सीएम त्रिवेन्द्र रावत जी ये काम आप कर दो तो आगे पूरे 4 साल तक बने रहोगे मुख्यमंत्री ,मिलेगी दुवा और आपके विरोधी होगे धाराशायी !!

राज्य के मुख्यमंत्री जी , पर्यटन मन्त्री सतपाल महाराज , वन मंत्री हरक सिंह रावत , पेयजल मंत्री प्रकाश पंत जी ,m.l.a दलीप रावत , ओर जर्नल खंडूरी की पुत्री m.la रीतू खंडूरी आप सबकी जानकारी मै है कि नयार नदी से पानी को अपलिफ्ट करके द्वारीखाल और जयहरीखाल ब्लाॅक के सैकड़ों गांवों तक पानी पहुंचाने की इस योजना की जमीनी हकीकत यह रही है कि पानी को स्टोर करने वाले लाखों की कीमत से बनाए गए टैंकों में भी दरारे पूरी तरह पड़ने लगी है, जबकि अभी तक इन टैंकों तक पानी पहुंचा ही नहीं है

आप सबको मालूम है कि पेयजल के संकट को देखते हुऐ वर्ष 2006 में भैरोगड़ी पमिंग योजना पर करोड़ों रुपए की लागत से काम शुरू किया गया था लेकिन अफसोस 12 साल गुजर जाने के बावजूद इस योजना के नालों से एक बूंद पानी तक नहीं टपका है, जिसके चलते ग्रामीणों के साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों में भी भारी आक्रोश समय समय पर रहा है
भैरवगढ़ी पेयजल पम्पिंग योजना की सुस्त चाल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके कार्य में लगे ठेकेदार काम बीच में ही छोड़ कर महीनों तक गायब रहे , जिसके चलते कार्य प्रगति में बाधा कई बार उत्पन्न होती रही योजना तो आज तक पूरी बन कर अमिलजाम पहनाकर इसे धरातल पर नही उतारा गया पर इस योजना के लाभ के लिए
पर्यटन नगरी लैंसडाउन छावनी परिषद को भी इस योजना से जोड़ दिया गया ओर समय पर इसके लिए केन्द्र सरकार ने अलग से करोड़ो रुपये इस योजना के लिए अवमुक्त किए है.          

पूर्व विधायक विजय बड़थ्वाल ने कहा भी कभी कहा था कि इस योजना को वर्ष 2008 त क बन जाना चाहिए था लेकिन धन की कमी और ठेकेदारों की मनमानी के चलते यह योजना कही बार अधर मे लटकी रही इन 12 सालो मैं। राज्य मैं 4 मुख्य्मंत्री आये बने और बदले गए पर ये योजन परवान ना चढ़ सकी हरक सिंह रावत भी अपना वादा पूरा ना कर सके दलीप रावत सिर्फ धरना पर्दशन तक सीमित रहे ,सतपाल महाराज भी पूरी बन जाएगी योजना घर घर आएगा पानी सिर्फ बोलते ही रहे ,तीरथ सिंह रावत भी कुछ ना कर सके , पिछली सरकार के दौरान पेय जल मंत्री रहे मंत्री प्रसाद नैथानी टरकाते रहे , ओर इन सब पर अगर किसी की नज़र थी तो वो गाँव वालों से ज्यादा भेरो बाबा की क्योकि भेरो बाबा देख रहे है कि मेरे नाम से आरंभ होन वाली योजना आज तक भी पूरी नही हो पाई हा ये योजना अगर इंदिरा ग़ांधी के नाम पर होती , या ग़ांधी परिवार के नाम पर ,या फिर पंडित दीनदयाल के नाम पर या अटलबिहारी जी के नाम पर ,स्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर ,भीमराव अंबेडकर के नाम पर होती तो स्याद कब की पूरी हो जाती क्या भगवान सबकुछ देखता नही है ?? क्या ये नेता भगवान को मानते नही है जी नही मानते है पर टाल जाते है कि क्या इनको करना था समय पर ओर क्या नही कर पाए पौड़ी गढ़वाल मैं गुमखाल से आगे चलकर 7 किलोमीटर दूर केतुखाल से आरंभ होती है भेरो बाबा के मंदिर की चढ़ाई ओर मान्यता है कि भेरो बाबा के इस मंदिर मे जो भी आया बाबा ने उनकी मनोकामना पूर्ण की है यहा लोग देश से ही नही बल्कि विदेशों से भी आते है और इन्हीं भगवान के नाम पर साल 2006 मै आरंभ की गई थी भेरोगडी पम्पिंग योजना जरा सोचिए जब 2006 मैं पेयजल के हालत नाजुक रहे होंगे तब ही तो इस योजना को लाया गया होगा पर अफ़सोश तब से लेकर आज तक इन 12 सालो मैं सरकार बदल गयी ,मंत्री बदल गए मुख्यमंत्री बदल गए पर ये योजना धरातल पर पूरी ना हो पाई और इस योजना के आरंभ होने के बाद से पानी का लाभ लेने वाले गाँव के लोग आज भी इंतज़ार मैं है कि कभी तो आएगा ये पानी कुछ बुज़ुर्ग तो पानी आने के इंतज़ार मैं दुनिया से ही चले गए भाई 12 साल कम नही होते बड़ा दुख होता है कि ये योजना राजनेताओ की आपसी खिचतान मैं आज भी दम तोड़ रही है मगर भेरो बाबा सब कुछ देख रहे है क्योंकि वो जानते है कि उनके नाम से शरू की गई योजना आज तक पूरी नही ओर उनके आस पास के गाँव के लोग कितने परेशान है बाबा सब जानते है तभी तो वादो ओर दावों करने वालो को मुख्यमंत्री नही बनाया उन्होंने ओर जिसे बनया उसे भी कुर्सी से उतार दिया उदारण के लिए सतपाल महाराज सीएम अभी तक नही बन पाए ,हरक सिंह रावत ने कहा था कि मैं इस योजना को पूरा करुगा ओर उन्होंने ही इसकी नीव रखी थी पर वो भी कुछ नही कर पाए आज तक , दलीप रावत मंत्री भी नही बन पाए ,विजया बड़थ्वाल को टिकट नही मिल पाया t.p s रावत आज है कहा पर खड़े , तीरथ सिंह रावत का टिकट सतपाल महाराज पी गए वरना तीरथ आज राज्य के मंत्री होते , निशक मुख्यमंत्री की कुर्सी से गये , बहुगुणा पर भी दोष लगा वो भी अपनी सीएम की कुर्सी नही बचा पाए , हरीश रावत भी चलते बने ,मंत्री प्रसाद नैथानी आज लापता है , तो मातवर सिंह कंडारी को कोई पूछने वाला भी नही ये सब नाम इसलिए लिए है कि 2006 से लेकर समय समय पर इन सबके हाथ मे पोजिशन थी पावर थी पर कोई भी भेरोगडी पमिंग योजना को पूरा ना कर सका नतीजा गांव के लोग कहते है कि तभी इन नेताओं की मनोकामना पूरी ना हो सकी क्योकि बाबा सब जानते है लेकिन आज एक बार फिर मौका है हरक सिंह रावत के पास ,सतपाल महाराज के पास , दलीप रावत के पास ,प्रकाश पंत के पास ओर राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत जी के पास की वो अपनी सरकार के सहयोगियों के साथ मिलकर जल्द से जल्द भेरो गड़ी पमिग योजना को पूरा कर हज़ारो हज़ार लोगो को गाँव वालों को पेय जल की किलत है मुक्त कराए ओर भेरो बाबा के नाम की योजना जब पूरी होगी गाँव मे पेयजल संकट खत्म होगा तो बाबा का आशीष डबल इज़न की सरकार को मिलेगा मुख्य्मंत्री त्रिवेन्द्र रावत पूरे अगले ओर चार साल राज्य को अपने दिशा निर्देश पर चलाये मुखिया बने रहे पर याद रहे अब भी 2008 मैं बनने वाली योजना 2018 मैं भी जनता की प्यास ना बूझा पाई तो फिर भेरो बाबा ही भला करे सबका बोलता उत्तराखंड कहता है कि है डबल इज़न की सरकार है मुख्य्मंत्री त्रिवेन्द्र रावत जी आप की तरफ देख रहे है वो गाँव के लोग जिनकी प्यास भुजायेगी ये भेरोगडी पम्पिंग योजना और अगर आप भी अब 12 साल बाद इस योजना को धरातल पर ना उतार पाए तो महज इस जगह से 30 से 35 किलोमीटर दूर खेरा सेड के लाल से पुरा आपके गाँव वाले तो मायूस होंगे ही साथ में फिर ये कहेगे की पौड़ी गढ़वाल ने राज्य को एक के बाद एक मुख्य्मंत्री दिए पर वो गढ़वाल के लिए कुछ ना कर सके बोलता उत्तराखंड आपको सुभकामनाओं के साथ कहता है कि आप अपने पर ये दाग मत लगने देना की खेरा सेड का लाल भी भेरो गड़ी पम्पिंग योजना को धरातल पर नही उतार पाया

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