गर्भ मे ही दो शिशुओं की मौत! मामला फिर सरकारी अस्पताल का! मुख्यमंत्री के लिए सर दर्द बना स्वास्थ्य महकमा !

सरकारी अस्पतालों की हकीकत आये दिन सामने आती है अभी देहरादून के दून महिला अस्पताल में गर्भवती मंहिला की फर्श पर डिलीवरी हुई थी। इस लापरवाही से जज्बा बच्चा की मौत हुई और। पूरे देश मे यव ख़बर आग की तरह फैल गई थी इस मामले पर हैरानी जताई गई थी। ओर अभी ये मामला शांत भी नही हुवा की ख़बर है कि उत्तराखंड के अस्पतालों में लापरवाही का ये आलम बदस्तूर जारी है ।जानकारी अनुसार उत्तराखंड के एक और सरकारी अस्पताल में गर्भ में दो शिशुओं के मौत का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि ये सब कुछ डॉक्टर की लापरवाही से हुआ है! क्योंकि कई बार बुलाने के बाद भी सीनियर डॉक्टर नहीं आई। ये पूरा मामला श्रीनगर गढ़वाल में राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर का बताया जा रहा है। इस अस्पताल का स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग लापरवाही के चलते चर्चाओं में है। हैरानी की बात है कि एक हफ्ते के भीतर ही यहां गर्भ में पल रहे दो शिशुओं की मौत हुई है।

जानकारी अनुसार बताया जा रहा है कि इस अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही कि शिकायत पहले भी मिलती रही हैं। 12 से 17 सितंबर के बीच यहां दो घटनाएं हुई हैं। प्रसव के लिए सीनियर डॉक्टर के ना आने की वजह से माताओं के गर्भ में ही शिशु की मौत हो गई। खबर है कि दोनों ही मामलों में ट्रेनी डॉक्टरों के हवाले गर्भवती महिलाओं को छोड़ा गया। परिजनों ने सिजेरियन कराने की मिन्नतें की। लेकिन सीनियर डॉक्टर के ना आने की वजह से ये संभव नहीं हो पाया। 12 सितंबर को श्रीनगर के डांग मुहल्ले की गर्भवती महिला को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। लेकिन वहां कई बार बुलाने के बावजूद सीनियर डॉक्टर नहीं आई। मामले में परिजनों ने पुलिस में लिखित शिकायत दी है। दूसरे मामले में शिकायत दर्ज नहीं हुई लेकिन ये मामला भी वायरल हो रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के मुताबिक 17 सितंबर को पौड़ी से एक गर्भवती महिला को यहां रेफर कराया गया। वक्त पर सीनियर डॉक्टर नदारद था। 18 की सुबह सीनियर डॉक्टर आए और खुद ऑपरेशन करने के बजाय निजी पैथोलॉली सेंटर में चले गए। बताया जा रहा है कि सीनियर डॉक्टर ना आने की वजह से गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो गई। एक मामले में बेस टीचिंग अस्पताल प्रशासन को शिकायत मिल चुकी है। वहीं दूसरा मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। अमर उजाला में छपी खबर के मुताबिक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. केपी सिंह ने इस बारे में कुछ बड़ी बातें बताई हैं। उन्होंने कहा है कि इस मामले में जांच कमेटी गठित कराने का अनुरोध किया गया है। देखना है कि आगे इस मामले में क्या क्या होता है।
बहराल जो भी ही त्रिवेन्द्र रावत सरकार के लिए स्वास्थ्य महकमा की लगातार की बढ़ती लापरवहाई सर दर्द बन गया है।

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