पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के त्रिवेंद्र सरकार को 5 महत्वपूर्ण इन सुझावों पर नज़र डाले (पहला और दूसरा सुझाव राजनीतिक दृष्टि से विस्फोटक)

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत लिखते है कि

उत्तराखंड के अमर शहीदों को नमन करते हुये मैं राज्य सरकार को निम्न 5 सुझाव जिसमें पहला और दूसरा सुझाव राजनीतिक दृष्टि से विस्फोटक है, दे रहा हूं।
इन सुझावों की पृष्ठभूमि मेरी उपस्थिति में आयोजित वेबिनार में राज्य के आय के स्रोत व रोजगार सृजन को लेकर विशेषज्ञों द्वारा दिये गये सुझावों के कुछ अंशों पर आधारित हैं।
देश के साथ-साथ उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था बहुत निचले पायदान पर पहुंच चुकी है, राज्य के सम्मुख विकास हीनता व सुरसा के मुंह की तरह फैलती बेरोजगारी की चुनौती खड़ी हो गई है। यदि राज्य तत्काल 7-8 सौ करोड़ रूपया बाजार से उधार नहीं लेता है तो उसके सम्मुख गंभीर भुगतान का संकट पैदा हो सकता है, मेरी चिंता उस पूर्व मुख्यमंत्री की है जिसने अपने कार्यकाल में बड़ी आपदा के बावजूद प्रति व्यक्ति औसत आमदनी को ₹71000 से बढ़ाकर ₹173000 तक पहुंचाया और राजस्व वृद्धि दर को निरंतर बढ़ाकर 19% वार्षिक तक पहुंचाया,
जिस समय 2017 में राज्य की बागडोर त्रिवेंद्र सिंह जी ने संभाली, उस समय राज्य की विकास दर 10% से ऊपर थी और आज वो घटकर माईनस -25% आने की आशंका पैदा हो गई है।
मैं दिये जा रहे सुझावों को कमोवेश तरीके से पहले भी सार्वजनिक कर चुका हूं, केंद्र सरकार से GST की मुआवजे की राशि राज्य को न मिलने के बाद मुझे लगा कि मैं एक बार पुनः अपने सुझावों को सार्वजनिक करूं,

पहला व दूसरा सुझाव स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से चुनौतीपूर्ण है, स्वभाविक तौर पर मेरी आलोचना भी होगी, मैं चाहता हूं कि मेरे इस सुझाव को पूर्णत: निजी माना जाय ।

1. पर्यटन के विभिन्न क्षेत्र जैसे लेजर, ईको, सांस्कृतिक, साहसिक पर्यटन सम्मिलित हैं, उसे पूर्णत: प्रतिबंध मुक्त किया जाय और प्रोत्साहन योजना बनाकर इससे जुड़े हुये लोगों को प्रोत्साहित किया जाय, तीर्थाटन के क्षेत्र में कुंभ और कुंभ के आगे-पीछे तीर्थ यात्रियों को उत्तराखंड आने के लिये प्रोत्साहित किया जाय। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिये कि अनुमानित कुंभ यात्रियों की संख्या में 30 से 40% से ज्यादा की गिरावट न आय।

2. शादी-विवाह, संस्कार, मंदिर आदि में जो पूजा-पाठ में जो आंशिक प्रतिबंध लगे हैं उन्हें पूर्णत शिथिल कर दिया जाय, इन कार्यों से जुड़े हुये व्यवसायियों व कार्मिकों को सहायता स्वरूप धनराशि दी जाए।

3. राज्य के अंदर जो सर्किल रेट जमीन के निर्धारित किये गये हैं, उनको एकदम घटा करके 50 प्रतिशत पर लाया जाय, नजूल भूमिधरों का नियमितीकरण किया जाय और निर्माण के क्षेत्र में लगी हुई पाबंदियों को शिथिल किया जाय, जिसमें 2 साल के लिये कम से कम जो विकास प्राधिकरण हैं उनको पूर्णतः गतिहीन कर दिया जाय।
4. प्रत्येक बिक्री केंद्र पर न्यूनतम 15% लोकल उत्पादित वस्तु विक्रय के लिये रखना अनिवार्य कर दिया जाय, इसमें ऐसे बिक्री केंद्रों को छूट मिल सकती है, जहां स्थानीय वस्तु उत्पादित नहीं होती हैं।
5. मुझे चिंता है यदि वर्ष 2020-21 में हम बोल्ड स्टेप्स नहीं उठाएंगे, तो हमारी राज्य की छोटी सी अर्थव्यवस्था 2022-23 आते-आते तक पूरी तरीके से सिकुड़ जायेगी, खुशहाली हमसे दूर चली जायेगी, नौकरियों के अवसर और अधिक कम हो जाएंगे, लोगों की खरीद शक्ति में भारी गिरावट आ जायेगी। इसलिये एक विशेष कदम के रूप में मैं राज्य सरकार को सुझाव देना चाहूंगा कि राज्य में प्रस्तावित गैरसैंण सहित 11 नये जिलों स्वीकृति जारी कर उनका संचालन प्रारंभ करें। इस संदर्भ में सारी औपचारिकताएं वर्ष 2016 में विभाग द्वारा पूर्ण कर ली गई थी। इस कदम से राज्य में व्यापक रूप से आर्थिक स्पंदन पैदा होगा जिससे नई आर्थिक गतिविधियां नये-नये क्षेत्रों में सृजित होंगी।


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