गढ़वाली मै पहाड़ की बात जरूर पढ़े

पुराणी कथा मिन भी बांची।
जैं फगौड़ी मां बैठ्यूं छौ वाई फंगौड़ी काटी।
अफ त देहरादून मां बैठ्यूं,
अर पलायन रोकणै निकाऊं च झांकी,
कैकी त पोटगी नी भ्वरे,
कैकी भ्वरे गेनी सांखीं।
इनु कथा पैली बार बांची।

पुराणी कथा मिन भी बांची।
राजनीति मां क्वी त राजा बण गेनी
दूसरै टंगड़ी खैंची, खैंची
एक दूसरै की आलोचना कैकी,
देवतौं की पंगत मां बैठ गेनी।
मी सन त इनु लगणू कि
धोखा सै राहु केतू अमर हवे गेनी अमृत पेकी।
क्वी बोलदा गैरसैंण राजधानी बणौला,
क्वी बोलदा देहरादून मा ही रैण दयोला।

पुराणी कथा मिन भी बांची।
जैं फगौड़ी मां बैठ्यूं छौ वाई फंगौड़ी काटी।

बिक्रम बेताल की कथा मिन भी बांची।
चुप रैली त कपाई फट जाली,
जबाब देली त मी सन नी पकड़ पैली।
बथौ रे बिक्रम यूंकी जोड़ी कनु मा मिलैली?
चार राजकुमार का सिर धड़ सै अलग हवे गेनी,
फेर ऊ सिर एक दूसरा धड़ पर जुड़ गेनी।
बथौ रे बिक्रम
ऊंकी कज्याण्यूं दगड़ जोड़ा कन मा बणैली।
बिक्रम जबाब देकी बोलणू च,
हे बेताल,
तन की सुन्दरता सै मन की सुन्दरता उत्तम च
इलै जख मन च वख यूंका जोड़ा बणै दयोला।
ईं कथा कू सार यूं सन कू बथाऊ बांची
कि राजधानी गैरसैंण हो या देहरादून,
मन त देहरादून मां भी वी च,
गैरसैण मां भी वेनी रै जाण,
गैरसैंण जैकी योजना पर पंख नी लग जाण।
मन सुन्दर होलू, त गैरसैण क्या,,,
हर गौं गौवौं मां राजधानी बण जाली।
पहाड़ सन एक बार 50% आरक्षण दे देवा।
देखा चार दिन मां पलायन भी रूक जालू।
हर क्वी पहाड़ मां भी बस जालू।
यखी कनाडा, स्वीटजरलैंड बण जालू।
पर ईं दवै की पुड़िया तै कू अजमालू।
तब अजमै की क्या कन,
जब ससै ठसै की मौरी जौलू।

🌷द्वेष भाव रहित
विरोध उत्साही को उत्तेजित नहीं उत्साहित करता है।         संजय  पंचभेया की कलम से

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