देहरादून की लव सिटी पर खूब चला पिला पंजा ओर नेता आज गायब थे !

आखिर कार देहरादून के प्रेमनगर बाजार के अतिक्रमण पर शुक्रवार को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हो ही गई। ओर देखते ही देखते महज 30 मिनट की कार्रवाई के अंदर प्रेमनगर का अतिक्रमण मलबे में तब्‍दील हो गया। तो इसी बीच निशान से ज्‍यादा हिस्‍सा तोड़ने पर कुछ व्‍यापारियों ने एसडीएम से नोकझोंक भी हुई ओर फिर वे धरने पर बैठ गए। पुलिस ने पहले उन्‍हें समझाने का प्रयास किया, न मानने पर पुलिस को बल का प्रयोग करना पड़ा। ओर फिर लाठीचार्ज के बाद भीड़ को वहां से हटाया गया। 
आपको बता दे कि अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत टास्क फोर्स ने प्रेमनगर मुख्य बाजार से लेकर नंदा की चौकी तक 155 से ज्यादा बड़े अतिक्रमण चिह्नित किए हैं। अतिक्रमण की जद में पांच से आठ मीटर तक दुकानें और मकान आने के चलते व्यापारियों और लोगों ने इसका विरोध भी लगातार किया।

आपको बता दे इससे पहले प्रेम नगर का अतिक्रमण राजनीतिक मुद्दा बनने पर भाजपा के विधायक एकजुट होकर अतिक्रमण के विरोध में खड़े हो गए थे और इसी बीच सरकार मलिन बस्तियों पर अध्यादेश तो लाई, लेकिन प्रेमनगर को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की। आज जिलाधिकारी एसए मुरूगेशन ने बताया कि शुक्रवार को सुबह सात बजे से यहां अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई।
ओर फिर प्रेमनगर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए पर्याप्त पुलिस फोर्स तैनात की गई है। चार जोन टीमों में शामिल पीएसी और चार से ज्यादा थानों की पुलिस यहां तैनात की गई है। इसके अलावा ट्रैफिक डायवर्ट करने के लिए बल्लूपुर से लेकर नंदा की चौकी तक कदम-कदम पर फोर्स तैनात की गई है। एसएसपी ने यहां तैनात पुलिस फोर्स की ब्रीफिंग करते हुए सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए।
बहराल अतिक्रमण तो हट गया है पर व्यापारियों मे आक्रोश भी साफ देखा जा रहा है तो बीजेपी कांग्रेस के नेता अपनी तरफ से व्यापारियों को कुछ भी बोलने की स्थिति मे नही दिखाई दिए।
डबल इज़न की सरकार माननीय कोर्ट के आदेश का पालन कर रही है ओर व्यापारी वर्ग राजनेताओ से खार खाये बैठा है .कहने वाले तो ये भी कह रहे है कि बीजेपी को राज्य मे आगे होने वाले चुनाव मे इसका जमकर खामियाजा भुगतना पड़ सकता है खेर ये तो भविष्य के गर्भ मे की आगे क्या कुछ निकलकर आता है पर आज बीजेपी के वो चारो विधायक गायब थे जी पिछली बार इन सब व्यापारी भाई लोगो के बीच धरने पर बैठे थे। वजह साफ थी माननीय कोर्ट की सख़्ती।

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