एक जवान ने कैसे दी तीन लोगों को ज़िन्दगी ओर दुनिया को कह दिया अलविदा पूरी रिपोर्ट

अकसर आपने सेना के जवान को भारत माता की रक्षा करते देखा है । और आगे भी देखते रहेगे ओर आपने जवान को शहीद होते हुए भी देखा है देश की रक्षा के लिए , तो आपने हर मुसीबत के समय जवानों को भारत की जनंता की रक्षा और उनका सहयोग तक करते देखा है पर आज हम आपको उस जवान की बात बता रहे है जो जिंदगी से जाते जाते भी तीन लोगो को ज़िन्दगी दे गए ।जी हां अंगदान से अगर किसी की जान बचे तो इससे बड़ा कोई दान नहीं हो सकता। मिलिट्री अस्पताल (एमएच) देहरादून में एक ब्रेन डेड जवान के अंगों से दिल्ली में तीन लोगों को नया जीवन मिला है। एमएच से जल्द से जल्द जौलीग्रांट एयरपोर्ट तक अंग पहुंचाने के लिए स्थानीय पुलिस ने विशेष ग्रीन कॉरिडोर बनाया और डोनर विमान के माध्यम से दिल्ली के अस्पताल में भर्ती मरीजों तक अंग पहुंचाए गए। यह समस्त प्रक्रिया तीन घंटे में पूरी की गई, जिससे अंग प्रत्यारोपण सफलता पूर्वक संपन्न हो गया। दून की सफलता के बाद सेना अब देश के अन्य मिलिट्री अस्पतालों से भी अंगदान कराने के लिए प्रेरित करेगी।
आपको बता दे कि राजधानी के गढ़ीकैंट स्थित एमएच (मिलिट्री अस्पताल) में 25 अगस्त को डॉक्टरों ने एक जवान को ब्रेन डेड बताया था। जिसके बाद परिजनों ने फौजी के अंगदान करने का प्रस्ताव रखा। इस पर एमएच ने तत्काल आरआर (रिसर्च एंड रेफरल) आर्मी अस्पताल दिल्ली से संपर्क साधा। जहां से 25 अगस्त को ही एयर फोर्स का डोनर जहाज जौलीग्रांट शाम सात बजे पहुंच गया।लेकिन अंग निकालने के लिए हुए ऑपरेशन में लगभग रात डेढ़ बज गया। ऑपरेशन से किडनी, लीवर और आंख निकाली गई।
उसके बाद अंग प्रत्यारोपण के लिए एमएच से तीनों अंग सुबह पांच बजे जौलीग्रांट तक सड़क मार्ग से भेजे गए। इन अंगों को जल्द से जल्द पहुंचाने के लिए दून पुलिस ने विशेष ग्रीन कॉरिडोर बनाया और अंगों को एंबुलेंस के माध्यम से 40 मिनट में जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचाया गया। जहां से एयर फोर्स का डोनर विमान में सुबह छह बजे दिल्ली को रवाना हुआ। एयरफोर्स के पालम स्टेशन पर डोनर विमान सात बजे लैंड हुआ। जहां से सड़क मार्ग से आरआर आर्मी अस्पताल तक पहुंचाने में एक घंटा लगा। इसके बाद आरआर अस्पताल में वेटिंग में चल रहे तीन मरीजों को डॉक्टरों ने अंग प्रत्यारोपण कर नया जीवन दिया।
आपको बता दे कि देहरादून की भीड़भाड़ वाली सड़क और खराब मौसम के बावजूद पुलिस, सेना और एयरफोर्स के बेहतर समन्वय और प्लानिंग से जिस तरह से सिर्फ तीन घंटों में अंग दिल्ली पहुंचाए गए, इसे लेकर सेना के अधिकारी भी गदगद हैं। इससे सेना के अस्पतालों में जीवन-मौत से जूझ रहे सैनिकों को अंग प्रत्यारोपण कर जीवनदान मिलने की ऐतिहासिक शुरुआत हुई है।

जानकारी अनुसार बिग्रेडियर एके सूद (कमांडेंट एचएम देहरादून) का कहना है कि दून से यह ऐतिहासिक शुरुआत हुई है। बेहतर समन्वय से यह संभव हो पाया। इससे तीन लोगों की जान बच गई। दून के बाद अब देश के दूसरे एमएच के लिए भी यह पहल प्रेरणादायक है।
तो वही निवेदिता कुकरेती (एसएसपी, देहरादून) का कहना है कि सेना ने ट्रैफिक में जो मदद पुलिस से मांगी गई थी, वह समय पर दी गई। यह पुलिस के लिए भी पहला अनुभव था। भविष्य में इसके लिए निश्चित ग्रीन कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव बनाया जाएगा।
बहराल एक बडी पहल देहरादून से हुई है जहाँ एक जवान के परिवार वालो ने किसी की ज़िंदगी को समझा और जब उनका अपना जवान दुनिया से चला गया तो उन्होंने अपने उस जवान के अंगों को देकर तीन ज़िन्दगी को जीवन दान दे दिया जो एक बहुत बड़ी पहल है ।

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