पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत लिखते है कि किसान की परेशानी बढ़ाने के लिये केंद्र सरकार 3 अध्यदेशों को संसद की मंजूरी देकर कानून बनाना चाहती है।
संसद में ये विधयेक पेश किये जा चुके हैं, लोकसभा में एकाध विधेयक पारित भी हो चुका है। किसान व देश आशंकित है, ये तीनों विधयेक किसान की जमीन, किसान के अधिकार जो MSP के रूप में उसको मिला था और मंडी कानून के रूप में जो संरक्षण मिला था, उसके खिलाफ षड्यंत्र है। ये कानून सस्ते गल्ले की वितरण प्रणाली के खिलाफ भी षड्यंत्र है, ये जमाखोरी को बढ़ायेगा, हमारी जमीनें हमारे नाम पर हों, मगर कांटेक्ट फार्मिग के नाम पर उसके असली संचालक अडानी और कोई बड़े-बड़े नाम होंगे, क्योंकि अमेरिका की तरीके से कृषि को चुनिंदा हाथों में देना है, वाह भई वाह। किसान के एक मात्र अधिकार को, जमीन के अधिकार को भी हम अपर्हित कर लेंगे, यह सहन नहीं किया जा सकता। चंपारण में किसानों ने जो अंग्रेजों के हाथ झेला उसको आगे किसान झेलने के लिये तैयार नहीं हैं,
खैर इन तीनों विधेयकों के विरोध में सर्वप्रथम पंजाब से आवाज उठी, पंजाब के मुख्यमंत्री ने, वहां की प्रदेश कांग्रेस ने आवाज उठायी और आज ये आवाज एक सिंहनाद के रूप में देश की सड़कों और संसद में गूंज रही है। कुछ लोग जो सरकार में सम्मिलित हैं, वो भी डर के मारे सवालिया बन करके जनता को ठग रहे हैं, ऐसे ठगने वालों में शिरोमणि अकाली दल के सांसद भी हैं। मैं, पंजाब के किसानों के साथ और उत्तराखंड व देश के किसानों के साथ अपनी भावनात्मक एकता प्रकट करना चाहता हूं। मैंने तय किया है कि, देहरादून के गांधी पार्क में शुक्रवार को अर्थात दिनांक-18 सितंबर, 2020 को प्रातः 09:45 से 11:45 बजे तक मैं “मौन व्रत” पर बैठूंगा और अपना विरोध, गांधी बाबा के बताये हुये अहिंसात्मक रास्ते से उन लोगों तक पहुंचाने का काम करूंगा, जिन लोगों का गांधी और गांधी जी के सिद्धांतों में विश्चास नहीं है।


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