इस काम के लिए तारीफ के हकदार हैं, सरकार और सभी भागीदारी करने वाले संगठन

देहरादून– कैरवान गांव, शिखर फाॅल से राजपुर हेड (काठबंगला) से लेकर नारी निकेतन मोथरोवाला-दौड़वाला-संगम क्षेत्र तक एक से डेढ पखवाड़े के भीतर ढाई लाख गड्ढे खोदे जाएंगे।

ये गड्ढे बेशक फिलहाल पश्चताप का प्रतीक हैं लेकिन जब इन गड्ढों में चौड़ी पत्ती के हरे-भरे पेड़े पनपेंगे और धीरे-धीरे बड़े वृक्ष बनकर दून की रिस्पना को फिर से ऋषिपर्णा बनाएंगे तो राजनीति के उन पापों कर्मों का  उद्धार हो जाएगा जिनकी वजह से ऐतिहासिक ऋषिपर्णा नदी आज गंदी सूखी बदबूदार रिस्पना में तब्दील हुई।

बहरहाल सूबे की त्रिवेंद्र सरकार की इस पहल की खुलेदिल से जमकर तारीफ होनी चाहिए कि सरकार पानी की उपयोगिता को समझ रही है और नई पीढ़ी को पानी बचाने का संदेश दे रही है। फिर चाहे शौचालय के फ्लश में आधा रेत आधा पानी भरी बोतल रखना हो या फिर रिस्पना से ऋषिपर्णा जैसा अभियान चलाना हो।

आज से अभियान की शुरूआत हो गई है। उदगम से मुहाने तक चलने वाले इस अभियान में हर एक की भागीदारी की उम्मीद सीएम त्रिवेंद्र रावत ने की और आज वे हर जगह सघन वृक्षारोपण कार्यक्रम के तहत गड्ढे खोदने के लिए हाजिर रहे ताकि कार्यक्रम में शामिल संगठनों और बच्चों का मनोबल जिंदा रहे । इस मौके पर सीएम त्रिवेंद्र रावत ने रिस्पना को जिंदा करने के अभियान को सामाजिक आंदोलन करार दिया।

रिस्पना से ऋषिपर्णा एक सामाजिक आंदोलन-सीएम त्रिवेंद्र रावत

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि रिस्पना और कोसी नदियों के पुनर्जीवीकरण का अभियान सिर्फ इन दो नदियों तक नहीं वरन पूरे प्रदेश तक ले जाना है।

उन्होंने कहा कि यदि पूरे राज्य के युवा यह सोच लें कि अपने क्षेत्र की नदियों, गाड़ गदेरों को बचाना है तो यह काम आसान हो जायेगा। रिस्पना, कोसी को बचाने का अभियान सरकारी आयोजन नहीं है, इसे समाज का कार्यक्रम बनाना होगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने कहा कि जिस प्रकार छोटे-छोटे बच्चों से लेकर युवा और बुजुर्गों ने भागीदारी की है, इससे उनका उत्साह बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि यह एक बड़ा सामाजिक आंदोलन बनेगा। रिस्पना और बिन्दाल जैसी नदियों का स्वरूप पहले जैसा होगा जब इसमें स्वच्छ जलधारा बहती थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रिस्पना को बचाने का प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिये है। सरकार के पास प्लान ’ए’, प्लान ’बी’ व प्लान ’सी’ सब तैयार है, बस जरूरत है स्वतःस्फूर्त जन भागीदारी की।

मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देश दिये कि शहर में कुछ ऐसे मीटिंग प्वाइंट बनाने पर विचार किया जाय, जहां पर लोग वृक्षारोपण कार्य के लिये एकत्र हों। उन प्वाइंट्स से लोगों को वृक्षारोपण तक ले जाने के लिये वाहनों की व्यवस्था की जा सकती है।

जून के अन्त तक 2.5 लाख गड्ढ़े खोदने का लक्ष्य- डीएम

जिलाधिकारी देहरादून श्री एस.ए. मुरूगेशन ने बताया कि मिशन ऋषिपर्णा के अन्तर्गत लंढौर शिखर फाॅल से मोथरोवाला-दौड़वाला के क्षेत्र तक लगभग 2.5 लाख गड्ढ़े खोदने का लक्ष्य है।

इस कार्य के लिये कैरवान गांव, शिखर फाॅल से राजपुर हेड (काठबंगला) तथा नारी निकेतन मोथरोवाला-दौड़वाला-संगम क्षेत्र सेक्शन में 39 ब्लाॅक निर्धारित किये गये हैं।

प्रत्येक ब्लाॅक में शनिवार को कम से कम 250 गड्ढ़े का लक्ष्य रखा गया। उन्होंने बताया कि आज के कार्यक्रम में सरकारी व गैर सरकारी 40 से अधिक संगठनों तथा 8 से 10 हजार तक स्वयं सेवकों, स्कूली छात्र-छात्राओं, आमजन ने भागीदारी की है।

गड्ढ़े खोदने के लिये उपकरण प्रशासन द्वारा मुहैया कराये गये। कैरवान गांव में आयोजित कार्यक्रम में गड्ढ़ों के लिये उपकरण एम.डी.डी.ए. द्वारा दिये गये।

कई संस्थाओं और संगठनों ने किया प्रतिभाग

शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में आई.टी.बी.पी., वन विभाग, ईको टास्क फोर्स, यूसर्क, मैड, सिविल डिफेन्स, स्कालर्स होम एलुमिनी एशोसिएशन, सेन्ट जार्ज स्कूल, राजकीय बालिका इण्टर काॅलेज कारगी, परमार्थ निकेतन सहित बडी संख्या में सरकारी व गैर सरकारी संगठनों ने प्रतिभाग किया। जुलाई माह में इन गड्ढ़ों में वृक्षारोपण का कार्य होगा। डी.एम. ने बताया कि कुल लगाये जाने वाले पेड़ों में 30 प्रतिशत फल वाले वृक्ष होंगे।

 

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