उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत लिखते है कि

“जिंदगी यूं गुजरेगी भी, जिंदगी यूं ही संवरेगी भी।
मगर जब चंद कदम चलेंगे, तभी मंजिल का गुमा होगा”।।

मैंने, आने वाले मंगलवार, 30 जून को ” आम_को_सलाम” अर्थात आप सबसे आह्वान किया है कि, दोपहर 2:30 बजे, अपने घर में अपनी पत्नी के साथ और हो सके, तो एकाध दोस्तों के साथ, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुये, फलों के राजा आम का स्वाद चखें। आज, राजा को हमारे सहारे की जरूरत है। इसके लिये कहीं, कोई बड़ा कार्यक्रम, मैं नहीं करने जा रहा हूं। मैं भी अपने परिवार के साथ आम का स्वाद लूंगा और उसका वीडियो आपके साथ शेयर करूंगा। आपसे भी मेरा आग्रह है कि, उसका वीडियो आप, मेरे साथ और अपने ईष्ट मित्र, दोस्तों के साथ शेयर करें। आम का बागवान, आज पस्त हाल है। खेतवान और बागवान को प्रोत्साहित करना, अपने आपको प्रोत्साहित करना है। इसीलिये मैंने प्रतीकात्मक रूप में “आम_को_सलाम” और ” हरेले_के_पर्व” के बाद “पहाड़ी ककड़ी की जायके” के साथ अपनी रसोई के स्वाद को बढ़ाने का आप सबसे आह्वान किया है। आप, अपने इस “चखुवा कार्यक्रम” में बल्कि मैं चाहूंगा कि, इसको हम चखुवा तक ही सीमित न रखें, बल्कि इसको एक मूवमेंट का रूप दे दें, ताकि जिन लोगों ने पहले आम का या ककड़ी के रायते का स्वाद नहीं चखा है, वो भी इस बार आगे आयें और आम व ककड़ी को, आम और ककड़ी के रूप में हमारे खेतवान के उत्पाद को सहारा दें, तो मत भूलिये, ये आने वाले मंगलवार को दोपहर 2:30 बजे “आम को सलाम”।



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