अब समझ में आ रहा है कि क्यों त्रिवेंद्र को कुर्सी से हटाना चाह रहे ये लोग !

सूबे में त्रिवेन्द्र रावत की सरकार 18 मार्च 2017 को बनी, किसी को भी ये अंदाजा नहीं था कि त्रिवेन्द्र रावत ही प्रदेश के मुख्यमंत्री होंगे. लेकिन त्रिवेन्द्र रावत पर भरोसा जता कर बीजेपी आलाकमान ने त्रिवेन्द्र को उत्तराखंड की कुर्सी सौंपी. खैरासेण का लाल और उत्तराखंड के पुत्र त्रिवेन्द्र रावत ने मुख्यमंत्री बनते ही सबसे पहले अपनी प्राथमिकता में जीरो टोलरेंस की नीति को सबसे उपर रखा

यानि भ्रष्टाचार से कोई समझौता नहीं और इसी नीति को लेकर त्रिवेन्द्र रावत लगातार काम भी कर रहे हैं अब सरकार का एक साल का कार्यकाल पूरा होने वाला है ऐसे में कोई भी त्रिवेन्द्र रावत पर या सरकार पर ये आरोप नहीं लगा सकता कि राज्य में पिछले एक साल में कोई भी  भ्रष्टाचार हुआ है .अब जाने कि आखिर क्यों वो लोग नहीं चाहते की त्रिवेन्द्र मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बरकरार रहे.

आप जानते है कि राज्य के अन्दर का भ्रष्टाचार का शोर 2017  तक अपने परवान पर था उस समय तक किस नेता ने किस नेता पर आरोप नहीं लगाये और किसने नौकरशाही पर सवालिया निशान नहीं उठाये . ये तो सब जानते हैं कि सूबे के पर्वतीय इलाकों में उतना विकास नहीं हुआ जितना वहा से चुनाव लड़ने वाले नेताओं का हुआ और राज्य के नौकरशाहों का भी .. इस बात से आप भी इनकार नहीं कर सकते हैं अब त्रिवेन्द्र रावत जब जीरो टोलरेंस की नीति के साथ काम कर रहे हैं और भ्रष्टाचार को ख़त्म कर रहे हैं तो ऐसे तमाम वो नेता हैं जिनतक कमीशन अब पहुंचनी बंद हो गयी है ऐसे तमाम वो व्यापार जगत के लोग हैं जिनके नवाबो वाले शौक के लिए अब पैसा नहीं है. कारण साफ़ है त्रिवेन्द्र न ख़ुद खा रहे हैं और ना ही किसी को खाने दे रहे हैं

अब ऐसे में उनके कुनबे के लोग प्रदेश में भरे पड़े हैं और जाहिर सी बात है जब परिवार बड़ा होगा तो हर कोई त्रिवेन्द्र का शुभचिंतक नहीं होगा क्योंकि त्रिवेन्द्र रावत ने सेटिंग-गेटिंग,जुगाड़ की सिफारिश, भाई-भतीजावाद और चमचागिरी पर विराम लगाया है ये बात अलग है त्रिवेन्द्र के आगे पीछे कुछ लोग आये दिन दिखते हैं लेकिन ये वो लोग सिर्फ फोटो वाले नेता हैं  काम के नहीं, ये बात मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत बखूबी जानते हैं.अब आप समझ रहे हैं ना कि वो लोग त्रिवेन्द्र को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत नहीं रहने देना चाहते हैं जिनके के सारे रास्ते बंद हो गये हैं सूत्र तो यहाँ तक बताते हैं क्या नौकरशाह और क्या नेता ये सब सी एम से परेशान हैं क्यूंकि सीएम के साथ इनकी दाल नहीं गल रही है किसी को कुछ खाने को नहीं मिल रहा है बहरहाल हम तो यही कहेंगे कि त्रिवेन्द्र रावत के एक साल के कार्यकाल पूरा होने पर उनकी घोषणाओं को लेकर लोग सवाल उठाएंगे कोई कहेगा काम ही नहीं हुआ पिछले एक साल में, तो कोई ये भी कहेगा त्रिवेन्द्र की अपने मंत्रियों के साथ नहीं बनती है और कुछ ख़ास और त्रिवेन्द्र से परिचित लोग ये भी कह देंगे कि त्रिवेन्द्र रावत के चहरे पर मुस्कान नहीं दिखती है और ना ही वो ठीक से बात करते हैं

पर खबरदार कोई भी ये नहीं कह सकता कि त्रिवेन्द्र रावत के एक साल के कार्यकाल में कहीं से भी भ्रष्टाचार की बू आयी.यही वजह है कि आलाकमान को सिर्फ त्रिवेन्द्र ही पसंद है.बाकी रही एक साल के विकास के कामकाज की तो उसकी पूरी सटीक पड़ताल के साथ हम आपके बीच 18 मार्च को फिर आयेंगे.

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