दोनो तस्वीरे सच है पहाड़ की बदहाली की ओर सरकार के प्रयास की । पूरी रिपोर्ट पढ़े

आपकी डबल इज़न की पूरी सरकार दिल्ली से मुंबई तक दौरे कर आपके राज्य मे कारोबार कैसे आये , कैसे उधोग लगे , पहाड़ चढ़े , उसके लिए प्रयास कर रही है निवेशकों से लेकर फिल्म जगत के बड़े बड़े नामो तक को कहकर आ गई है की हमारे राज्य मे सब कुछ आप के अनुकूल है ओर उत्तराखंड़ से बेहतर विकल्प आपके पास नही ।बात ठीक है पहल भी बहुत अच्छी है ओर पूरा उत्तराखंण्ड सरकार की इस पहल मे सरकार के साथ खड़ा है ।क्योकि राज्य का भला यही से होना है

पर दूसरी तरफ बोलता उत्तराखंड़ राज्य मे लगातार हो रही बरसात से भी चिंता मे है और सरकार भी पूरी होगी पहाड़ के लोग भूस्खलन होने की वजह से आये दिन मकान के मलबे में दब दब कर अकाल मौत मर रहे है । कही उनके जानवरो की मौत हो रही है । किसी की दुकान से लेकर घरबार तक टूट गए है कही लोग रोजी रोटी से अलग हो गए है बहुत से लोगो ने अपनी जीविका को खो दिया है। सड़के लगातार टूट रही है पाहड़ का जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है । आप सबको तो मालूम है ही कि राज्य के 9 जिले पर्वतीय है जो आज भी विकास के लिए तरसते है अब जरा रुद्रप्रयाग की कालीमठ घाटी की जनता की बात इस समय करु तो वहां के लोग ज़िन्दगी हाथ मे लेकर आजकल चल रहे उनको ये नही मालूम कि वो घर से निकलने के बाद वापस घर आ भी पायेगे या कभी नही । आपको बता दू की पिछले 15 दिनों से कालीमठ के ग्रामीण जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं. दरअसल, बारिश के कारण कालीमठ घाटी को जोड़ने वाली सड़क का कुछ हिस्सा ढहने से गहरी खाई बन गई है. इस खाई को ग्रामीण लोहे के गार्डर पर चलकर पाकर कर रहे हैं और ऊपर से उफान पर आया गदेरा लगातार बह रहा है।
मुझे वो दिन फिर से याद आ रहा है जब 16 ओर 17 जून साल 2013 की आपदा के बाद मे उसी रास्ते से किसी तरह चौमासी तक पहुचा था और फिर केदारनाथ तक उस दौरान तो पूरे जगह सड़क टूट रखी थी सिर्फ पैदल ओर पहाड़ मे चढकर ही अंतिम गाँव तक ओर उधर के गाँव गाँव तक मे खुद गया था ( कालीमठ , कोटमा, स्यांसु, जाल तला ,जाल मलहा , कविल्ठा , से होते हुए चौमासी तक )  
ओर आज एक बार फिर जब मे देहरादून मे हूँ तो इस तस्वीर को देखकर मुझे वो पल याद आ गए जब मै वहां रिपोटिंग कर रहा था ठीक इन्ही हालातो मे तब भी कहा था और आज भी कहा रहा हूँ कि कास हमारे नीति नियंता वो नीतियां बनाये जिससे पहाड़ के दर्द को राहत मिले उसका बचाव हो कुछ वो किया जाए जिससे पहाड़ वासियो के दर्द भरे जीवन को थोड़ा तो कम किया जाए ।

तस्वीरे बोल रही है जो रुद्रप्रयाग जनपद की कालीमठ घाटी की हैं. जो हमको डरा रही है देहरादून में बैठ कर तो सोचिए जो इन रास्तों पर चल रहा होगा क्या वो भगवान है इंशान नही उसकी क्या हालत होती होगी भाई कल्पना तो करो ।  
वो तो भला हो उनका जिनका नाम है सिर्फ जवान कालीमठ क्षेत्र की भैरवघाटी पर पुलिस और एसडीआरएफ के जवान ग्रामीणों के लिए मसीहा बने किसी तरह से आवाजाही करवा रहे हैं. नीचे उफनती काली गंगा बह रही है और गदेरा ऐसे में हल्की सी चूक भी इनकी जान पर भारी पड़ सकती है.
आपको बता दू की कालीमठ घाटी के एक दर्जन से अधिक गांवों को जोड़ने वाले गुप्तकाशी-कालीमठ मोटरमार्ग का भैरवघाटी में एक हिस्सा गदेरे के बहाव में समा गया. जिसके बाद इस मार्ग पर आवाजाही प्रभावित है. ग्रामीणों की आवाजाही के लिए लोक निर्माण विभाग ने यहां पर लोहे का गार्डर लगा दिया है. जिन पर ग्रामीण जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं. ग्रामीणों के साथ कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है जो बोल कर नही आएगा ।

तो कही इतना ही नहीं घाटी में 15 दिनों से चिलोंण्ड, चैमासी, कालीमठ, कविल्ठा, कोटला, जालमल्ला, जालतल्ला आदि गांवों में खाद्य सामग्री का संकट खड़ा हो गया है. जहां ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पैदल सफर कर रहे हैं. वहीं, मोटरमार्ग पर कई वाहन पिछले 15 दिनों से फंसे हुये हैं.

आपको ये भी बता दू की कालीमठ घाटी में लगातार बारिश हो रही है. जिसके कारण घाटी की कालीगंगा नदी भी उफान पर बह रही है. नदी के बहाव से जमकर भू-कटाव भी हो रहा है. ऐसे में क्षेत्र की जनता की मुश्किलें दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं. जब तक बरसात नहीं थमती तब तक मोटरमार्ग का निर्माण नहीं हो सकता. ऐसे में ग्रामीणों की जान इनदिनों एसडीआरएफ के जवानों के ही हाथों में है. जो खुद भी जान जोखिम में डालकर उन्हें आवाजाही करवा रहे हैं भगवान इन जवानों की भी रक्षा करे जो पहाड़ के लोगो के लिए इस समय खुद भगवान से कम नही है ।
ओर एक बात पूरी सरकार को विपक्ष को बोलता है उत्तराखंड कहता है कि सर हमको मालूम है कहा चिकन मटन खाया जाता है कहा जूठे आँसू बहाए जाते है कहा मौत पर राजनीति होती है, कहा पर पहाड़ की जनंता के साथ मिलकर हर राजनीतिक पार्टियां खेल करती है और कहा पर ओर कोन कोन सिर्फ़ वादे दावे के सिवा कुछ नही करता। बहराल डबल इज़न की सरकार के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत जी से बोलता उत्तराखंड़ उम्मीद करता है पूरे विस्वास के साथ कि आप प्रधानमंत्री मोदी और पूरे केन्द्र सरकार के आगे इस दर्द को लेकर आयेगे क्योकि यही सब कुछ हमारी ताकत है तो खराब मौसम हमारी सबसे बड़ी चिंताएं जब पहाड़ है पाहड़ वासी है वहाँ के लोग वहां है तब ही हम उनसे मिलकर बनकर उतराखंड है आप से उम्मीद करता हूँ कि आप् कुछ उन टेक्नॉलजी को पहाड़ में लेकर आये जिससे ना पहाड़ को नुकसान हो ना वहां की प्रकति को ओर मकसद एक ही कि किसी भी तरह पहाड़ के दुःख दर्द को कम किया जा सके आप की कही तस्वीर राज्य के विकास के लिए दिल्ली से मुंबई तक आपकी मेहनत को बता रही है तो दूसरी कही तस्वीरे आजकल पहाड़ की बदहाली की मौसम के। मार की कहानी लगा रही है और दोनी ही तस्वीरे सच है राज्य हित मे आपकी भी ओर आजकल के पहाड़ की भी । बस सिर्फ इतना कहना है कि दैवीय आपदा जब आती है तो कोई भी सरकार कुछ नह कर सकती सिर्फ राहत और बचाव और मुआवजा के इलावा ।जो ही सकता है उसका नाम है कि नीतू नियंता ठीक ओर भविष्य को देख कर दुर्गामी नीतियां बनाये तो काफी हद तक राहत मिल सकती है ।

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