सीएम को लग रही है मां की बद्दुआ ! संभल जाओ साहब कहीं देर न हो जाए

सूबे के मुखिया त्रिवेंद्र रावत जहां भी जा रहे हैं..  आजकल यही  कह रहे हैं कि डबल इंजन की नहीं ट्रिपल इंजन की सरकार है साहब…. अब हर तरफ विकास ही विकास…  सबको लेकर चलेंगे हम साथ साथ.. नहीं दिखेगा कहीं भी भ्रष्टाचार क्योंकि जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है उनकी सरकार …

ख़ामोश ये शब्द जनता को सूबे के सीएम भले ही कह रहे हों, लेकिन एक मां की बद्दुआ त्रिवेंद्र रावत को लग रही है! ये मां लाचार है और गुस्से में भी ये कह रही है कि किस बात की जीरो टॉलरेंस, किस बात का बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा, आप मुख्यमंत्री के साथ साथ स्वास्थ महकमें के मंत्री भी हो, फिर क्यों मुझे इंसाफ नहीं मिल रहा है ? कहां गया आपका जीरो टॉलरेंस मैं आपकी चौखट से लेकर जनता  दरबार तक फरियाद लगा चुकी हूं…  धरने पर बैठ चुकी हूं। मुझे नजर नहीं आता आपका जीरो टॉलरेंस। इसलिए आप खामोश रहें।

आपको समझाते हैं मामला क्या है।

दरअसल पीड़ित कुमकुम पत्नी दुष्यंत कुमार सैनिक कॉलोनी कोलागढ़ देहरादून की रहने वाली हैं। और जब कुमकुम गर्भअवस्था में थी तो उस दौरान चिकित्सीय परामर्श व इलाज डॉ अर्चना लूथरा की देखरेख में किया जा रहा था। 14 नवंबर 2016 को डॉ अर्चना लूथरा द्वारा ट्रिपल टेस्ट करवाने के लिए कुमकुम को कहा गया। जिसकी रिपोर्ट 30 नवंबर 2016 को डॉ अर्चना लूथरा को कुमकुम ने दिखाई, जिसमें डॉ के द्वारा हाई रिस्क रिपोर्ट को लो रिस्क लिखकर गर्भावस्था जारी रखने को कहा गया। जिसका परिणाम ये हुआ कि 22 अप्रैल 2017 को कुमकुम की डाउन सिण्ड्रोम ग्रसित पुत्री का जन्म हुआ। जो कि एक लाइलाज बीमारी है बस यहीं से एक मां ने अपनी बेटी की परवरिश के साथ साथ बेड़ा उठाया डॉक्टर अर्चना लूथरा को सबक सिखाने का देहरादून के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को इसकी शिकायत की गई जांच बैठी और जांच रिपोर्ट में अर्चना लूथरा को दोषी पाया गया। बस तब का दिन है और आज का दिन डॉ अर्चना लूथरा पर आजतक कार्रावाई नहीं की गई । कुमकुम और उसका पूरा परिवार सीएम तक मामले को पहुंचा चुका है, हर बार बीजेपी कार्यालय में लगने वाले जनता दरबार में भी मंत्रियों के आगे गिड़गिड़ा चुका है कि हमें इंसाफ चाहिए। अर्चना लूथरा के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई अबतक, नौबत तो ये तक आ गई कि कुमकुम अब बीजेपी कार्यालय के बाहर अपने ससुर के साथ धरने पर बैठ गई। लेकिन अभी तक उसे इंसाफ नहीं मिल रहा है। अब सवाल उठता है कि क्या डाॅक्टर अर्चना लूथरा का क्या कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता.. या डॉ अर्चना लूथरा ने कुछ लोगों को  खरीद लिया है, मामला जो भी हो लेकिन  आज राज्य में त्रिवेंद्र रावत की सरकार है। और मुखिया खुद स्वास्थ के मंत्री हैं लिहाजा सीएम साहब आपको जीरो टॉलरेंस नीति की भांति इंसाफ महिला को दिलाना होगा। क्योंकि महिला पीएम साहब तक भी पत्र भेज चुकी है। कहीं फिर ऐसा न हो जाए कि पीएम की फटकार आपको लगते देर न लगे।

 

 

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