सुना है   फसलों को  जानवर से बचाने के लिए गांव-गांव तैनात होंगे प्रहरी 


ओर लगभग पहले चरण में  10 हजार स्थानीय लोगों को प्रहरी बनाने की   तैयारी
  तो आपकीं त्रिवेंद्र सरकार  90   दिनों 40  हजार  

युवाओं को रोजगार देने जा रही है 

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र जानते है कि
वन्य जीवों से फसलों को होने वाला नुकसान पहाड़ के किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या है। आये दिन गाँव के लोग यही कहते है कि खेती करे तो क्यो ये बंदर ओर जंगली सुवर कुछ रहने देते ही नही
ऐसे मैं त्रिवेंद्र सरकार ने  निजात पाने के लिए पहले चरण में राजस्व गांवों में फसल रक्षक तैनात करने का फैसला लिया है
मतलब की स्थानीय युवाओं को ये काम दिया जाएगा और त्रिवेंद्र सरकार इन्हें एक निर्धारित मानदेय भी देगी। जानकारी है कि इसके लिए कैंपा फंड की मदद ली जाएगी
मतलब पहाड़ी जिलों मे बंदर, जंगली सुअर, लंगूर को फसलों को नुकसान पहुंचातें हैं।
अब इनके आतंक से निःजात मिलने जा रही है
त्रिवेन्द्र सरकार ने यह योजना बनाई है। यह योजना कैंपा और जायका की मदद से योजना के तहत 40 हजार स्थानीय लोगों को रोजगार देने की तैयारी है। इसी में फसल सुरक्षा को शामिल किया गया है, सरकार के अनुसार लगभग 10 हजार लोगों को इस योजना में शामिल किया जा सकता है।
इसके साथ ही गढ़वाल और कुमाऊं में अलग-अलग प्राकृतिक बाड़े बनाने की योजना है और इसके लिए 19 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही चार और बंदर बाड़े बनाने का भी प्रस्ताव है। इसी तरह सोलर फेंसिंग, हाथी रोधी खाई और दीवार बनाने की योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि कैंपा, जायका आदि योजनाओं के जरिये तीन माह में 40 हजार लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है। वनाग्नि रोकने, मानव सुरक्षा, वन संरक्षण आदि के काम लोगों से लिए जाएंगे और उसके एवज में मानदेय दिया जाएगा। फसल सुरक्षा हमारी प्राथमिकता में है और इसके लिए हर स्तर पर काम हो रहा है।
त्रिवेंद्र सरकार की शानदार पहल
  गांव  अंदर ही रोजगार
अब   गांव  गांव   लहरायेगी    फसल
किसानों को मिलेगी राहत
ओर पहाड़ बोलेगा
थैंक्यू
त्रिवेंद्र सरकार


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