आपको बता दे कि मध्य शिक्षा सत्र के बावजूद भी आपके उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में अब तक लगभग दो लाख बच्चों को किताबें व ड्रेस ही नहीं मिल पाई हैं। ऐसे में बिना किताब के ही बच्चे पढ़ाई करने को मजबूर हैं ओर ये बात कोई और नही कह रहा है  बल्कि इस बात का खुलासा खुद विभागीय जांच में निकलकर सामने आ गया है।
जी हां आपको बता दे कि शिक्षा विभाग के बेसिक एवं जूनियर हाईस्कूलों के बच्चों को समग्र शिक्षा अभियान के तहत मुफ्त स्कूल ड्रेस और किताबें दी जाती हैं। इसके लिए प्रदेश में कक्षा एक से कक्षा पांचवीं तक के 3.99 लाख एवं छह से आठवीं तक के 2.82 लाख बच्चों के डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर योजना के तहत बैंक खाते खुलवाए जाने थे।
बता दे कि योजना के तहत बच्चों के खाते में ड्रेस व किताबों का पैसा सीधे भेजा जाना था। मगर विभागीय जांच में यह बात सामने आयी है कि कुछ जनपदों में बच्चों के खाते नहीं खुले, जहां खाते खुले वहां कुछ बच्चों के खाता नंबर ठीक नहीं थे, खातों से लेनदेन न होने और उनमें न्यूनतम बैलेंस न होने से बैंकों ने धनराशि काट ली गई
वही हालात ये हैं कि अफसरों व बैंकर्स की कारगुजारी के चलते मध्य शिक्षा सत्र बीतने के बाद भी प्रदेश के लगभग दो लाख छात्र ड्रेस व किताबें से वंचित हैं। बता दे कि 17 जुलाई को शिक्षा सचिव आर.मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी विभागीय अधिकारियों ने इस मामले को उठाया, लेकिन मामले का समाधान कहे या हल नहीं हो पाया ।
आपको बता दे कि लाट साहब कहते है कि व छात्र-छात्राओं के बैंक खातों को लेकर मुख्य सचिव की ओर से समस्त जिलाधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं, इसके बाद भी कुछ जनपदों में दिक्कतें आ रही हैं। शिक्षकों को कहा गया है कि संबंधित जनपद के डीएम से मिलकर समस्या का समाधान कराएं। ये कहना है
वंदना गर्ब्याल जी का जो अपर राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा अभियान है
बहराल आगे देखते है कि ओर क्या कुछ निकलकर सामने आता है। और कौन क्या कहता है।
उत्तराखंड में बिना यूनिफॉर्म और किताबों के पढ़ रहे 2 लाख छात्र, विभागीय जांच में खुली पोल





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