सीएम त्रिवेन्द्र ने बहाया पसीना इनको दिखा जुमला ओर बात पहाड़ की

डबल इज़न की सरकार के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने खूब अपना पसीना निकाला है दिल्ली से लेकर मुंबई और सिंगापुर तक त्रिवेंद्र सरकार इन्वेस्टर्स मीट के तहत रोड़ शो से निवेशकों को रिझाने की कोशिश कर रही है

तो पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को ये सब जुमला नज़र आता है उनके अनुसार राज्य मे जमीन ही नही है तो उधोग कहा लगेंगे जो जमीन थी उन पर पहले से ही उनकी सरकार के दौरान बहुत से कामो का चयन किया जा चुका है जिसे त्रिवेन्द्र सरकार आगे बढ़ाने को तैयार नही ।
तो कुछ राज्य के लोगो मे सवाल भी आ रहा है कि क्या इन्वेस्टर पहाड़ चढ़ पाएंगे? आपको मालूम ही है कि राज्य 50 प्रतिशत से अधिक
भू-भाग पर्वतीय है और यहां की जनंता लगातार रोजगार और मूलभूत सुविधाओं के नया होने के कारण पलायन कर चुकी है ओर पलायन जारी है । 

जानकारी अनुसार पर्वतीय क्षेत्रों में लगे उद्योग अब दम तोड़ रहे है तो कुमाऊं के लिहाज से बड़े उद्यम की दृष्टि से एचएमटी रानीबाग इकाई आज अपना अस्तित्व खोती जा रही है. पहाड़ों पर उद्योगों के हिमायती विकास पुरुष कहे जाने वाले एनडी तिवारी को नहीं भुलाया जा सकता. कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में गिने जाने वाले पूर्व सीएम एनडी जब केंद्र में उद्योग मंत्री रहे उन्होंने पहाड़ों पर उद्योग की परिकल्पना साकार की थी. इसी के तहत भीमताल में 107 एकड़ में औद्योगिक घाटी बनी.

फिर 1982 में तत्कालीन उद्योग मंत्री नारायण दत्त तिवारी ने एचएमटी की नींव रखी और 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इसका उद्घाटन किया. बता दें कि 1970 से 80 के दशक में 65 औद्योगिक घरानों ने यहां के लिए रुचि दिखाई. हालांकि उद्योग करीब 24 ही स्थापित हुए. वहीं कुमाऊं के बड़े उद्योगों में गिनी जानी जाने वाली एचएमटी कंपनी की रानीबाग इकाई आज दम तोड़ चुकी है. जिसने कई लोगों को रोजगार से जोड़ा था.
1986 में नैनीताल जनपद के बेरीपड़ाव में पैकेजिंग पोलेस्टर फिल्म निर्माता जलपैक इंडिया कंपनी की स्थापना की गई थी.
जिसके बाद कुशल प्रबंधन व कर्मचारियों के अथक मेहनत के बल पर कंपनी में बनने वाले बेहतर क्वालिटी के उत्पाद को अमेरिका, इंग्लैंड, पाकिस्तान, नेपाल समेत अन्य देशों में पसंद किया जाने लगा था. एक साल तक जब कर्मचारियों का वेतन, बैंक का लोन, विद्युत बिल जमा ना होने से 22 अगस्त 2014 को कंपनी को सीज कर दिया गया. कंपनी के बंद होने से 122 कर्मचारियों के अलावा ठेकेदारी व अन्य अप्रत्यक्ष रूप से जुडे़ लोग बेरोजगार हो गए.
वहीं ऋषिकेश स्थित आईडीपीएल अपनी आखिरी सांसें गिन रही है. एंटी बायोटिक दवाएं बनाने वाली आईडीपीएल कंपनी सेंट्रल केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स मिनिस्ट्री का उपक्रम था. वर्ष 1962 में यहां की 899.53 एकड़ भूमि 99 साल के पट्टे पर दी गई थी. वहीं पिथौरागढ़ जिले के चंडाक में अस्सी के दशक में स्थापित झुनझुनवाला की मैग्नेसाइट एवं मिनिरल्स फैक्ट्री वर्ष 2000 आते-आते यह फैक्ट्री भी बंद हो गई. जिससे कई लोग बेरोजगार हो गए.
वही इन्वेस्टर्स मीट कार्यक्रम को लेकर उत्तराखंड सरकार काफी उत्सुक है. ओर लगातार मुख्य मंत्री ने अपना पसीना बहाया है
सीएम त्रिवेन्द्र रावत ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में लगी हुई है. पीएम मोदी जी ने खुद इस कार्यक्रम मे शिरकत करनी है ।लेकिन फर बात यही निकलकर आती है कि क्या निवेशक पहाड़ चढ़ पाएंगे, जिससे पहाड़ में तेजी से हो रहे पलायन और बढ़ती बेरोजगारी कम हो पाएगी? या     सरकार सबसे पहले पहाड़ी जिलो मे हर प्रकार की मूलभूत सुविधाओं से पहाड़ को लैस करेगी।
सीएम त्रिवेन्द्र रावत की मेहनत रंग लाये इसके लिए हम भी सुभकामनाओं के साथ उनके साथ खड़े है इस उम्मीद के साथ कि उधोग पहाड़ तक जरूर चढ़े । पहाड़ का पानी और जवानी अब सिर्फ जुमला बन कर ना रहे हकीकत मे इसमे अब अमल हो ।  यही उम्मीद डबल  इज़न  की   सरकार से हमको  है ।

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