सीएम त्रिवेन्द्र रावत के विरोधी धाराशायी पर आगे कठिन परीक्षा बाकी !!

Ratan Negi                                                                                                           राज्य के मुखिया   त्रिवेन्द्र रावत अपने कुनबे मैं अपने विरोधियो के बीच रहकर भी थराली चुनाव जीतने मैं कामयाब रहे इसलिए उनको बहुत बहुत सुभकामनाये 18 मार्च 2017 को जब त्रिवेन्द्र रावत को राज्य की कमान सोपी गयी थी तब से ही उनके विरोधियो ने उनके खिलाफ षड्यंत्र करना आरंभ कर दिया था कारण साफ था कि कुछ उनके बीजेपी परिवार के ही लोग नही चाह्ते थे कि रावत सीएम बने क्योकि वो लोग खुद राज्य का मुखिया बनना चाहते थे पर हाईकामान का त्रिवेन्द्र रावत पर पूरा विस्वास था और आज भी है भले ही त्रिवेन्द्र रावत के लिए जो कुछ भी 14 महीनों मैं कहा गया हो पर त्रिवेन्द्र रावत ने उन सब बातों को नज़र अंदाज़ कर सिर्फ अपने काम पर फोकस रखा वो लगातार इन 12 महीनों में काम करते रहे जीरो टालरेश की नीति के साथ काम करने का मन बनाया और सफलता भी मिली भले ही कुछ उनके उनसे चिड़े रहे होंगे या है पर त्रिवेन्द्र रावत बिना डर निडर होकर अपने काम को अंजाम देते रहे इन 14  महीनों  मैं अपनी सरकार के एक साल का पूरा काम काज उन्होंने जनता के बीच रखा ओर फिर जुट गए अपने मिशन पर त्रिवेन्द्र रावत जानते है कि जनता ने जो 57 का प्रचंड बहुमत दिया उसके पीछे की अहम वजह यही है कि राज्य मैं भ्रस्टाचार का शोर अब ना सुनाई दे ,अब सरकार ये ना कहे कि केंद्र राज्य की मदद नही कर रहा है , सीएम ये ना कहे कि मुझे काम नही करने दिया जा रहा है , कोई भी ये ना कहे कि राज्य की नोकरशाही बेलगाम हो रखी है और सरकार बनाये वो नीतियां जिससे ही अब पहाड़ का विकास जो धरातल पर उतरे ,पहाडी जिलो मैं विकास का नाम ना लिए बगैर विकास होता दिखे इन सब बातों को मुख्य्मंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने समझ काम करना आरंभ किया भले ही इस बीच जहा विपक्ष उनकी खिंचाई सरे आम टीवी चैनलों मे कर रहा था तो दूसरी तरफ उनके कुनबे के वो लोग जो सीएम त्रिवेन्द्र से खार खाये बेठे है कुछ ना कुछ राजनीतिक षडयंत्र करते रहे पर त्रिवेन्द्र रावत इन सब बातों को नजरअंदाज कर अपने काम मैं जुटे रहे जिसमे उनको बीजेपी हाईकामान का समर्थन भी इन 14 महीनों मैं पूरा मिलता रहा क्योकि जो भी उनके खिलाफ विरोध का माहौल बनाने की कोशिश मैं दिखा उसे बीजेपी हाईकामान ने साफ और दो टूक कह दी कि आप उन्हें काम करने दीजेए अगर आपको दिकत जायद है तो जय राम जी की आप इस्तिफा दे दे बस इतना सूनने के बाद किसकी हिमत फिर जो दोबारा षडयंत्र रचे पर ये तो राजनीति है यहा तो हर शख्स सही समय की तलाश मैं रहता है मुख्य्मंत्री त्रिवेन्द्र रावत इन सब बातों से अन्जान नही थे लेकिन उन्होंने सब बातों की फिक्र को छोड़कर राज्य के विकास के काम काज पर फोकस किया सबसे बड़ी जीत त्रिवेन्द्र रावत सरकार की ये रही कि अभी तक कोई भी शोर राज्य मैं भ्रस्टाचार का नही सुनाई दिया , राज्य सरकार जनहित के फेशलो को लगातार लेती रही , राज्य के कुछ मंत्री का भले ही मुख्य्मंत्री त्रिवेन्द्र रावत के साथ दिल ना मिलता हो पर वो भी बंद जुभान से सीएम त्रिवेन्द्र रावत के निर्णय की तारीफ बंद कमरों मैं करते नज़र आये क्योकि मीडिया और जनता के आगे तो एक दुश्मन भी दूसरे दुश्मन की तारीफ कर देता है फिर यहा तो बात सियासत की ही राजनीति की है पीएम मोदी और डबल इज़न पर बरसने वाले राज्य के पूर्व मुख्य्मंत्री हरीश रावत भी कही बार त्रिवेन्द्र रावत की खुलकर तारीफ कर चुके है लिहाज शांत और कम बोलने वाले मुख्य्मंत्री त्रिवेन्द्र रावत पर अब पूरे राज्य की जनता की नज़र है कि वो एक नए उत्तराखंड का निर्माण करे जहा
बीजेपी ने साल 2017 मैं चुनाव से पहले देवभूमि दृष्टि पत्र 2017 जनता के आगे रखा जो था उसमें शिक्षा से बेहतर हो कल की बात रखी गई , स्वस्थ हो हर घर परिवार की बात रखी गई, पर्यटन और तीर्थाटन 12 महीनों की बात है , कृषि से आएगी खुशाली की बात हो , बुनियादी विकास मजूबत आधार की बात रखी गयी हो , युवा को रोजगार की बात हो ,सशक्त नारी समान अधिकार , सबका साथ सबका विकास , विकसित उदयोग सुगम व्यापार ,भृस्टाचार मुक्त शासन स्वछ प्रशासन हो या गैरसैण पर सरकार का साफ रुख ये सब वो मत्वपूर्ण बात है जिसको जनता ने समझकर 57 कमल के फूल राज्य मैं खिलाये अब सरकार के पास 4 साल है और ऊपर लिखे गए बिंदुओं पर ही त्रिवेन्द्र रावत की सरकार को काम करना है क्योंकि जनता से यही वायदे कर बीजेपी सत्ता मैं आयी है अब देखना यही है कि राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत आगे  आने वाले  4 सालो मैं क्या इन सब वादो को पूरा कर पायेगे क्योकि यही वो वादे है जो बीजेपी ने जनता से किये है इसके अलावा अगर बात की जाए तो लोकायुक्त भी राज्य के लिए जरूरी है त्रिवेन्द्र रावत की सरकार भले ही इस बात को कह रही हो कि उनकी सरकार जीरो टालरेश की नीति पर काम कर रही है   लोकायुक्त  की जरुत अब नही लेकिन है राज्य के मुख्यमंत्री जी जनता ने मान लिया कि आपकी सरकार जीरो टालरेश की नीति पर  कायम    है पर आगे आने वाली 2022 की सरकार के बारे मे कोई भी  अभी नही जानता   एक मजूबत लोकुयक्त की लकीर खिच दीजेए ताकि भृस्टाचारी साँप भी मर जाये और आपकी सरकार पर आंच भी ना आये की आप लोकायुक्त नही बना पाए , इसके साथ ही मुख्य्मंत्री जी आपके कुनबे के कुछ लोगों की आप से शिकायत भी है कि आप मिलनसार नही है वो कहते है कि हमारे सीएम हस्ते कब है आपके चेहरे पर वो मुस्कान देखना चाहते है ताकि आपको हस्ता मुस्कुराता देख उनके अंदर भी जोश ओर उमंग का संचार हो और वो जी जान  से जुट जाएं जन हीत मैं ये तो आपके लोगो की बात है पर इस समय पूरे पहाड़ के लोग कुमाऊँ गढ़वाल के लोग यही कहते है कि बस सीएम किसी भी तरह खाली होते पाहड़ को बचा ले क्योकि ये चुनोती सबसे बड़ी है जिससे मुख्य्मंत्री भी अनजान नही हाल ही मैं पलायान आयोग अपने आंकड़े सरकार के आगे रख चुका है अब नीतियां बना कर उसे धरातल पर उतारने की जरूरत है क्योंकि इस बढ़ते पलयान पर लगाम लगाने के लिए अभी समय और समय माग रहा है लेकिन बेबसी का पलयान रोका जा सकता है इन  4 सालो  मे बहराल बोलता उत्तरखड़ की पूरी टीम की तरफ से मुख्य्मंत्री त्रिवेन्द्र रावत जी को आगे आने वाले निकाय चुनाव के लिए बहुत सुभकामनाये ओर सीएम त्रिवेन्द्र रावत के विरोधियो को भी बोलता उत्तराखंड की दो टूक की राज्य मैं एक ही मुखिया को रहने दो पूरे 5 साल ताकि राज्य को हो विकास आप सब भी है लायक ओर अनुभवी पर अपनी बारी का करो इंतज़ार अभी मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत को करने दो काम काज
क्योकि लाजमी सी बात है सरकार पर हमला विपक्ष करता रहेगा और करना भी चाइए आखिर वो विपक्ष की भूमिका मैं  है पर सिर्फ बोलकर नही उदहारण ओर सबूत के साथ सिर्फ सवाल खड़ा कर काम नही चलेगा क्योकि जनता अब सब जानती है साथ ही राज्य सरकार भी राज्य हित मे आगे भी निर्णय लेती रहे और समय समय पर विपक्ष की कही गयी जनहित की बातों को भी साथ लेकर चले क्योकि सियासत अपनी जगह है और राज्य का विकास अपनी जगह अब 9 नवम्बर को राज्य पूरे 18 साल का हो जाएगा ओर जनता अभी से यही कहने लगी है कि विकास पर सियासत को हावी मत होने दो बहुत हुवा अत्याचार अब सिर्फ विकास और विकास वो विकास जो संतुलित हो जय उत्तराखंड