उत्तराखंड :गढ़वाल मैं 9 साल के मासूम अनिकेत को बाघ ने कल मार डाला, दुःखद है सोचो क्या बीत रही होगी उस परिवार पर ? ( गढ़वाल मैं बाघ लगा हुवा है) अब नाचने की जगह मंथन करने का समय है बाकी आप समझदार है।

 


कह तो रहा है बोलता उत्तराखंड रो रो कर की अब सरकार ही बताये कैसे कोई और क्यो पहाड़ो मैं वापस कदम रखे।
अरे आये दिन घर का चिराग बुझ रहा है । हमारे गढ़वाल के द्वार कोटद्वार की बहादुर बच्ची राखी रावत के गांव देवकुंडई में कल रविवार की शाम घर के पास गोशाला में खेल रहे मासूम एक लौते ,घर के चिराग नौ साल के मासूम अनिकेत को गुलदार ने मौत के घाट उतार दिया। दुःखद


गुलदार के बच्चे को मारने की इस घटना से देवकुंडई समेत पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई है।
ओर गांव में मातम छाया हुआ है, तो बच्चे के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है कोहराम घर पर मचा हुवा है जानकरीं जो ग्रामीण हर्षपाल सिंह रावत ने दी उसके अनुसार रविवार शाम लगभह छह बजे देवकुंडई निवासी बलवंत सिंह की पत्नी ज्योति देवी अपने घर से लगभग 200 मीटर दूर स्थित गोशाला में दूध दुह रही थी। ओर उनका नौ वर्षीय बेटा अनिकेत पास ही में खेल रहा था। कि तभी गुलदार ने अचानक अनिकेत पर हमला कर दिया।


फिर बच्चे के चिल्लाने पर मां ज्योति देवी गोशाला से बाहर की ओर भागी और उसने चिल्लाना शुरू कर दिया। मां के चिल्लाने की आवाज सुनकर गुलदार तो भाग गया, लेकिन तब तक मासूम ने दम तोड़ दिया था दुःखद।
इस बच्चे की मौत से गांव और निकटवर्ती क्षेत्र में दहशत फैल गई है। सबसे अधिक दुख ये भी है कि अनिकेत दो बहनों का इलौता भाई था घर का कुल दीपक था वह राजकीय प्राथमिक विद्यालय भैंसवाड़ा में कक्षा चौथी का छात्र था। खबर लिखे जाने तक वन विभाग का कोई कर्मचारी गांव नहीं पहुंचा था व्हिब। क्षेत्रीय विधायक एवं पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने मामले में जिलाधिकारी से फोन पर बात कर बच्चे का पोस्टमार्टम गांव में ही करवाने और पीड़ित परिवार को तत्काल मुआवजा देने के निर्देश भी दिए थे। पौड़ी जिलाधिकारी धीराज गर्ब्याल ने मीडिया को बताया कि उनको देवकुंडई गांव में एक बच्चे को गुलदार ने मारने की जानकारी मिली है। डीएफओ को तत्काल वन कर्मियों को लेकर गांव पहुंचने, गांव में पिजरा लगाने और सुरक्षा के लिए वन कर्मियों की गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।  आपको बता दे कि पांच अक्टूबर को इसी देवकुंडई गांव में गुलदार ने एक मासूम बच्चे और उसकी बहन पर हमला किया था उस दिन के लगभग दो बजे 11 साल की राखिब रावत अपने छोटे पांच साल के भाई राघव को कंधे पर बैठाकर अपनी मां के साथ खेत से घर लौट रही थी।


तभी घात लगाकर बैठे गुलदार ने भाई पर हमला कर दिया। भाई पर झपटा मारने के बाद बहन राखी रावत ने जान की बाजी लगाकर भाई के ऊपर लेट गई थी। जिसमें गुलदार ने उसे बुरी तरह से घायल कर दिया था। जिसके बाद राखी का नाम राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए भी भेजा गया है।
तो वही 15 अक्टूबर को भी इसी क्षेत्र के कस्याणी गांव में भी शाम लगभग छह बजे चार साल के मासूम शुभम घर की रसोई में अपने परिजनों के साथ बैठा हुआ था। तभी गुलदार रसोई में घुस गया। उसने बच्चे को उठाने का प्रयास किया, लेकिन वह गुलदार के पंजे में नहीं आ सका, दूसरा हमला करने से पहले परिजनों के हो हल्ले के बाद गुलदार बच्चे को छोड़कर भाग गया। बच्चे को मामूली खंरोच आई थी।
बहराल दुःखद है।
है उत्तराखंड के नेताओ, मंत्रियो, दाईत्व धारियों बताओ कैसे बाघ के आतंक से आप अपने पहाड़ के लोगो की रक्षा करोगे ???


आये दिन गुलदार किसी घर का चिराग बुझा रहा है तो किसी घर से मासुम के माता पिता को।
आखिर ये मानव ओर जानवर के बीच होते सघर्ष को कम से कैसे किया जाए। ये सरकार सोचो।
क्योंकि नाचने वाले तो नाच रहे है किसी गाने मैं कि गढ़वाल मैं बाघ लगा हुवा पर ये बाघ कैसे मासूमो को अपना निवाला बना रहा है इस पर भी मंथन नही निर्णय लेने की जरूरत है अब ।

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