फरियाद पूरी ना हो पाई तो उत्तराखंड के 415 परिवार लेगे जलसमाधि!!

देवभूमि उत्तराखंड की पहाड़ की जनता का ना कोई रखवाला है ना कोई उनका अपना हा जब जब चुनाव होते है तब तब उनके घरों की चौखट मे ये राजनेता हाथ जोड़ने से लेकर पाँव पढ़ने तक कि नोटकी खूब करते है पर जब जीत जाते है तब उनकी पुकार उनकी करुण आवाज़ इनके कानो तक तो जाती है पर ये अपनी आंखें बंद कर लेते है और सुनकर अनजान भी खूब बन जाते है अगर इनकी आवाज इनकी पुकार सुनी होती तो ये ना कहते कि फरियाद पूरी ना हो पाई तो हम पूरे 415 परिवार लेंगे जलसमाधि!
जी हा ख़बर
टिहरी से है जहां डैम तो बन गया पर इसकी पूरी बिजली का मज़ा दूसरे राज्य खूब ले रहे है और यह के लोग आज भी अपने हक़ हकूक के लिए लड़ रहे है कुछ तो इतने परेशान हो गए है कि अब विस्थापन की माग सालो साल से कर रहे है पर कोई उनकी सुनने को तैयार नही टिहरी के पूरे 415 परिवार 30 दिन से विस्थापन की मांग को लेकर पुनर्वास कार्यालय के बाहर धरने पर है ये लोग पिछले 12 सालों से विस्थापन की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई इनकी सुनने को तैयार नही इन 12 सालो मैं तीन सरकारे बदल गयी और मुख्यमंत्री 6 बदल गए पर इनकी मांग आज तक कागजो मैं लटकी पड़ी है और अपनी सरकार का शासन-प्रशासन जानकर भी खामोश रहता है
पिछले 30 दिनों से धरना दे रहे हैं। ग्रामीणों ने अब कह दिया है शासन-प्रशासन को की अगर तीन दिन के भीतर उनका विस्थापन नहीं किया तो वो पहले आमरण अनशन करेंगे और फिर यही टिहरी झील में समाधि ले लेंगे जिसकी पूरी जिम्मेदारी त्रिवेन्द्र सरकार की होगी इंसाफ की मांग के लिए 12 साल से लड़ रहे है पर अब डबल इज़न को सरकार है इसलिए इन सबको यही लगता है कि जो काम 12 साल में नही हुवा वो अब जल्द जो जाए और गलती इनकी भी क्या चुनाव के दौरान बीजेपी की तरफ से हर प्रचार में यही कहा गया था कि एक बार राज्य मैं इनकी सरकार बन जाये फिर जो स्लो साल से लटके काम है वो जल्द पूरे हो जायगे इसलिये इनका क्रोध और सातवें आसमान पर है                                                         ये सब लोग बोलता उत्तराखन को कहते है कि
2005 में बने टिहरी डैम से आसपास के लगभग 20 गांवों के मकानों में दरारें पड़ने लगी हैं ओर जिसकी वजह से हम 415 परिवार डर के साए में जी रहे है ओर यहां अधिकारी आते है जाते है तबादले उनके हो जाते और यही सबकुछ देखते इनको 12 साल बीत गए पर कोई भी विस्थापन के लिए कार्यवाही नही कर पाया या उनकी मंशा ही नही थी की है। बोलता उत्तराखंड को जो जानकारी मिली है उसके अनुसार पुर्नवास विभाग के अधिशासी अभियन्ता सुबोध मैठाणी बोलते है कि 415 परिवारों के विस्थापन के लिए कार्रवाई की जा रही है। उफ 12 साल निकल गए और ये कार्यवाही आज तक पूरी नही हो पाई ओर ना रिपोर्ट पूरी तैयार हो पाई फिलहाल अब पुर्नवास विभाग वाले कहते है कि जल्द रिपोर्ट तैयार कर भारत सरकार को भेज देगे तो वही
जिलाधिकारी बोलते है कि 415 परिवारों के विस्थापन की पूरी पत्रावली तैयार करके भारत सरकार को भेज देंगे जिसके बाद उनको जैसे आदेश मिलेगा उसी आधार पर परिवारों का विस्थापन किया जाएगा अब सवाल ये उठता है कि ये पूरी पत्रवाली कब तक तैयार होगी और कब भारत सरकार को मिलेगी और कब राज्य सरकार एक्शन लेगा मतलब इनका पुर्नवास होगा इस राज्य मे कदम कदम पर चोला बदलने वाले ओर कोस कोस पर पानी बदलने वाले बहुत है और इन्ही लोगो की वजह से आज पहाड़ की अपनी सरकार अपने मुखिया होने के बाद भी इनका अपना कोई नही क्योकि ये तो सिर्फ वोट के लिए इनको माईबाप कहते है और जीतने के बाद सिर्फ नोटो को….

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