उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में मछली पालन से आप ऐसे कमा सकेंगे लाखों रूपये

सरकार मछली पालन के लिए दे रही है सब्सिडी, मिलेगा रोजगार, खूब होगी आमदनी

नैनीताल। उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में अगर आप स्वरोजगार की तलाश कर रहे हैं तो मछली पालन अन्य विकल्पों में सबसे बेहत्तर है। सरकार मछली पालन स्वरोजगार शुरू करने के लिये जानकारी देने के साथ ही सब्सिडी भी दे रही है। ग्रामीण इलाकों में मछली उत्पादन से जुड़ी नीली क्रांति को बढ़ावा देने के लिए समेकित खेती योजना में मत्स्य पालन को भी शामिल कर लिया गया है। अब तक कृषि, पशुपालन व उद्यान विभाग को ही इस योजना से जोड़ा गया था। समेकित खेती के लिए बनाए जा रहे टैंकों में मछली पालन भी किया जा सकेगा।

 

कुछ इस तरह मिलेगा योजना का लाभ
पर्वतीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन तालाब निर्माण के लिए कुल लागत 50 हजार रुपये रखी गई है। जिसमें विभाग किसानों को 25 हजार रुपये की सब्सिडी उपलब्ध कराएगा। जबकि मैदानी क्षेत्रों में लगभग एक लाख रुपये निर्माण में खर्च आने पर सामान्य जाति के किसानों को 40 हजार और एससी, एसटी को 60 हजार रुपये तक का अनुदान मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम सभा की खुली बैठक में प्रस्ताव पारित करवाकर गांव में मनरेगा से भी तालाब निर्माण का कार्य कराया जा सकेगा।

विशेषज्ञ देंगे तकनीकी सहयोग
मत्स्य पालन विभाग के साथ ही योजना में गोविंद वल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय के मत्स्य विशेषज्ञ सहयोग करेंगे। विभाग के साथ मिलकर विवि के प्रवक्ता व विशेषज्ञ किसानों को हर जानकारी मुहैया कराने के लिए वह अपना पूरा सहयोग देंगे।

रोजगार और किसानों की बढ़ेगी आय
योजना का मुख्य उद्देश्य समेकित खेती योजना के अंतर्गत मुर्गीपालन, सूकर पालन, भेड़ पालन, सब्जी उत्पादन के साथ ही अब मत्स्यपालन को बढ़ावा देना है। इसलिए मत्स्य पालन को अन्य योजनाओं के साथ जोड़ा गया है। जिससे स्वरोजगार को बढ़ावा मिल सके और किसान इसे अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें। इस योजना के लिए ग्रामीण मनरेगा के तहत भी आवेदन कर सकते हैं।





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