चार रावतो के बाद भी हाल बेहाल, पानी को तरसता मेरा पहाड़

यमकेस्वर से भगवान सिंह नेगी कि रिपोर्ट

खबर पानी की किलत की हैं और बात जल संस्थान कोटद्वार क्षेत्र के अन्तर्गत यमकेश्वर विधान सभा के कांडाखाल,बड़ेथ और आस-पास के गांवों में गर्मियां शुरू होने के साथ ही पेयजल की किल्लत की है स्थिति यह है कि लोग पेयजल के लिए भटक रहे हैं, लेकिन उन्हें पीने के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों ने जल संस्थान के अधिकारियों से पेयजल की आपूर्ति सुचारू करने की मांग उठाई है
आपको बता दे कि जल संस्थान कोटद्वार कि लचर कार्यप्रणाली के चलते यमकेश्वर विधान सभा के दुर्गम गावं कांडाखाल,बड़ेथ और आस-पास के दर्जनो गांवों में गर्मियां शुरू होने के साथ ही पेयजल की किल्लत भी शुरू हो गई है। ग्रामीण अपने हलक कि प्यास बुझाने के लिए कई किलोमीटर कि दूरी तय करने के बाद प्राकृतिक श्रोत से पानी लाने को मजबूर है। इस बार बारिश कम होने के कारण अधिकांश पेयजल स्त्रोत सूख चुके हैं और गांव में बनाई गई पेयजल योजना से जुड़े नलों में कई दिनों से पानी की आपूर्ति नहीं हो पाई है। स्थिति यह है कि गांवों में निवास कर रहे 70 साल के वृद्ध और महिलाओं को पेयजल के लिए कई मील की दूरी तय कर पानी लाने को मजबूर होना पड़ रहा है। 

वही ग्रामीणों का आरोप है कि जल संस्थान अब तक पेयजल योजना के नाम पर 84 लाख रूपए खर्च कर चुका है, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। स्थिति यह है कि पेयजल लाइन के पुराने पाइप तक लापता हो चुके हैं। इस संबंध में कई मर्तबा शिकायत करने के बावजूद आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। शिकायत के बाद जिला स्तरीय अधिकारी निरीक्षण के लिए आए, लेकिन संबंधित ठेकेदार से फोन पर बात करने के बाद खानापूर्ति कर वापस चले जाते है। ग्रामीणों का आरोप है कि पेयजल की समस्या नहीं बात नहीं है सन् 1985 के बाद से ही बड़ेथ और आस-पास के गांवों में पेयजल की किल्लत बनी हुई है, लेकिन क्षेत्रीय विधायक और मंत्री अपनी राजनीति चमकाने के लिए यहां शराद और बर्सी खाने को आते हैं और वोट लेने के बाद समस्या की अनदेखी करते हैं।ग्राम प्रधान सहित जल संस्थान के अधिकारियों को कई मर्तबा इस संबंध में अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। गर्मियों के शुरूआती दिनों में ग्रामीणों को पेयजल से जूझना पड़ रहा है तो जून में जब भीषण गर्मी पड़ेगी तब उनका दिकत कैसे दूर होगी गाँव के लोगो ने चेतावनी दी कि यदि गांव में पेयजल की आपूर्ति सुचारू नहीं की गई तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।    
आपको बता दे कि -विधानसभा यमकेश्वर का कांडाखाल क्षेत्र के ऐसे दर्जनों गांव हैं, जहां फरवरी माह से जून माह तक जो कि मांगलिक कार्यो के लिए उत्तम माना जाता है, लेकिन बावजूद इसके इस इलाके में मांगलिक कार्य इसलिए आयोजित नहीं होते हैं, क्यों यहां फरवरी से जून तक पेयजल की किल्लत बनी रहती है। राज्य निर्माण के 17 वर्षो बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। जबकि यहां से भाजपा लगातार सत्ता पर काबिज रही है, जिसमें तीन बार विजया बड़थ्वाल जो कि मंत्री भी रह चुकी है चुनी गई। इसके अलावा इस बार मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूडी की उत्तराधिकारी रितु खंडूडी विधायक है, लेकिन बावजूद इसके इस पिछड़े क्षेत्र की सुध लेना वाला कोई नहीं है ये तो सिर्फ यमकेस्वर विधानसभा के एक जगह की बात हैं जब कि हकीकत ये हैं कि ये पूरा इलाका पानी के लिए प्यासा हैं और ओर यही यूपी के सीएम योगी का गाँव पंचुर भी हैं जहां उनके माता पिता जी आज़ भी गाँव में ही रहते हैं इस गाँव में भी पानी की किलत हैं ओर सड़को पर लगे हेड पम्प की बात की जाय तो दर्जनों खराब हो चुके हैं तो कही सुख गए हैं नीलकंठ से लेकर देउली , विथायनी ,कस्यली , उढ़ा, पौखाल , जगह के बीच में पढने वाले सभी गांवों की जनता पानी के लिए प्यासी रहती हैं लेकिन इनकी प्यास भुझाने वाला कोई नही अगर विकास के लिहाज से बात की जाय तो ये विधान सभा सबसे पिछड़ी मानी जाती हैं और यदि सर्वे किया जाय तो यहां से पलयान करने वालो की सख्या लगतार बढ़ रही हैं क्योंकि ना यहा प्रयाप्त पानी हैं ना अछे स्कूल और ना अस्पताल बस यहा की जनता कोटद्वार देहरादून ,ओर ऋषिकेश पर निर्भर हैं ताजुब की बात तो ये हैं कि ये जगह राज्य की अस्थायी राजधानी से महज 70 किलोमीटर दूर हैं अगर ऋषिकेश की तरफ से देखा जाए तब भी विकास और मूलभूत सुविधाओं से आज भी अनजान हैं यहा के लोग जबकि इसी तरफ नीलकंठ भगवान का मंदिर , यमकेस्वर महादेव , महाबगड देवात, का मंदिर विराजमान हैं और यही से आगे चलकर भेंरोगड़ी का मंदिर , ताड़केस्वर , हनुमानगढ़ी , माँ जव्लाप देवी का मंदिर और फिर सिद्धबली जी का मंदिर इस रास्ते से चलकर पड़ता हैं ओर यही से लोग जाते हैं कर्णआश्रम लेकिन हैरानी की बात ये हैं कि आज तक पर्यटन विभाग ने इस ओर कोई खास योजना नही बनाई ताकि यहा की विकास हो सके और यहा की लोगो को रोजगार के साथ जोड़ा जा सके बस सब खाना पूर्ति करते नज़र आते हैं अब नज़रे टिकी हैं सतपाल महाराज ओर राज्य के मुखिया त्रिवेन्द्र रावत पर क्योकि इन बड़े नेताओं का वजूद कहे या इनकी जड़े भी यही से जुड़ी हैं आज़ दोनों बड़े नेताओं के पास मौका हैं यहां के लोगो की दिकतो को दूर करने का ओर साथ मिलेगा उत्तरप्रदेश के सीएम योगी जी का भी मंत्री हरक सिंह रावत ने भी यहा कि जनता के साथ काफी वादे किए हैं अब उन वादों को पूरा करने का सही समय आगया हैं क्योंकि आपको हम बता दे कि यमकेस्वर , चोबटाखाल ,लैंसडौन विधानसभा का आपस में टच हैं और अगर यहा से जीत कर सता में आये नेता मिलकर कुछ यहा की जनता के लिए नही करते तो फिर ये यहा की जनता के लिए सबसे बड़ा दर्द होगा फिलहाल उम्मीद करते है। कि डबल इज़न यहा विकास का करंट छोड़कर विकास के काम काज करेगी ओर सबसे बड़ी बात यही हैं  कि यहा चार  चार रावतों    का गढ़  होने  के बाद ।। भी ।     हाल    बेहाल है

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