उत्तराखंड आप भी जानो ये देश ला रहा एक लाख का नोट पर इससे भी मिलेगा केवल दो किलो आलू !!

आपको बता दे कि वेनेजुएला कभी बेहद अमीर देश हुआ करता था लेकिन आज इस देश की करेंसी की कीमत रद्दी के बराबर रह गई है जी हा महंगाई की दर इतनी ज्यादा है कि लोग एक कप चाय या कॉफी के लिए बैग भरकर नोट ले जा रहे हैं
वही सुना है अब इस दिक्कत को दूर करने के लिए वेनेजुएला की सरकार एक बार फिर बड़ा नोट जारी करने जा रही है.
बता दे कि ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार , कैश की किल्लत के चलते वेनेजुएला बैंकनोट पेपर भी बाहर से मंगा रहा है.
  ख़बर है कि
वेनेजुएला अब तक एक इटालियन कंपनी से 71 टन सिक्योरिटी पेपर खरीद चुका है. वेनेजुएला का केंद्रीय बैक अब 1,00000 बोलिवर का नोट जारी करने जा रहा है.
ओर ये अब तक का सबसे बड़े मूल्य का नोट होगा.
हालांकि, एक लाख बोलिवर के नोट की कीमत सिर्फ 0.23 डॉलर ही रहेग
मतलब ओर . यानी की इससे भी केवल दो किलो आलू ही खरीद सकेंगे.

बता दे कि वेनेजुएला में पिछले साल महंगाई दर एक अनुमान के अनुसार 2400 फीसदी थी. इससे पहले भी, वेनेजुएला की सरकार ने 50,000 बोलिवर के नोट छापे थे.
ओर अब वेनेजुएला इससे भी बड़े नोट लाने की तैयारी कर रहा है.

ख़बर है कि वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था लगातार सातवें साल मंदी का सामना कर रही है. इस साल कोरोना महामारी और तेल से होने वाले राजस्व में कमी की वजह से वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था का आकार 20 फीसदी तक सिकुड़ सकता है. करेंसी को स्थिर करने के लिए सरकार ने अपने नोटों से जीरो कम कर दिए थे लेकिन सारी कोशिशें नाकाम रहीं.
ओर  साल 2017 से ही वेनेजुएला में मंहगाई लगातार बढ़ रही है. अधिकतर लोग जरूरत की सामान भी नहीं खरीद पा रहे हैं. शाम होते ही दुकानों में लूटपाट भी शुरू हो जाती है.
बता दे कि 4 अंकों की मुद्रास्फीति की वजह से वेनेजुएला की मुद्रा का अब कोई मोल नहीं रह गया है. उपभोक्ता या तो प्लास्टिक या इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर करने को मजबूर हैं या फिर डॉलर का रुख कर रहे हैं. लेकिन बसों समेत कई सुविधाओं के लिए बोलिवर्स में ही भुगतान जरूरी है.
वेनेजुएला में महंगाई का आलम यह है कि एक किलो मीट के लिए लाखों बोलिवर चुकाने पड़ रहे हैं. गरीबी और भुखमरी से बचने के लिए लगभग 30 लाख लोग वेनेजुएला छोड़कर ब्राजील, चिली, कोलंबिया, एक्वाडोर और पेरू जैसे देशों में जाकर बस गए हैं.
वही 33 साल के रिनाल्डो रिवेरा भी अपनी पत्नी और 18 महीने के बेटे को लेकर वेनेजुएला छोड़कर चले गए हैं. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया, वेनेजुएला में आप पूरे महीने काम करके सिर्फ दो दिन खा सकते हैं. यह जीने और मरने का सवाल था, या तो हम देश छोड़ते या फिर भूख से मर जाते.’
साल 2014 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत घटने के बाद वेनेजुएला समेत कई देश प्रभावित हुए. वेनेजुएला के कुल निर्यात में 96% हिस्सेदारी अकेले तेल की है. चार साल पहले तेल की कीमत पिछले 30 साल के सबसे निचले स्तर पर आ गई थी. वित्तीय संकट की वजह से सरकार लगातार नोट छापती रही जिससे हाइपर मुद्रास्फीति की स्थिति पैदा हो गई और वहां की मुद्रा बोलिवर की कीमत लगातार घटती रही.

ख़बर है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति मदुरो अपने देश की आर्थिक खस्ताहाली के लिए ओपेक (तेल उत्पादक देशों का समूह) देशों के प्रतिबंधों को जिम्मेदार ठहराते हैं. यूएस भी वेनेजुएला की सत्ता से मदुरो को बाहर निकालने के लिए आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए दबाव बनाने की कोशिश करता रहा है. हालांकि, मदुरो के आलोचकों का कहना है कि दो दशकों तक मदुरो के शासनकाल में फैली अव्यवस्था और भ्रष्टाचार की वजह से देश की ऐसी हालत हुई है।


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