राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अध्यक्ष डीके कोटिया मीडिया में कहते है कि उत्तराखंड में आयुष्मान योजना को बहुत ही बेहतर ढंग से संचालित किया जा रहा है। ओर जो कुछ कमियां है, उनमें भी तेजी के साथ सुधार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि पात्र लाभार्थियों को योजना में बेहतर इलाज की सुविधा मिले ओर इसके लिए अस्पतालों को समय पर क्लेम का भुगतान और फ्रॉड मामलों की गहन निगरानी भी लगातार की जा रही है
यानी हम कह सकते है कि
अपना उत्तराखंड में आयुष्मान योजना: देश के अन्य राज्यों के लिए मिसाल बना गया है
जहा फ्रॉड रोकने और क्लेम भुगतान में उत्तराखंड नंबर वन है

आंकड़े पर गौर करे तो
इन दो साल में 2.6 लाख मरीजों को मिला चुका है 192 करोड़ का इलाज
अपना उत्तराखंड आयुष्मान योजना में फ्रॉड रोकने और अस्पतालों को क्लेम भुगतान करने में देश में पहले स्थान पर है। ओर इस योजना को बेहतर ढंग से संचालित करने में उत्तराखंड अन्य राज्यों के लिए मिसाल भी बना है।
आज यानी
23 सितंबर को आयुष्मान योजना को दो साल पूरे हो गए है योजना में गोल्डन कार्ड धारक मरीजों के इलाज में धोखाधड़ी करने वाले निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की है। फ्रॉड करने वाले अस्पतालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के साथ ही रिकवरी की है।
वहीं, निजी अस्पतालों को सात दिन से कम समय में क्लेम का भुगतान किया जा रहा है। एनएचए ने फ्रॉड रोकने और क्लेम भुगतान में उत्तराखंड को देश का पहला राज्य घोषित किया है। वहीं, प्रदेश के सभी 23 लाख परिवारों को आयुष्मान योजना में पांच लाख तक इलाज की सुविधा देने में भी उत्तराखंड देश का पहला राज्य है।
आयुष्मान योजना में उत्तराखंड में अब तक 39 लाख लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बने हैं। 99 प्रतिशत लाभार्थियों के कार्ड आधार कार्ड से लिंक है। दो साल में प्रदेश के 2.6 लाख से अधिक मरीजों के इलाज पर सरकार ने 192  करोड़ की राशि व्यय की है।
बता दे कि सबसे ज्यादा डायलिसिस के 1.10 लाख मरीजों को योजना लाभ मिला है। इसके अलावा सर्जरी, कैंसर, हृदय रोग, हड्डी रोग समेत अन्य गंभीर बीमारियों का भी योजना में इलाज किया गया है। 


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