सूबे के मुखिया त्रिवेंद्र रावत के शपथ लेने से पहले और लेने के बाद भी त्रिवेंद्र रावत के कुनबे के लोगों को त्रिवेंद्र रावत मुखिया के पद पर रास नहीं आ रहे थे पर वो करते क्या आख़िर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का हाथ त्रिवेंद्र रावत के सर पर जो है। कोई फिर भला क्या बिगाड़ सकता है, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत का। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही त्रिवेंद्र रावत ज़ीरो टॉलरेंस की सरकार चलाने का संकल्प ले चुके थे, पर भाजपा क़ुनबे के कई दिग्गज कद्दावरों को शायद त्रिवेंद्र रावत मुख्यमंत्री की कुर्सी पर पसंद नहीं आ रहे हैं या फिर उनके ज़ीरो टॉलरेंस का संकल्प। सूत्र बताते हैं की विपक्ष में बैठी कांग्रेस त्रिवेंद्र रावत की सरकार पर उतना हमला नहीं कर रही है, जितना मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के कुनबे के लोग भीतरघात करने की तैयारी कर चुके हैं औऱ कुछ कर भी रहे होंगे। ख़बर बार-बार आती है कि कुछ नहीं बहुत विधायक असंतुष्ट हैं, तो वहीं ख़बर ये भी आती है की चाहे पूर्व सीएम विजय बहुगुणा हों या पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक के भी मन में प्रदेश का मुखिया बनने की चाहत और हसरतें आज भी ज़िंदा हैं। तो वहीं पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने भी अभी तक आस नहीं छोड़ी है। सूत्र ये भी बताते हैं कि सतपाल महाराज भी प्रदेश का मुखिया बनने के लिए बेचेन हैं। बहरहाल प्रचंड बहुमत की सरकार तो जनता ने भाजपा की बना डाली अब देखना ये होगा की आगामी चार सालों तक क्या त्रिवेंद्र रावत अपनी सीएम की कुर्सी बचा पायेंगे, क्या भाजपा हाईकमान अमित शाह का हाथ त्रिवेंद्र रावत के सर पर बरक़रार रहेगा, क्या पीएम का आशीर्वाद त्रिवेंद्र रावत को मिलता रहेगा ?

ये सवाल आज इसलिए उठ रहे हैं की अब तो मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत से नाराज़ बीजेपी के दिग्गज ये कहते हुए नज़र आ रहे हैं की यही हाल रहे तो त्रिवेंद्र के राज में नगर निगम हो या नगर पालिका के चुनावों में भाजपा को हार का मुह देखना पड़ सकता है, ज़रा याद कीजिए त्रिवेंद्र रावत के ख़िलाफ पहले भी कई बार साज़िशें रची जा चुकी हैं। जिसका ख़ामियाज़ा उन्हें विधानसभा का चुनाव हारने के बाद भुगतना पड़ा था। बहरहाल मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के सर पर जब तक पीएम और राष्ट्रीय अध्यक्ष का हाथ है तब तक साज़िशें नाक़ाम होती रहेंगी और उत्तराखंड भी यही चाहता है की हमने दिया है प्रचंड बहुमत अब एक ही मुखिया टिका रहे पूरे पांच साल।



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