हरदा छोड़ेगे या मारेंगे वक्त ही बताएगा फिलहाल केदारधाम की पैदल यात्रा का बन गया प्रोग्राम,05 मई को पहुंचेंगे अगस्त्यमुनि

 देहरादून- अभी बाबा केदार के धाम में कपाट खुलने के मौके पर गुजरात इफैक्ट और मोदी कनेक्शन वाले लेजर शो की रोशनी से मचा घमासान शांत भी नहीं हुआ कि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी अपनी शमशीर म्यान से खींच ली है।

केदारनाथ के विधायक मनोज रावत की फेसबुक वॉल की माने तो पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत केदारनाथ धाम पधारने वाले हैं। हरदा का भ्रमण कार्यक्रम आज से शुरू हो गया है।

एक हफ्ते तक चलने वाला भम्रण कार्यक्रम आज दिल्ली से शुरू होगा, जबकि भ्रमण कार्यक्रम का समापन 10 मई  को थराली में होगा। इस दिन थराली उपचुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी प्रो जीतराम अपना नामांकन करेंगे।

दिलचस्प बात ये है कि हरदा इस भ्रमण कार्यक्रम में केदारनाथ की यात्रा भी करेंगे। हरीश रावत बाबा केदार के धाम पैदल पहुंचेंगे।  बाबा केदार के कपाट खुलने के मौके पर हुए ‘लेजर शो’ जिसे आस्था से खिलवाड़ की नौटंकी करार दिया जा चुका है के बाद अब हरदा केदारधाम जाने वाले हैं।

विधायक मनोज रावत की फेसबुक वॉल के मुताबिक पूर्व सी. एम केदारनाथ जाकर, यात्रा व्यवस्थाओं और पिछले एक साल में केदारभूमि में हुए “क्रांतिकारी विकास” को परखेंगे।

विधायक की फेसबुक वाल पर लिखा गया क्रांतिकारी विकास शब्द का तंज साबित कर रहा है कि हरदा की पैदल यात्रा से सरकार असहज होगी।

सूबे की आर्थिक मेरुदंड की कशेरुका मानी जाने वाली चारधाम यात्रा पर ताजा मीडिया रिपोर्ट की मानी जाए तो चार-धाम यात्रा में व्यवस्थाएं पटरी से उतरी हुई हैं। उन रिपोर्ट्स के मुताबिक गौरीकुंड से केदारपुरी तक के  पैदल मार्ग पर यात्री कई तकलीफों से दो-चार हो रहे हैं।

रास्ते में बिना रेलिंग के घोड़े खच्चर के बीच चलना जान जोखिम में डालने से कम नहीं है।  बरसात लगातार है जबकि रैनशेड कई किलोमीटर की दूरी पर भी नज़र नहीं आते।

व्यवस्था बेहतर बनाने के नाम पर निर्माण कार्य बरसात में फिसलन पैदा कर रहे है, इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण दोनो ही धाम में नेटवर्क पूरी तरह से फेल है। आपात स्थिति में यात्रियों के पास सम्पर्क के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं है।

यानि सरकार के बजाए सब कुछ बाबा केदार के भंरोसे है। 2013 में आई केदारआपदा से भी सबक नहीं लिया गया। वहीं दूसरी ओर आपदा के जख्मों से अभी केदारघाटी पूरी तरह उबरी नहीं है।

ऐसे में तय है कि केदार यात्रा के दौरान हर दा जहां आम लोगों से मुलाकात करेंगे तो अपनी सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए केदार पुनर्निमाण की चर्चा भी जनता के साथ करेंगे। वहीं जनता से मिले फीडबैक और अपनी कसौटी पर पिछले एक साल में हुए केदार पुनर्निमाण के काम को भी परखेंगे।

हालांकि माना जा रहा है कि हरदा जब वापस आएगे तो डबल इंजन की सरकार को अपने स्टाइल में जरूर असहज करेंगे। जबकि सूबे की आम जनता को वह समझाने की कोशिश भी करेंगे जिस पुनर्निमाण को केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने अपने अंदाज ‘क्रांतिकारी विकास’ का तंज दिया है।

बहरहाल आस्था का धाम केदार फिलहाल सियासत का रण नजर आ रहा है।  ‘लेजर शो’ से जहां एक पक्ष अफनी किरकिरी करा चुका है वहीं अब देखना ये है कि दूसरे पक्ष की पैदल यात्रा का क्या निचोड़ निकलता है।

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