आपको बता दे कि
उत्तराखंड के लिए अपमानजनक शब्द बोलने वाले MLA प्रणब सिंह चैंपियन की भाजपा में आज
वापसी हो गई है।
उत्तराखंड भाजपा नेतृत्व ने खानपुर के गालीबाज विधायक का निष्कासन औपचारिक रूप से रद्द कर दिया है।
प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि मैं पहले ही अपने अपशब्दों के लिए खेद जता चुका हूं और मैं पार्टी भाजपा का एक अनुशासित सिपाही हूं।
गौरतलब है आज से लगभग 13-14 महीने पहले एक वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें विधायक ने उत्तराखंड को बेहद अपमान जनक भाषा में गाली दे रहे थे। उस दौरान उनके एक हाथ में पिस्टल थी तो दूसरे में राइफल।


जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया था।
वही भाजपा की देहरादून में हुई कोर कमेटी की बैठक में उनका निष्कासन वापस लेने पर मोहर लगी।  इसकी पृष्ठभूमि मीटिंग से पहले विधायकों को तलब करने के नोटिस जारी करने पर तैयार हो गई थी। इस कड़ी में भाजपा अध्यक्ष बंशीधर भगत ने चैंपियन को फूलों का गुलदस्ता देकर घर वापसी पर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि निष्कासन  के दौरान रहे अच्छे आचरण के चलते उन्हेंं वापस लिया गया।


वही खुद विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने कहा कि मैैंने वीडियो वायरल होने के समय ही अपने मुंह से निकले अपशब्दों के लिए माफी मांग ली थी और आज फिर मांग रहा हूं। उन्होंने कहा कि मैंने 13 महीने के निष्कासन के दौरान हरिद्वार में पहली बार भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित कराने का काम किया। चैंपियन ने कहा कि मैं भाजपा का अनुशासित सिपाही हूं और उत्तराखंड का अपमान करने की सोच भी नहीं सकता।
इसके पहले नैनीताल-उधमसिंहनगर के सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट विधायक चैंपियन की शान में कसीदे पढ़ चुके हैं। उन्होंने खानपुर विधायक को काबिल और कई भाषाओं का ज्ञाता बता चुके हैं।
उधर, कांग्रेस की प्रवक्ता गरिमा माहरा दसौनी ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा को बधाई
वो सही रास्ते पर जा रहे है
गरिमा ने कहा कि उत्तराखंड को भद्दी गालियां देने वाले का आदर-सत्कार भाजपा में ही संभव है।
तो वही विधायक चैंपियन की पार्टी में वापसी को लेकर विरोध के सुर अभी भी उभर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार ओर शोशल मीडिया की ख़बरों के अनुसार
राज्यसभा सदस्य और पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख
पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी पहले से ही इस बात को लेकर अपनी नाराजगी जता चुके है।
बहराल अब जो सवाल खड़े हो रहे है वो ये है कि सोशल मीडिया मैं जमकर भाजपा सगठन से जनता नाराज नज़र आ रही है ऐसे में जनता के इस रियेक्सन को पार्टी आगे के लिए कैसे देखती है?
कुँवर प्रणव सिंह चेंपियन को भाजपा मैं घर वापसी करा कर
क्या पहाड़ के मिज़ाज़ से भाजपा अंजान नही ?? या उनको लगता है कि पहाड़ भी इस पर राजी हो गया है ??
अब भाजपा के नेता, विधायक ,
आदि आदि मीडिया के जब भी सवाल आगे होंगे
तो कोन से चाल, चरित्र ,चेहरा की बात करेगे , ताकि जनता उन पर विस्वास करे ।
ओर सबसे बड़ा सन्देश तो पहाड़ मैं ये  गया है कि
लोकप्रिय मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र जी ने पहाड़ को ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैण दी और भाजपा सगठन ने गालीबाज विधायक को फिर अपनाया आखिर ।
सूत्र बोलते है कि भाजपा सगठन के इस एक फैसले से
त्रिवेंद्र सरकार को आगे कही मौके पर इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने को नही मिलेगा , क्योंकि सफाई के लिए सटीक शब्द नही होंगे ख़ास कर पहाड़ में।
बहराल अब विपक्ष चुटकिया लेते हुए कह रहा है कि
मंत्री पद खाली है ऐसे भी भगत को चैपियन को मंत्री बनाने के लिए सिफारिश भी सरकार से कर दे तो कोई बडी बात नही
क्योंकि सांसद अजय भट्ट तो कहते है ना आजकल की
कुँवर पढ़े लिखे है , काबिल है
ऊर्जावान है ओर उनकी योग्यता का पार्टी को लाभ मिलेगा ।


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