देवेन्द्र का परिवार तो उजड़ गया पत्नी सहित बच्चे अब दुनिया मे नही क्या होती है ये नोकरी भी ना !

बीते रोज कुछ दिन पहले बोलता उत्तराखंड ने ख़बर आपके बीच रखी थी कि पहाड़ की एक महिला ने  अपने दो मासूम  बच्चों के साथ नदी मे कूद कर जान दे दी है   ओर उस महिला के  पति देवेंद्र रावत  की बिना वजह  नोकरी चले  जाना ही पूरे परिवार की इस मानसिक हालत का कारण था जानकारी अनुसार देवेंद्र रावत ने घर पर नही बताया था कि उनकी नोकरी चली गई है जब ये बात उनकी पत्नी को मालूम चली तो वो ओर टेंशन मे आ गई उनकी मानसिक हालत और खराब हो गई ओर तब स्याद उन्होंने अपनी ओर अपने बच्चों की  ज़िंदगी को खत्म कर डाला  इससे पहले देवेंद्र की पत्नी उन पर उसे देहरादून लाने की बात आये दिन कह रही थी ओर  बेरोजगार देवेंद्र बात को किसी तरह से टालता रहा  इस  पूरे वाक्य पर पर्वतजन ने अपनी  रिपोर्ट भी छापी है   ओर जहा से देवेन्द्र रावत की नोकरी गई वहा के अधिकारी पर सवाल भी खड़े किए है        

इसके साथ ही देवेन्द्र  के साथियों ने भी अपनी बात रखी देवेन्द्र से मिलकर आने के बाद ।

एक हस्ता खेलता परिवार उजड़ गया  देवेन्द्र रावत का ओर जैसे कि पर्वतजन ने अपनी रिपोर्ट मे कहा है कि  अधिकारी ने कहा  भी था कि इन कर्मचारियों को वापस लो काम पर  यूसेक के निदेशक ने एक  ना सुनी किसी की भी  तो फिर ये पूरा मामला तो जांच का बनता ही है। 

क्या बोला जाए ओर क्या  कहा जाए कि अपनी बात हमेशा ऊपर रखने के लिए इस अधिकारी ने पहाडियो को मजबूर  कर दिया है आत्महत्या करने के लिए !! या बात कुछ  ओर है।

दो मासूम बच्चों के साथ महिला ने जो अपनी ज़िन्दगी खत्म कर डाली उससे एक पूरा  परिवार उजड़ गया।  

इस मा ने यही सोचा होगा कि खुद अगर अकेली दुनिया को छोड़कर चली गई तो  कोन पालेगा ओर देखेगा उसके कलेजे के टुकड़े को इसलिए मानसिक हालत ठीक ना होने के कारण उन मासूमो की ज़िंदगी भी खत्म हो गई एक मां के साथ ओर  कभी वो समय था जब देवेन्द्र के  चेहरे पर ये मुस्कान होती थी   

क्या मालूम था   देवेन्द्र को की भगवान कहे या ये कलयुगी  सिस्टम या लाचार व्यवस्था उसकी  ज़िन्दगी पर वो ग्रहण  लगा देगी जहा से निकलना  इन दुखों  के बीच  आसान नही  ।पर बात जो भी हो कारण जो भी रहे हो  पाहड़ कि इस महिला का इस कदर टूटना की वो आत्महत्या जैसा कदम उठा दे । ये पूरे पहाड़ के लिए चिंता की बात है   क्योकि पहाड़ को बचाने  वाली महिला  दुख दर्द मे रहने वाली महिला की इच्छा शक़्ति  या  उनकी मानसिक सोच अब  कमजोर पड़ रही है तो ये भविष्य के लिए ठीक नही सरकार  ना पहाड़ के लिए ओर ना राज्य के लिए

ओर एक बार फिर बोलता उत्तराखंड  आप सब से  अपील करता है कि  आत्महत्या जैसा कदम ना कोई उठाये ना किसी को उठाने दे  दुःख और  सुख ज़िंदगी  का नाम है इसलिए कभी अगर आपको कही भी कुछ अटपटा लगे तो  अपने ओर अपने आस पास वालो के मनोबल को खूब बढ़ाये उन्हें टूटने ना दे  

 

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