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सर्वोच्च कार्यालय इकाई ने लिया बड़ा निर्णय, वापस जमा किए कार्ड, कटौती से भी किया इंकार 

देहरादूनः

सचिवालय तथा प्रदेश कार्मिको, पेन्शनर्स व उनके आश्रितो हेतु सफेद हाथी साबित हो रहे गोल्डन कार्ड की खामियां अब तक दुरूस्त न होने के कारण कोरोना काल की भयावह स्थिति मे भी कार्मिकों, पेन्शनर्स व उनके परिवार के आश्रितो को किसी प्रकार की कोई चिकित्सा सुविधा न मिलने तथा इस सम्बन्ध मे अपने सदस्यो के हित मे लिए गये पूर्व निर्णयानुसार 15 दिवस की समयावधि दिनांक 15.05.2021 को समाप्त हो जाने के उपरांत आज सचिवालय संघ द्वारा बडा निर्णय लेते हुये प्रारंभिक स्तर पर सचिवालय के सभी अधिकारियो/कर्मचारियो एवं उनके आश्रितो के गोल्डन कार्ड समेकित रूप से एकत्र करने की तिथियाॅ घोषित कर दी गयी हैं।
प्रदेश की सर्वोच्च कार्यालय इकाई के संघ द्वारा आज अपने सदस्यो की स्वास्थ्य सुविधाओ के सन्दर्भ मे लिए गये बडे निर्णय पर संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी ने बताया है कि स्वास्थ्य विभाग और राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को गोल्डन कार्ड की खामियो को दुरूस्त करने हेतु पर्याप्त समय और अनुरोध करने के उपरांत भी इसे कार्मिक वर्ग की अपेक्षाओ के अनुरूप ठीक नही किया गया है तथा न ही कोई सक्षम अधिकारी इसमे कोई विशेष दिलचस्पी ही ले रहा है। सचिवालय तथा प्रदेश के कार्मिको, पेन्शनर्स का प्रतिमाह अंशदान काटे जाने के बाद भी कोई सुविधा नही दी जा रही है, इसे स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा मात्र अपनी आय का स्रोत बनाया गया है, जिसे अब किसी भी रूप मे बर्दाश्त नही किया जायेगा।

सचिवालय संघ के आज के निर्णय पर अध्यक्ष व महासचिव की ओर से सचिवालय सेवा संवर्ग के सभी सदस्यगणो को परिवार सहित अपने-अपने गोल्डन कार्ड को दिनांक 19 मई से 24 मई, 2021 तक सचिवालय संघ के कार्यालय मे अनिवार्य रूप से जमा कराए जाने का अनुरोध किया गया है, जिसके उपरांत इन सभी निष्प्रयोज्य गोल्डन कार्ड को समेकित रूप से मुख्य कार्यकारी अधिकारी,स्वास्थ्य प्राधिकरण को लिखित रूप मे जमा कर दिए जाने का निर्णय हुआ है।
यह भी निर्णित हुआ है कि गोल्डन कार्ड के एवज मे की जा रही मासिक अंशदान की कटौती को अब, तब तक स्वीकार नही किया जाएगा, जब तक गोल्डन कार्ड की खामियां धरातल पर अपेक्षित रूप से दुरूस्त न हो जाए।

इस कडी मे इस माह होने वाली अंशदान कटौती को संघ के स्तर पर तत्काल रोका जाएगा तथा गोल्डन कार्ड की खामियां दूर होने तक चिकित्सा प्रतिपूर्ति की पूर्व व्यवस्था, जो स्वतः ही तब तक लागू रहनी चाहिए थी जब तक नई व्यवस्था कारगर न हो जाए, को वैकल्पिक व्यवस्था के रूप मे अमल मे लाए जाने की स्वीकार्यता करायी जाएगी। इसके उपरांत भी इस माह पुनः अंशदान की कटौती जबरन किए जाने पर सचिवालय संघ द्वारा मुखर होकर आवाज उठाने की बात कही गयी है।

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