कोरोना मरीजों को अब इलाज के लिए नहीं मिलेगा प्लाज्मा, सरकार ने बदली गाइडलाइन

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प्लाज्मा का मनमाना इस्तेमाल भारी न पड़ जाए

वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. गगनदीप कंग समेत अन्य ने मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन को पत्र लिखकर बिना वैज्ञानिक तथ्य और मनमाने ढंग से प्लाज्मा के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की थी। वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और चिकित्सकों ने पत्र लिखकर ये तक चेतावनी दे दी थी कि प्लाज्मा का मनमाना इस्तेमाल कहीं वायरस के और खतरनाक रूप के प्रसार का कारण न बन जाए जिससे महामारी और अधिक बेकाबू हो जाए। मरीजों, तीमारदारों डॉक्टरों के हित में इसे बंद किया जाए।

आईसीएमआर के वैज्ञानिक डॉ. समिरन पांडा बताते हैं कि प्लाज्मा में पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडीज का होना जरूरी था लेकिन इसकी सही जानकारी नहीं मिल पा रही थी। वह बताते हैं कि अस्पतालों पर पहले से अत्यधिक भार है, प्लाज्मा थेरैपी के कारण भार और बढ़ रहा था। मरीज सात दिन में स्वस्थ हो रहे हैं। प्लाज्मा देने का मतलब कि रोगी को और लंबे समय तक अस्पताल में रखना है।

प्लाज्मा के इस्तेमाल पर रोक के प्रमुख कारण
1- प्लाज्मा के इस्तेमाल से कोरोना मरीजों को गंभीर स्थिति में जाने या मौत से बचाने में न कोई मदद मिल रही थी न कोई साक्ष्य हैं।
2- आईसीएमआर ने कहा जिस चीज से फायदा नहीं है उसे उम्मीद में जारी रखना ठीक नहीं। इससे सिर्फ डर, भय और घबराहट की स्थिति बनती है।
3- बीएमजे जर्नल में प्रकाशित शोध में इसके सार्थक परिणाम नहीं दिखे थे। इसके बाद कई महीने मंथन के बाद ये फैसला लिया गया।
4- लैसेंट पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार ऐसा कोई आंकड़ा या साक्ष्य नहीं है जिससे पता चले कि प्लाज्मा से मौत का खतरा या बीमारी का समय कम होता है।
5- संक्रमण की चपेट में ऐसे लोगों की संख्या अधिक है जो किसी न किसी बीमारी से ग्रसित हैं। ऐसे प्लाज्मा डोनेशन उनके साथ दूसरे के लिए भी खतरनाक है।

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