छुई छुयाल मे पहाड़ की बात

 

“मेरा डांडी काँठ्यूं का मुलुक जैलू ,
बाँझी पुंगड्यूं थैं देखी की एैई,
उजडीं कूड्यूं भी देखी कि एैई !

मेरा डांडी काँठ्यूं का मुलुक जैलू ,
बाँझी पुंगड्यूं थै देखी की एैई !!

“हैरी सार्यूं मा सुंगरू का छोरा,
दोफरी पुंगड्यूं थैं खैंडणा होला !
गौं गौं खोलों मा बन्दरू का छोरा,
धुरपल्यूं थै उज्यडणा होला !
उखि फुन्डैं होली क्वी पठली रडीं त,
धैरी सकली त धै री की एैई,
उजडीं कूड्यूं भी देखी कि एैई !

मेरा डांडी काँठ्यूं का मुलुक जैलू ,
बाँझी पुंगड्यूं थै देखी की एैई !!

“अबत गौं मा क्वी पुछणूं भी नीचा,
हैरी सारी मा भंगुलू जम्यूं चा !
मनखी जू छीं गौं मा बूड-बुड्या छीं,
ऊंमा भी भारी अलगस हुयूं चा !
मैंगी व्हेगे दुकानी मा राशन,
बूति सकली त बूति कि एैई !
बाँझी पुंगड्यूं थै देखी की एैई !!

मेरा डांडी काँठ्यूं का मुलुक जैलू ,
उजडीं कूड्यूं भी देखी कि एैई !!
बाँझी पुंगड्यूं थै देखी की एैई !!

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