अनियमितता के आरोप में जिला पंचायत अध्यक्ष निलंबित

जिला पंचायत अध्यक्ष सविता चौधरी पर आखिरकार दुकानों के आवंटन में अनियमितता समेत विभिन्न मामलों की गाज गिर गई। शासन ने हरिद्वार सदर और भगवानपुर तहसील गेट पर निर्मित दुकानों के आवंटन में लाखों रुपये के सरकारी धन के नुकसान सहित अन्य मामलों में आरोपों को पुष्ट मानते हुए अध्यक्ष को निलंबित कर दिया।

पंचायतीराज विभाग की प्रमुख सचिव मनीषा पंवार ने निलंबन आदेश जारी किए हैं। जिलाधिकारी दीपक रावत ने इसकी पुष्टि की है।1जिला पंचायत सदस्य अमरोज, नीलू, वीरेंद्र सिंह, सलमी, बबली आदि ने जिला पंचायत अध्यक्ष सविता चौधरी के खिलाफ शासन को पत्र लिखकर जिला पंचायत की भगवानपुर में 18 की नीलामी में चार करोड़ और ज्वालापुर क्षेत्र में स्थित हरिद्वार सदर तहसील गेट पर बनी 27 दुकानों की नीलामी से आवंटन में 8 करोड़ की वित्तीय अनियमितता आदि का आरोप लगाकर शासन से जांच कराकर कार्रवाई की मांग की थी।

इसके क्रम में 18 जुलाई को जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट में 26 दुकानों के आवंटन में अनियमितता की प्रारंभिक जांच में पुष्टि की गई। इसके आधार पर जिलाधिकारी ने कार्रवाई की सिफारिश कर दी। वहीं, इस बीच जिला पंचायत अध्यक्ष ने उच्च न्यायालय में रिट दाखिल की। उच्च न्यायालय ने 18 अक्टूबर को आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई करने से पूर्व उनका पक्ष सुनने का आदेश जिलाधिकारी को दिया। जिलाधिकारी दीपक रावत ने बताया कि न्यायालय के आदेश के अनुपालन में कारण बताओ नोटिस जारी कर जिला पंचायत अध्यक्ष को पक्ष प्रस्तुत करने का 25 अक्टूबर को आदेश दिया।

लेकिन न आने पर 12 नवंबर को तीन दिन का अतिरिक्त समय देने का नोटिस दिया। इस तीन दिन के नोटिस का भी जवाब न आने पर जिलाधिकारी ने शासन को 29 नवंबर को रिपोर्ट भेजकर पहले ही जांच रिपोर्ट को अंतिम मानने का पत्र भेज दिया। इसके आधार पर प्रमुख सचिव मनीषा पंवार ने अंतिम जांच पूर्ण होने तक तत्काल प्रभाव वे जिला पंचायत अध्यक्ष सविता चौधरी को निलंबित करते हुए उनके कार्यों व दायित्वों के निर्वहन पर रोक लगा दिया।

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