दबंग पांडेय जी हमका माफ करना ख़बर जरूरी थी! देख मेरे भगवान मासूमो का ये स्कूल

राज्य के सरकारी स्कूलों पर लगातार लटकते ताले , ओर शिक्षा की गुडवत्ता ना के बराबर ।इन बातों पर मुख्यमंत्री कही बार चिंता जता चुके है तो शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय भी लगातार प्रयास कर रहे कि कैसे व्यस्था को पटरी पर लाया जाए पर वो भी क्या करे उनके लांख कोशिश करने के बावजूद भी कोई ना कोई स्कूल आज भी बदहाली की हालत में दिख जाता है आपको बता दू की उधम सिंह नगर जिले का एक ऐसा विद्यालय है जो डबल इज़न की सरकार को चिड़ा रहा है जो व्यवस्था की हकीकत को अपनी तस्वीर दिखा दिखा कर बोल रहा है कि देखो यहा ऐसे तैयार होते है देश के भविष्य जो खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं ओर ये जिला जब दबंग सूबे के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ताल्लुक रखता है तो बात और गहरी हो जाती है
आपको बता दे कि सितारगज़ विधानसभा में हटथा गांव में चलने वाला प्राथमिक स्कूल अपनी बदहाली का रोना रो रहा है. इस सरकारी स्कूल में शौचालय और पेयजल जैसी सुविधा तो दूर की बात यहां पर बच्चों के पढ़ने के लिए भवन तक नहीं हैं. बच्चे खुले आसमान और पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं. मे तो कहता हूँ किं जब यहा कोई व्यवस्था ही नही तो ताला यहा भी लगा देना चाहिये भाई जब व्यवस्था नही है छात्रो के लिए तो ताला यहा भी लग जाए जहा इतने सरकारी स्कूल बंद हो गए है राज्य के वहा ये भी सही या फिर आप यहा के छात्रों को वो तो दे दो जिसके ये हकदार है 

जानकारी अनुसार आपको बता दे कि, 17 नवंबर 2017 तक ये स्कूल केंद्र की EGS योजना के तहत चलता था. ये स्कूल एक निजी भूमि पर चल रहा था. नवंबर 2017 के बाद इस स्कूल का संबंद्ध उत्तराखंड सरकार से हो गया, तब भी ये स्कूल इसी निजी भूमि पर चल रहा है. लेकिन अब भूमि मालिक रामन देवी ने शिक्षा विभाग को तीन महीने में भूमि खाली करने की बात कही है. ऐसे में बच्चों के साथ शिक्षा विभाग के सामने भी स्कूल स्थानांतरित करने के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है.
स्कूल में इस वक्त 44 छात्र हैं. स्कूल मे आते ही सबसे पहले बच्चे मैदान की सफाई करते हैं. उसके बाद पेड़ के नीचे बैठक कर पढ़ाई करते है. स्कूल में दो अध्यापक तैनात किए गए है. दो ब्लैकबोर्ड हैं और एक अलमारी भी है. बारिश के दौरान बच्चों की कक्षाएं झोपड़ी में चलती हैं.
वहीं पिटल हटचथा प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत दोनों शिक्षका का कहना है कि 2012 से वो बच्चों को इसी तरह खुले में पढ़ा रहे हैं. जब बारिश या आंधी तूफान आता है तब वो छात्र झोपड़ी में चले जाते हैं. इस परिसर में बच्चे असुरक्षित हैं. इस बारे में विभाग को कई बार लिखा जा चुका है. लेकिन इस ओर किसी ने भी ध्यान नहीं दिया. जब इस बारे में ग्राम प्रधान परमजीत कौर से बात कि गई तो उन्होंने बताया कि इस बारे में उन्होंने स्थानीय विधायक से भी बात की है. जल्द ही स्कूल के लिए भूमि आंवटित की जाएगी.

तो वही उधम सिंह नगर मुख्य शिक्षा अधिकारी ने कहा कि यहां की अधिकांश भूमि वन विभाग से संबंधित है, जहां भवन का निर्माण संभव नहीं है. हालांकि, शिक्षा को लेकर बच्चों को सभी संभव सहायता प्रदान की गई है. जिला शिक्षा विभाग ने उन्हें आश्वासन दिया है कि यदि कोई राजस्व भूमि उपलब्ध है तो इसे प्राथमिकता के आधार पर स्कूल को आवंटित किया जाएगा । बहराल ये हालात है राज्य के क्योंकि जहा कुछ छात्र है पढ़ाई के लिए वहा व्यवस्था के नाम पर कुछ भी नही ओर जहा छात्रों की सख्या कम है या ना के बराबर है वहा सब कुछ खेर जिस स्कूल का जिक्र हमने किया उसके हालात विजयबहुगुणा के सीएम रहते समय से खराब चल रहे है और ये सितरगंज उनकी ही विधानसभा हुवा करती थी और आज भी उनके पुत्र सौरभ बहुगुणा इस विरासत को आगे बढ़ा रहे है और ये पूरा जिला हमारे शिक्षा मंत्री जी का बहुत आदर करता है इसलिए उनको भी ये ख़बर बतानी ओर पहुचानी उनके कानो तक जरूर थी इसलिए मंन्त्री जी उम्मीद करते है कि आप जल्द ही कुछ करेगे ।

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