उत्तराखंड के पहाड़ में बादलों ने कुछ इस कदर अपना कहर बरपाया कि अभी तक मिली जानकारी के अनुसार 4 लोग आकाल मोत के काल मैं समा गए दुःखद
कल रात दो जगह बादल फटने की घटना सामने आई है। जिसके चलते 11 घर भी बह गए हैं। इन दोनों घटनाओं में दो महिला और दो बच्चों की मौत हो गई दुःखद है बादल फटने की घटना चमोली जिले के देवाल क्षेत्र के फल्दिया गांव में घटी। यहां बरसाती मलबे में दबने से मां-बेटी की मौत हो गई। गांव में कुल 11 मकान मलबे के सैलाब में समा गए। कल रात लगभग साढ़े दस बजे गांव में बादल फटने से अफरातफरी मच गई।


वही घरों में रह रहे लोग अपनी अपनी जान बचाने को भाग पड़े। इस दौरान मलबे में दबने से ग्रामीण रमेश की पत्नी पुष्पा देवी और पांच वर्षीया पुत्री ज्योति की मौके पर ही मौत हो गई। वही गांव में खेती की जमीन, कई मवेशी भी मलबे में समा गए। अभी तक फल्दिया गांव में बिजली गुल है।

पानी की लाइन टूट गई है। पूरे गांव में हाहाकार मचा है। लोग अभी भी खौफ के साए में है। वह अपने घरों पर टूटी तबाही देखकर इधर-उधर भटक रहे हैं उफ
इससे पहले पुलिस और एसडीएम केएस नेगी सहित पूरी प्रशासन की टीम मौके पर पहुँची ख़बर है कि इसके अलावा देवाल क्षेत्र की सभी सड़कें अभी बंद है सिर्फ देवाल-थराली मोटर मार्ग खुला है। तलौर, बमण, बेरा, पदमल्ला आदि गांवों में भी भारी तबाही की सूचना है।


वही टिहरी जिले के भिलंगना ब्लॉक की नैलचामी पट्टी के थार्ती गांव में भी गुरुवार देर रात लगभग डेढ़ बजे बादल फटने से एक मकान मलबे में समा गया, जिससे घर में रह रही सुमन बुटोला की पत्नी मकानी देवी उम्र 30 साक ओर उनकी छह साल के बेटे सुरजीत की मौत हो गई।
उनकी 12 साल की पुत्री सपना घायल हो गई। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

नैलचामी क्षेत्र में सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि भी मलबे की भेंट चढ़ गई।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस घटना पर गहरा दुःख जताया है और अधिकारियों को तत्काल ही उचित दिशा निर्देश राहत , मुवाज़ा पहुचाने के निर्देश दे दिये थे।

है भगवान हम पहाड़ी लोग जैसे तैसे तो अपने परिवार को पाल रहे है  ,आप तो जानते है ना कि हमको कितनी तकलीफ ,दर्द होता है फिर भी हम  यही पहाड़ मैं रहते है   ,हर दर्द का सामना करते है  हर  चुनोतियो से निपटते है   यहा  सुविधा के नाम पर क्या है और क्या नही क्या भगवान आप नही जानते  जैसे तैसे सुबह  से स्याम तक काम कर अपने घर का चूल्हा जलता है और परिवार पलता है कभी कभी तो बच्चों को भूखा भी  सुलाना पड़ता है ।ओर आप है कि इस दर्द मैं रहने के बाद भी हम लोगो पर ही अपना कहर बरपाते है  हम अपने बच्चों को कहते है कि भगवान सब ठीक  करेगा पर भगवान जी आप ने तो हमारे अपनो को ही लील लिया उन्हें आकाल मोत  देकर अपने पास बुला लिया ,  भगवान जी हम पहाड़ियों पर रहम करो ।आपने 10 उन मासूम बच्चों  को भी अपने पास बुला  लिया जिन्होंने अभी  क ख ग भी ठीक से नही समझा था  कभी आपदा की मार, कभी बाघ का आतंक,  कभी स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव मैं दम निकलना , कभी सड़क हादसे,  रोजी रोटी का संकट बने रहना,  ना ही  बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा,  कितने दर्द सह कर भी हम पहाड़ मैं ही रहते है क्योंकि हमको आप पर विस्वास है और रहेगा कि आप सब ठीक कर दोगे पर भगवान जी  आज उन्हें क्या बोलू जिनको कहता था कि भगवान जी सब ठीक कर देते है  आज वो मेरी तरफ देख बोल रहे है कि बता भगवान जी ने क्या ठीक किया हिमत नही है उनसे आँख मिलाने की ।

 

 



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