमकर ठुमके लगाते हुए उत्तराखंड की जनता से उत्तराखंड की संस्कृति को बचाने की अपील की।

तो वहीं दूसरी तरफ भाजपा पर भी करारे हमले करते नज़र आये। गढ़ावाली और कुमांउनी लोकगीत हुल्यारों के साथ हरदा की देहरादून आवास पर इस तरह गूंजे की हर कोई आम से लेकर खास नाचने पर मजबूर हो गया। हरदा के आवास पर इस बार भी पहाड़ी व्यंजनो का इंतज़ाम था और हरदा के हाथ में चंदन की डिबिया। जो अतिथियों के माथे पर लगाकर उन्हें होली की शुभकामनाएं दे रहे थे। इस पूरे कार्यक्रम में हरदा ने सियासत को दूर रखा। इस कार्य़क्रम के माध्यम से एक बार फिर साबित हो गया की हरदा आज भी कांग्रसी कार्यकर्ताओं के चहेते हैं। उनके मन में हरीश रावत के लिए आज भी आदर और सम्मान है और उनके आवास पर उमड़ी भीड़ तो ये बता रही थी की उनका असली नेता हरदा ही हैं।

हां, कुछ खिचे-खिचे चल रहे किशोर उपाध्याय और प्रीतम सिंह ने कार्यक्रम में ना आकर यह संकेत ज़रूर दे दिया की उनके लिए हरदा अब खास नहीं। लेकिन हरदा को क्या फर्क पड़ना था। मंदिर-मंदिर माथा टेक रहे हरीश रावत को अपने देवी-देवताओं पर विश्वास है और शायद कांग्रेस हाई कमान को हरीश रावत पर। हाईकमान की नज़र में हरीश रावत आज बी ख़ास हैं। तभी तो होली के मौक़े पर कांग्रेस हाईकमान ने एक बार फिर हरीश रावत पर विश्वास जताया है। हिमाचल, गुजरात, त्रिपुरा विधान सभा चुनाव में प्रचार की ज़िम्मेदारी हरीश रावत को हाईकमान पहले ही दे चुकी थी। और अब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने खांटी नेताओं की सूची में हरीश रावत को जगह देकर संकेत दे दिया है की हरीश रावत आज भी उनके लिए उतने ही ज़रूरी हैं जितने विधान सभा चुनाव से पहले थे।

हरीश रावत को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अधिवेशन के लिए गठित कमेठियों में जगह दी गई है। यह अधिवेशन 16 से 18 मार्च तक तालकटोरा स्टेडियम में होना है। हरीश रावत को ड्राफ्टिंग कमेटी में जगह दी गई है। इसमें पाट्री के 44 खांटी नेता हैं। 10 सदस्यीय संविधान संशोदन कमेटी में यह शामिल है। समितियों के सबग्रुप में भी जगह दी गआ है। वह 25 सदस्सीय राजनीतिक सबग्रुप में शामिल है इसमें गुलाम नबी आजाद, मल्लिकाअर्जुन खड़के, अशोक गहलोत जैसे नेता हैं। चलिए अब होली के मौक़े पर हरीश रावत पर हाई कमान का विश्वास देखकर आजकल हरदा से जले-भुने कांग्रेसी नेता अंदर ही अंदर किलस तो रहे ही होंगे। इस बात से इंकार तो नहीं किया जा सकता। पर एक बात ये तो ज़रूर है की चुनावी हार के बाद भी हरदा ने हार नहीं मानी और उनके अंदाज़ को देखकर तो ये लगता है की वो चुनाव हारे हैं ज़िंदगी नहीं। तभी तो अपने अंदाज़ से ही जी रहे हैं। बस अब देखना ये है की कई टुकड़ों में कहो या धड़ों में बटी कांग्रेस में क्या हरदा एक बार फिर एक जुटता ला पायेंगे ? क्योंकि बिना एकजुटता के तो देवभूमि में कांग्रेस की नय्या पार लगना मुश्किल ही नहीं नामुंकिन है। अब सबकी नज़रें इस बात पर टिकी हैं की हरदा आगामी लोकसभा के चुनावों में मैदान में उतरेंगे और यदि उतरते हैं तो वो सीट हरिद्वार होगी या फिर नैनीताल ?

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