तो क्या 2020 तक गंगा हो जायेगी प्रदूषण मुक्त ???

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद सिंह रावत ने आज एक बड़ा ऐलान किया है मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने कहा है कि 2020 तक प्रदूषण मुक्त होगी गंगा। जी हां ये बयान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने आज एक निजी चैनल के कार्यक्रम के दौरान दिया। आपको बता दें कि गंगा की धारा को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए बीजेपी की सरकार लगातार प्रयास कर रही है और नरेंद्र मोदी जब पीएम नही बने थे तब भी उनका ये बयान साफ तौर पर था कि मुझे मां गंगा ने बुलाया है और गंगा को हम प्रदूषण मुक्त करके ही रहेंगे उसके बाद नरेंद्र मोदी जी भारत के प्रधानमंत्री बने और तबसे लेकर लगातार इस पर प्रयास किए गए है और आज भी किए जा रहे हैं   लेकिन हम एक बात जानते है कि गंगा की सफाई के नाम पर करोड़ों रूपये पानी की तरह बहाया जा रहा है। लेकिन गंगा में गंदगी कम नही हुई । गंगा सफाई के नाम पर करोड़ो रूपये के वारे न्यारे कर दिए गए लेकिन गंगा मैली की मैली ही है। अब ऐसे में त्रिवेंद्र रावत सरकार का ये बड़ा बयान निकलकर आया है कि गंगा प्रदूषण मुक्त होगी। लेकिन हम आपको बता दें कि गंगा का पानी कभी खराब नही होता ये बात अब सिर्फ किवदंती ही बन कर रह गई है। गंगा अपने पहले मैदानी तीर्थस्थान ऋषिकेश से ही प्रदूषित हो रही है गंगा के लगभग 2525 मीटर लंबे सफर में ऋषिकेश पहला पडाव है यहां नालों और सीवर के पानी से गंगा में प्रदूषण शुरू हो जाता है।              कुछ साल पहले तक त्रिवेणी घाट में सरस्वती नदी गंगा में मिलती थी जो अब विलुप्त हो चुकी है जिसकी जगह सरस्वती नाले ने ले ली है ।जिसमें पूरे शहर की गंदगी को बहाया जाता है। जो आगे चलकर गंगा में मिल जाती है यही नही अगर हम बात करें गंगा किनारे की बस्तियों की तो इन बस्तियों में शौचालय तक नही है इसलिए ये गंदगी भी कही ना कही गंगा में ही जाकर गिरती है। बाकि पर्यटन व्यवसाय़ पर अगर हम फोकस करें तो ऋषिकेश में लगातार होटल आश्रम धर्मशाला बन रहे हैं जिनका ड्रेनेज सिस्टम भी कहीं ना कहीं गंगा में है। प्लास्टिक के उपयोग की बात करें तो ये सीवरेज सिस्टम को चोक करती रहती है। भले ही प्रदेश के मुखिया ने ये बड़ी बात कही हो कि 2020 तक वो गंगा को प्रदूषण मुक्त बना देंगे लेकिन अभी के जो हालात है और इन हालातों में सुधार नही हुआ तो गंगा का पानी सिंचाई के लायक भी नही रहेगा। ऋषिकेश में गंगा प्रदूषण नियंत्रण केंद्र की स्थापना और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की योजनाएं दम तोड़ चुकी है। आपको ये भी बता दें कि साल 2017 में हाईकोर्ट ने हरिद्वार में गंगा में गंदगी बहाने वाले आश्रमों को सील नही करने पर सख्त रूख अपनाया था कोर्ट ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कड़ी फटकार भी लगाई थी और कहा गया था कि गंगा स्वच्छता अभियान में आड़े आ रहे होटल,धर्मशाला,आश्रमों को क्यों नही सीज़ किया गया। यहां तक कि कोर्ट ने गंगा यमुना को जीवित मानव की तरह अधिकार वाली बात भी कहीं थी। कई बार गंगा में प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों पर गाज भी गिरी जिनमें हरिद्वार और उधमसिंहनगर जिले की 13 फैक्ट्रियां शामिल थी। अब तक की अगर बात की जाए तो गोमुख से हरिद्वार तक 490 होटल ,आश्रम और धर्मशालाएं हैं जो गंगा में सीधे-सीधे प्रदूषण की ज़िम्मेदार हैं जिसमें से काफी हद तक सीवरेज प्रदूषण को रोक दिया गया है । बहरहाल मार्च 2018 में गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश समेत गंगा बेसिन में आने वाले 5 राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को केंद्रीय नियंत्रण प्रदूषण बोर्ड ने कहा था कि वह औद्योगिक कचरा बहाने वाली सभी इंडस्ट्री को ये सुनिश्चित कराए कि शिवराज शोधन प्लांट एसटीपी से शोषित शोधित पानी को दोबारा इस्तेमाल करें। गंगा में प्रदूषण रोकने के लिये पीसीबी को आदेश दिया गया था कि
ऐसे उद्योगों को जारी किए गए संचालन की अनुमति में बदलाव करें। गंगा से जुड़े राज्य उत्तराखंड,उत्तर प्रदेश ,बिहार,झारखंड और पश्चिम बंगाल के पीसीबी को ये निर्देश दिए गए थे। अब सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत इस बात को कह रहे हैं कि 2020 तक गंगा प्रदूषण मुक्त हो जाएगी लिहाज़ा सरकार के साथ-साथ आम लोगों को भी सरकार का साथ देना होगा क्योंकि गंगा की सफाई का ज़िम्मा सिर्फ सरकार का नहीं है उस हर नागरिक का है जिसके जीवन में गंगा का महत्व हैंं

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