फ्रंटफुट पर बैटिंग करते त्रिवेन्द्र, सरकार के दमदार 2 साल

कांग्रेस की कमजोर गेंदबादी और क्षेत्ररक्षण से सिक्सर पर सिक्सर लगाते त्रिवेन्द्र

देहरादून। त्रिवेन्द्र सरकार के 2 साल पूरे होने को हैं। इन 2 सालों में सरकार ने जनहित से जुड़ी कई योजनाओं पर अपनी मुहर लगाई है। खासतौर से पर्वतीय महिलाओं की आर्थिकी मजबूत करने में त्रिवेन्द्र सरकार का खास फोकस रहा है। अपने ब्लाग और बयानों के जरिए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इसको जाहिर भी किया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने ब्लॉग पर पिरूल से ऊर्जा उत्पादन की नीति को स्थानीय लोगों खासतौर पर महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने का जरिया बताया। मुख्यमंत्री ने ब्लॉग में लिखा कि अमूल्य वन संपदा से भरपूर उत्तराखंड के जंगल अब आय का जरिया बनने के साथ ही बिजली उत्पादन का साधन भी बनेंगे। राज्य में कुछ समय से चीड़ के जंगल तेजी से बढ़ रहे हैं। राज्य में चार लाख हेक्टेयर वन भूमि में 16.36 फीसद में चीड़ के वन हैं। चीड़ की पत्तियां सूखने पर पिरूल कहलाती हैं। गर्मियों के दिनों में यही पिरूल वनाग्नि का कारण बन जाता है।

सरकार चीड़ की पत्तियों का सदुपयोग करेगी। इससे हर साल 150 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य है। इस बिजली के उत्पादन को राज्य में 6000 इकाइयां स्थापित करने की योजना है। इन इकाइयों की स्थापना पर करीब एक लाख रुपये प्रति किलोवाट की लागत आती है। 25 किलोवाट तक इकाइयां लगाने पर 25 लाख रुपये का संभावित खर्च बैठेगा। इसमें एमएसएमई नीति के तहत अनुदान व केंद्र सरकार की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे केंद्रीय अंशदान सब्सिडी के रूप में संबंधित इकाई को प्राप्त होगा।

25 किलोवाट क्षमता की इकाइयों को प्रति वर्ष करीब एक लाख 40 हजार यूनिट बिजली और करीब 21 हजार किलो चारकोल उत्पादन होगा। इसे बेचने पर करीब 9.3 लाख रुपये की आमदनी प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि पिरूल नीति से महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण और रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी। पिरूल संयंत्र तक जंगलों से पिरूल जमा करने के लिए वन पंचायत स्तर पर महिला मंगल दलों को इसकी जिम्मेदारी दी जाएगी। महिला शक्ति को विश्वास दिलाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह मन, वचन और कर्म से महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में दिन-रात जुटे हुए हैं। पिरूल नीति भी अलग आयाम से राज्य के विकास में कारगर साबित होगी।

 

उत्तराखंड में खुलेगी नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी खोली जाएगी। प्रदेश को क्वालिटी एजूकेशन हब बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम होगा। देहरादून के रानीपोखरी में लगभग 10 एकड़ भूमि में इसकी स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि उनका उत्तराखंड से विशेष लगाव है। विधि क्षेत्र में कैरियर बनाने के इच्छुक युवाओं को नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के बनने के बाद बेहतर अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि डोईवाला में सीपैट की न केवल स्थापना की जा चुकी है, बल्कि उसमें कक्षाएं भी संचालित की जा रही हैं। इस समय देश में 21 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी हैं, जिनमें क्लेट के माध्यम से प्रवेश मिलता है। इनमें स्नातक व स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं।
उत्तराखंड में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी रोजगारपरक शिक्षा में मील का पत्थर साबित होगी। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की है कि राज्य में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की स्थापना से प्रदेश के साथ ही देशभर के प्रतिभावान छात्र-छात्राएं यहां आएंगे। इससे यूनिवर्सिटी के निकटवर्ती क्षेत्रों की आर्थिकी को भी फायदा होगा। प्रदेश सरकार उत्तराखंड को एजूकेशन व टूरिज्म हब बनाना चाहती है। इसमें केंद्र सरकार का भी पूरा सहयोग मिल रहा है।




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