देहरादून :
उत्तराखंड में बीजेपी की त्रिवेन्द्र सिंह रावत की सरकार के दो वर्ष आज पूरे हो गए इस मौके पर बोलता उत्तराखंड की टीम की तरफ से जीरो टालरेंस वाले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को बहुत बहुत बधाई । इस आशा और उम्मीद के साथ कि सरकार आगामी 3 सालो मै जनता की मूलभूत सुख-सुविधाओं को ओर तेज़ी से सकारात्मक पहल करेगी।
हमारे उत्तराखंड राज्य के पहाड़ी जिलों के अंदर पलायन रुके, गाँव गाँव खुशाल हो, उच्च शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य सेवाएं ओर तेज़ी के साथ पहाड़ चढ़े ओर पहाड़ का कोई भी नागरिक वंचित न रहे। सभी बेरोजगारों को रोजगार मिले, स्वरोजगार से जुड़े।
छोटे छोटे उधोग पहाड़ चढ़े, पहाड़ की भावना गैरसैंंण का आंदोलनकारियों के अनुरूप विकास हो।
हर सड़क से हर गांव को जोड़ा जाए। खैरासैंंण का सूरज पूरे उत्तराखंड के साथ साथ भारत मे चमके अपने द्वारा किये जा रहे विकास को लेकर।
ओर हमारे राज्य के बेरोजगारों के लिए डबल इंजन अब ओर तेज़ी से टॉप गियर में गाड़ी चलाकर उनके लिए दूँगामी नीतियां बना कर रोजगार सृजित करे।
अपने उत्तराखंड का मतलब देहरादून, हरिद्वार, रुद्रपुर, हल्द्वानी ही नही है ये जीरो टालरेंस वाले मुख्यमंमंत्री त्रिवेंद्र रावत जानते है तभी तो अब गैरसैंंण, जखोली, प्रतापनगर, मोरी, जोशीमठ, गरुड़, मुनस्यारी, लोहाघाट, बेरीनाग, कौसानी, यमकेश्वर, से लेकर नीति माणा के अंतिम गाव तक भी प्रयास रत है विकास की किरण पहुचाने के लिए ।
वही पहाड़ पुत्र का लगातार ये प्रयास है कि जो पिछले सालों में हुवा हो वो ना हो मतलब पहाड़ोंं की उपेक्षा पहाड़ी राज्य में न हो। जिसके लिए वो खुद राज्य के अधिकारियों को दिशानिर्देश ओर काम काज का खुद विवरण लेते रहते है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र कहते है कि हमने जो भी वादे जनता से किए थे. इन 2 सालों में हमारी सरकार ने वो सभी वादे पूरे किए है।
ख़ास कर हमारी सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में पूरी तरह से कामयाब हुई है ।ओर ये सच भी है त्रिवेंद्र के राज मे भ्रष्टाचार को लेकर मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही त्रिवेंद्र जीरो टॉलरेंस को नीति से लगातार सरकार चला रहे है।
मुख्यमंत्री कहते है कि उनकी सरकार की प्राथमिकता में राज्य के किसान आरम्भ से ही है किसानों को सस्ते दरों में सरकार ने ऋण उपलब्ध कराया.।
वो भी लगभग 2 प्रतिशत ब्याज पर किसानों को ऋण दिया गया।
ओर अब सरकार किसानों को बिना ब्याज का ऋण उपलब्ध करवा रही है साथ ही किसान समूहों को 5 लाख रुपए तक ऋण भी बिना ब्याज के सरकार दे रही है.
तो प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर सीएम कहते है कि राज्य के पहाड़ी जिलों में डॉक्टरों की कमी को पूरा किया जा रहा है. साथ ही प्रदेश में आपतकालीन सेवा 108 एंबुलेंस के बेड़े में 139 नई गाड़ियां राज्य में उपलब्ध करवाई गई है, इसके साथ ही प्रदेश के 35 बड़े जिला अस्पतालों को टेक्नोलॉजी के जरिए टेलीमेडिसिन, टेलीरेडियोलॉजी, टेली कार्डियोलॉजी और टेली पेथोलॉजी से जोड़ा जा रहा है. जिसमें से 35 में टेलीमेडिसिन और टेली रेडियोलॉजी से जोड़ दिया गया है. एक अस्पताल में टेली कार्डियोलॉजी से जोड़ दिया गया है और अब हम टेली पेथोलॉजी की तरफ बढ़ रहे हैं. ताकि टेक्नोलॉजी के माध्यम से डॉक्टरों की कमी को पूरा किया जा सके. यही नही त्रिवेंद्र सरकार का कहना है कि जिला अस्पतालों में अभीतक डायलिसिस और आईसीयू की व्यवस्था नहीं थी. लेकिन अब अधिकांश अस्पतालों में डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है. त्रिवेंद्र सरकार का लक्ष्य है कि सभी जिला अस्पतालों में आईसीयू का निर्माण किया जा सके।
राज्य मे तीन हाइड्रो प्रोजेक्ट्स के टेंडर निकाले हैं. सोलर प्रोजेक्ट के 800 करोड़ के टेंडर निकाले हैं, चीड़ की पत्तियों से बिजली बनाने के लिये 50 करोड़ के टेंडर निकाले हैं. पलायन रोकने के लिये रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य- ये तीन चीजें ऐसी हैं जिन्हें जितना बेहतर उपलब्ध करा सकें उससे पलायन रुकेगाओर उसी मिशन पर त्रिवेन्द्र सरकार काम कर रही है।

निवेश से बदलेगी तस्वीर –

राज्य में पहली बार इन्वेस्टर्स समिट का सफल आयोजन हुवा रू 01 लाख 24 हजार करोड़ के एमओयू साइन किए गये। इसमें से रू0 40 हजार करोड़ से अधिक के निवेश पहाड़ी क्षेत्रों के लिए किए गए हैं। पहाड़ों पर लघु उद्योगों का विकास किया जा रहा है। बागेश्वर में पहली लीसा फैक्ट्री की शुरुआत हुई है। इसमें से लगभग रू 13 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट जल्द धरातल पर उतरने लगेंगे। इससे 20 हजार रोजगार सृजित होंगे। वही आगे 30 हजार करोड़ रुपए के अन्य प्रोजेक्ट भी धरातल पर दिखाई देने लगेंगे।

राज्य की कैबिनेट ने समय-समय पर राज्य के विकास के लिए नई नीतियों को मंजूर की
राज्य सरकार द्वारा 15 से अधिक क्षेत्रों के लिये मौजूदा नीतियों में संशोधन करते हुये नये क्षेत्रों के लिये भी नीतियां बनायी गयी है, जिनमें मैगा औद्योगिक और निवेश नीति, स्टार्टअप नीति, एम.एस.एम.ई., फिल्म नीति, सूचना संचार प्रौद्योगिक और इलेक्ट्रानिक्स नीति, पर्यटन नीति, मेगा फूड पार्क प्रोत्साहन, आयुष नीति, मैगा टैक्साटाईल पार्क पॅलिसी, सौर ऊर्जा नीति, इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण नीति, एरोमा पार्क नीति, बृहद औद्योगिक पूंजी निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति, जैव प्रौद्योगिकी नीति, चीड़ की पत्तियों व अन्य बायोमास से ऊर्जा उत्पादन, कीडा जड़ी दोहन और विपणन नीति सम्मिलित है। एमएसएमई के तहत उद्योगों की स्थापना के लिये जिलाधिकारियों को अधिकार दिये गये है। इसके भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे है।
विकास दर और प्रति व्यक्ति आय बढ़ी ।
–  प्रदेश की विकास दर और प्रति व्यक्ति आय में बढोतरी हुई है। वर्ष 2018-19 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 2,14,993 करोड़ अनुमानित है। राज्य में अनुमानित आर्थिक विकास दर 2017-18 में 6.82 फीसद थी जो 2018-19 में बढ़कर 7.03 प्रतिशत हो गई है। जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह औसत दर 7.2 प्रतिशत है। वर्ष 2018-19 में उत्तराखंड में प्रति व्यक्ति आय यानि एक आदमी की सालाना कमाई 1,90.284 रुपये है जबकि देश की प्रति व्यक्ति आय 1,25,397 है। हालांकि विकास दर और प्रति व्यक्ति आय में मैदानी जिलों और पहाड़ी जिलों में बहुत फर्क है। सरकार की कोशिश इसी फर्क को पाटने की है।
इसी वजह से पहाड़ों को ध्यान मे रखकर योजनाएं बनाई जा रही है
अटल आयुष्मान योजना बनी लोगों का कवच –
अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना लोगों का रक्षा कवच बनी है। प्रदेश के सभी 23 लाख परिवारों को निशुल्क स्वास्थ्य सुरक्षा सालाना 5 लाख रुपए तक कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की जा रही है।इस योजना में अब तक 11 लाख से ज्यादा गोल्डन कार्ड बनाये जा चुके है। करीब 3 हजार लोगों का निशुल्क इलाज किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 तक जहां राज्य में 17 साल में केवल 1123 डॉक्टर तैनात थे, वहीं हमने 17 महीनों में 1137 नए डॉक्टरों की भर्तियां की है।
26 जनवरी से निशुल्क एयर एंबुलेंस सेवा शुरू कर रहे हैं। दुर्गम क्षेत्रों के लिए यह वरदान साबित होगी। अल्मोड़ा में डायलिसिस सेवा शुरू की गई है, पिथौरागढ़, श्रीनगर, कोटद्वार में जल्द शुरू करने वाले हैं। पहली बार राज्य में टेलीमेडिसिन और टेलीरेडियोलॉजी जैसी आधुनिक तकनीकें लाई गई हैं। आशा कार्यकत्रियों के बकाया भुगतान के लिए रू0 33 करोड़ जारी किए हैं। एएनएम और आशाओं के लिए दुर्घटना बीमा योजना शुरू की है।
अवस्थापना सुविधाओं का किया गया विकास-

चार धाम ऑलवेदर रोड़ का काम प्रगति पर है। साथ ही ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन, टनकपुर रेल लाइन व रुड़क देवबंद रेल लाइन पर जल्द काम शुरू होने वाला है राज्य के विकास में यह मील का पत्थर साबित होगा। राज्य के कोने कोने को सड़क व पुलों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। हम जो भी काम कराते हैं टाइम बाउंड करवा रहे हैं। देहरादून में अटल सेतु और विश्वेसरैया टनल इस बात का उदाहरण हैं। पिछले दो साल में रिकॉर्ड 4270 कि.मी. सड़कों का निर्माण, जबकि 1472 कि.मी. सड़कों का पुर्ननिर्माण हुआ 2022 तक 355 पुलों का निर्माण का लक्ष्य है, 155 पुलों के निर्माण की स्वीकृति दी जा चुकी है। टिहरी का बहुप्रतीक्षित डोबरा चांठी पुल का निर्माण अगस्त 2019 तक पूर्ण हो जाएगा। इसके लिये 87 करोड की धनराशि स्वीकृत की गई है।
आजादी के 71 साल बाद सीमांत गांवों में पहुंची बिजली
आजादी के 71 साल बाद सीमांत गांवों में बिजली पहुचायी गयी है। सौभाग्य योजना के अधीन 246 गांवों को बिजली पहुंचाई गई, जबकि दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना से 94 गांव बिजली से रोशन हुए हैं। प्रदेश के लोगों को सस्ती हवाई सेवाओं का तोहफा मिला है। अब देहरादून से पिथौरागढ़ और पंतनगर मात्र एक घंटे की दूरी पर रह गए हैं। देहरादून से 23 शहरों तक सीधी उड़ान सेवाएं शुरू की गई है। कनेक्टिविटी के साथ ही रोपवे निर्माण में काफी प्रगति की है।
सुरकंडा देवी तक रोपवे निर्माण लगभग पूर्ण हो गया। पूर्णागिरी मंदिर तक भी रोपवे निर्माण चल रहा है। इसके अलावा मसूरी, केदारनाथ को भी रोपवे से जोड़ा जा रहा है। 42 वर्षों से लम्बित लखवाड़ बहुद्देशीय परियोजना के लिये एमओयू पर विभिन्न राज्यों द्वारा हस्ताक्षर किये जा चुके है। इससे 300 मेगावाट विद्युत प्रदेश को मिलेगी। रेणुका बांध पर भी एमओयू किया जा चुका है।
है।

खेती के साथ साथ पशुपालन, मत्स्यपालन को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। दुग्ध संघों को 4 रुपए प्रति लीटर की प्रोत्साहन राशि गांवों में बागवानी, सब्जी उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। सगंध खेती से गांवों की तस्वीर बदल रही है। प्रदेश के किसानों को अब 01 लाख तक का तथा महिला स्वयं सहायता समूहों को 05 लाख तक का ऋण बिना ब्याज के दिया जायेगा। भुगतान में धान का पूरा मूल्य किसानों को रिकार्ड समय से आनलाईन भुगतान किया गया।
प्रदेश में पर्यटन को बढावा देने के लिये नई पर्यटन नीति लागू की गई है जिसके तहत पर्यटन की गतिविधियों खासतौर से एडवेंचर टूरिज्म को एमएसएमई के दायरे में लाया गया है। ग्रामीण पर्यटन को मजबूत करने के लिए 5 हजार होमस्टे स्थापित करने का लक्ष्य है जिसमें से 802 नए होमस्टे पंजीकृत हो चुके हैं। इसमें होमस्टे को घरेलू दरों पर बिजली देने का मन बनाया है। 13 जिलों में 13 नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन का विकास जारी है, इसके लिए बजट जारी किया गया है। ऋषिकेश में वेलनेस सिटी व कनवेंशन सेंटर स्थापित किया जा रहा है।
ऋषिकेश, ऑली, टिहरी में एडवेंचर गतिविधियों को प्रोत्साहन। ऋषिकेश एडवेंचर टूरिज्म की राजधानी बना। फिल्म पॉलिसी से राज्य में फिल्मों की शूंटिंग को प्रोत्साहन मिला है। 100 फिल्मों, टीवी सीरियल की शूटिंग उत्तराखंड में हो चुकी है। बड़े बड़े निर्देशक और अभिनेता यहां शूटिंग के लिए आने वाले हैं। होम स्टे योजना के तहत विद्युत बिलों का भुगतान व्यवासायिक दर की बजाय घरेलू दर पर उपलब्ध करायी जायेगी। शीघ्र ही ऋषिकेश में इन्टरनेशन कन्वेकशन सेन्टर की स्थापना की जायेगी। इसके लिये भारत सरकार द्वारा 934 हेक्टेयर भूमि निःशुल्क उपलब्ध करायी गयी है। इसका बाजार मूल्य 20 हजार करोड है। प्रदेश में फिल्म सिटी के निर्माण के लिये एयर पोर्ट के समीप स्थान की तलाश की जा रही है।

प्रदेश में देवभोग प्रसाद योजना से महिलाएं सशक्त बन रही हैं। पिछले सीजन में केदारनाथ धाम में 1.60 करोड रूपए़ का प्रसाद महिलाओं ने बेचा है। महिला समूहों को सशक्त बनाने के लिए बिना ब्याज के रू0 5 लाख तक का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। महिला सुरक्षा के लिए कल ही एक पैनिक बटन शुरू किया गया है। पैनिक बटन का इस्तेमाल आपात स्थिति में बहन, बेटियां कर सकती हैं। इसे कीरिंग, ब्रैसलेट अथवा अन्य किसी रूप में महिलाएं अपने पास रख सकती हैं। कार्यस्थल पर शोषण की शिकायतों के निस्तारण व सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने हेतु SHE-BOX अधिकार दिया गया है।
जिसमें कोई भी पीड़ित शिकायत दर्ज करा सकती है। मातृ वन्दना योजना में 63,098 महिलाओं को मिला अनुदान दिया गया है।उत्तराखण्ड सहकारी डेरी फेडरेशन के माध्यम से आंगनबाडी केन्द्रों पर आने वाले 03 से 06 वर्ष  के लगभग 2.50 लाख बच्चों को सप्ताह में 02 दिन मीठा दूध उपलब्ध कराया जायेगा। इससे कुपोषण से छुटकारा मिल सकेगा। प्रदेश के पौष्टिक आहार ऊर्जा की केन्द्र सरकार द्वारा भी सराहना की गयी है। इस आहार को भी आंगनबाडी केन्द्रों के माध्यम से वितरण किया जा रहा है।
बहराल इन सब के बीच 2 सालो के अंदर सबसे महत्वपूर्ण बात ये रही कि खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत चोकीदार बनकर
भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में कामयाब रहे मतलब पूरे 2 साल जीरो टॉयलेट से चली त्रिवेंद्र सरकार।



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