गर्भवती पत्नी को छोड़ शहीद प्रदीप पंचतत्व मे विलीन हो गए प्रदीप भाई अमर रहे

शहीद प्रदीप रावत अमर रहे , प्रदीप रावत जिंदाबाद , जब तक सूरज चाँद रहेगा प्रदीप भाई तेरा नाम रहेगा । इन्हीं नारो के साथ शहीद प्रदीप रावत की अंतिम यात्रा निकाली

ओर देखते ही देखते पूरा ऋषिकेश इस शहीद को भावभीनी श्रदांजलि देने उमड़ पड़ा तो दूसरी तरफ शहीद प्रदीप भाई की पत्नी और परिवार का रो रो कर बुरा हाल था पिता ने तो जैसे तैसे अपने कलेजे को लोहे का बना लिया पर पूरा परिवार और वो बहने गम के सागर मे डूब गई जिन्होंने अपने भाई को राखी पहनानी थी पर कुदरत का खेल देखो आज वही सब बहने उनके पार्थिव शरीर पर सर रखकर अपने दर्द को बया कर रही थी तो दूसरी तरफ जो दुनिया मे अभी आया ही नही वो अब तस्वीरों से ही पिता की बहादुरी को जानेंगे प्रदीप भाई अपनी गर्भवती पत्नी को छोड़ कर प्रदीप पंचतत्व में विलीन हो गए।


आपको बता दे कि जम्मू कश्मीर के उरी सेक्टर में शहीद जवान प्रदीप रावत का मंगलवार के दिन सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके चचेरे भाई कुलदीप रावत ने उन्हें मुखाग्नि दी। सुबह करीब 9 बजे अंतिम दर्शन करने बाद शहीद की अंतिम यात्रा उनके निवासी ऋषिकेश गंगा नगर कॉलोनी से निकली, जहां हजारों हज़ार लोगो की संख्या में मौजूद लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। 

शहीद प्रदीप भाई की अंतिम यात्रा में पूर्व सीएम और हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक भी पहुंचे। शहीद की अंतिम यात्रा ने लोगों ने भारत माता की जय के साथ शहीद प्रदीप रावत को याद किया। इस दौरान स्थानीय लोगों में काफी गुस्सा भी देखने को मिला। उन्होंने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। आपको बता दे कि रविवार को उरी सेक्टर में प्रदीप शहीद हो गए थे। रावत चौथी गढ़वाल राइफल में राइफलमैन के पद पर तैनात थे। प्रदीप रावत के परिवार में उनकी पत्नी, मां-पिता और 3 बहने है। रावत के पिता और चाचा भी सेना से रिटायर है। किस्मत का खेल देखो साल 2016 में ही प्रदीप की शादी हुई थी।  ओर अब वो भारत माता की रक्षा करते शहीद हो गए अपनी गर्भवती पत्नी और हस्ता खेलता परिवार पीछे छोड़ गए जिनका दर्द और जख्मो को कोई दूर नही कर सकता । 
आपको बता दे कि अभी पिछले 70 दिनों के अंदर ही ऋषिकेश के 3 जवान आतंकियों से लोहा लेते हुए जम्मू कश्मीर में शहीद हो गए। अभी हाल में ही श्यामपुर भल्लाफार्म के हमीर पोखरियाल 7 अगस्त को शहीद हो गए थे। इससे पहले जुलाई में गुमानीवाला का एक जवान गुरुंग शहीद हो गया था। ओर पूरे उत्तराखंड से 7 जवान 100 दिन के अंदर शहीद हो गए है । 

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